मानहानि केस में राहुल गांधी को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पर लगाई रोक; राफेल टिप्पणी से जुड़ा मामला
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने महाराष्ट्र की निचली अदालत में चल रही आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी। अदालत ने राहुल गांधी की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। यह आदेश मामले का अंतिम निपटारा नहीं है; फिलहाल ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगी है।
बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती
राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 8 सितंबर 2026 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ जारी समन रद्द करने से इनकार कर दिया था। यह समन मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत ने शिकायत पर सुनवाई के बाद अगस्त 2019 में जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए। पीठ ने मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और आगे सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद निचली अदालत में फिलहाल आगे की सुनवाई नहीं होगी। हालांकि, अदालत ने अभी शिकायत या आरोपों की मेरिट पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है। शिकायतकर्ता और महाराष्ट्र सरकार के जवाब मिलने के बाद याचिका पर आगे विचार किया जाएगा।
2018 की रैली और राफेल टिप्पणी से जुड़ा मामला
यह मानहानि शिकायत वर्ष 2018 में राजस्थान में हुई एक सार्वजनिक सभा और राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर राहुल गांधी की टिप्पणियों से जुड़ी है। शिकायत के अनुसार, 20 सितंबर 2018 की सभा में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के लिए “चौकीदार चोर है” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी प्रधानमंत्री को “कमांडर-इन-थीफ” कहा था। इन टिप्पणियों को लेकर भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमल ने मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। ये बातें शिकायत में लगाए गए आरोप हैं।
शिकायतकर्ता ने अदालत में दलील दी थी कि प्रधानमंत्री के समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता होने के नाते वह इन टिप्पणियों से आहत हुए। शिकायत में यह भी कहा गया कि कथित बयान विभिन्न मीडिया माध्यमों और सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए। राहुल गांधी की ओर से इस शिकायत और उसके आधार पर जारी समन को चुनौती दी गई थी।
शिकायत की वैधता पर है कानूनी सवाल
मामले में एक प्रमुख कानूनी प्रश्न यह है कि क्या किसी राजनीतिक नेता की कथित टिप्पणी से आहत होने का दावा करने वाला राजनीतिक दल का कार्यकर्ता आपराधिक मानहानि की शिकायत दायर कर सकता है, जबकि बयान सीधे उसी व्यक्ति के बारे में न हो। हाईकोर्ट में राहुल गांधी की ओर से शिकायत की वैधता को चुनौती दी गई थी, लेकिन अदालत ने समन रद्द करने से इनकार कर दिया। अब सुप्रीम कोर्ट इस चुनौती और संबंधित पक्षों के जवाब पर विचार करेगा।
ट्रायल पर रोक का मतलब अंतिम फैसला नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई है और राज्य सरकार तथा शिकायतकर्ता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। इसलिए इस आदेश को राहुल गांधी के खिलाफ मामला समाप्त होने या उन्हें आरोपों से अंतिम रूप से मुक्त किए जाने के तौर पर नहीं देखा जा सकता। आगे की सुनवाई में अदालत याचिका और जवाबों पर विचार करेगी।
इस आदेश से राहुल गांधी को मामले की सुनवाई के दौरान अंतरिम राहत मिली है। अब चार सप्ताह में जवाब दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस प्रकरण में आगे की दिशा तय करेगा। मामला राफेल सौदे और प्रधानमंत्री पर की गई कथित टिप्पणियों से जुड़ी शिकायत की कानूनी वैधता पर केंद्रित रहेगा।
