एक पूर्व CEC को मंत्री बनाया, दूसरे को चुनावी टिकट दिया: पीयूष गोयल ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। गोयल ने कांग्रेस के रुख को बचकाना बताते हुए राहुल गांधी के आरोपों को झूठा और बेबुनियाद कहा। उन्होंने कांग्रेस के पिछले कार्यकाल में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों को मिले पदों और राजनीतिक अवसरों का हवाला देते हुए पूछा कि अब चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भी आपत्तियां जताई गई हैं। इसी राजनीतिक विवाद के बीच गोयल ने कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर आरोप लगाने से पहले अपने पुराने फैसलों और पूर्व चुनाव आयुक्तों के साथ किए गए व्यवहार पर भी विचार करना चाहिए।
गोयल ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बिना आधार के बातें कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के विरोध को राजनीतिक बताया और कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को सामने रखना चाहिए। यह गोयल का राजनीतिक आरोप है; विपक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर अलग दावे किए जा रहे हैं।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों के उदाहरण दिए
पीयूष गोयल ने अपने तर्क में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन और एम.एस. गिल का उदाहरण दिया। शेषन ने मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल पूरा करने के बाद 1999 में कांग्रेस के टिकट पर गांधीनगर से लोकसभा चुनाव लड़ा था। वहीं एम.एस. गिल मुख्य चुनाव आयुक्त रहने के बाद कांग्रेस में शामिल हुए, राज्यसभा सदस्य बने और केंद्र में मंत्री भी रहे। गोयल ने इन घटनाओं का हवाला देकर कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ देने का आरोप लगाया।
एम.एस. गिल को वर्ष 2000 में पद्म विभूषण दिया गया था। वह दिसंबर 1996 से जून 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे। बाद में वह कांग्रेस से जुड़े और राज्यसभा पहुंचे; उन्होंने केंद्रीय मंत्री के रूप में भी काम किया। इसलिए पुरस्कार, चुनावी राजनीति और मंत्री पद से जुड़े इन उदाहरणों का उल्लेख गोयल ने कांग्रेस की आलोचना के संदर्भ में किया।
कांग्रेस पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप
गोयल का कहना है कि कांग्रेस अपने शासनकाल में चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक अवसर और सम्मान देती रही, लेकिन अब वही पार्टी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को निराधार बताते हुए कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शनों की आलोचना की। गोयल के बयान का आशय यह था कि चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस का वर्तमान रुख उसके अपने पुराने राजनीतिक व्यवहार से मेल नहीं खाता।
हालांकि, शेषन के चुनाव लड़ने और गिल के कांग्रेस में शामिल होकर मंत्री बनने जैसे तथ्य अपने आप में राजनीतिक आरोपों को साबित नहीं करते। गोयल ने इन्हें कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए उदाहरण के तौर पर रखा है। इन घटनाओं की राजनीतिक व्याख्या पर दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
CEC के खिलाफ प्रदर्शन जारी
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन ऐसे समय हो रहे हैं, जब विपक्षी दल एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सरकार तथा चुनाव आयोग से जवाब मांग रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और कथित गड़बड़ियों की जांच की जानी चाहिए। दूसरी ओर, भाजपा नेता विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताते हुए उनका विरोध कर रहे हैं।
पीयूष गोयल के बयान से चुनाव आयोग को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी मांगों पर जोर दे रहे हैं, वहीं गोयल ने कांग्रेस के पुराने उदाहरण सामने रखकर राहुल गांधी और पार्टी के रुख पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
