नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से मिलेगा कल्याण, पंडित सुरेश पांडेय ने बताया महत्व
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इन दिनों भक्त व्रत रखते हैं, मंत्र-जाप करते हैं और देवी की आराधना में समय बिताते हैं। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से साधक को आध्यात्मिक लाभ मिलता है और मन में भक्ति-भाव मजबूत होता है। कालचक्र में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय ने नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती के पाठ के महत्व के बारे में बताया।
दुर्गा सप्तशती का पाठ क्यों है विशेष
दुर्गा सप्तशती में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों, उनके पराक्रम और भक्तों पर उनकी कृपा का वर्णन मिलता है। नवरात्रि में देवी की पूजा के साथ इसका पाठ करना कई परिवारों की धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। श्रद्धालु मानते हैं कि पाठ के माध्यम से मां दुर्गा का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति में सकारात्मक विचार आते हैं।
पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार, नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ मां दुर्गा की आराधना का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। भक्त इस पाठ के जरिए देवी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और सुख, शांति तथा समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। पाठ करते समय मन को शांत और एकाग्र रखना चाहिए। धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धा और भाव का विशेष महत्व माना गया है।
नियमित पाठ से मन में बढ़ता है एकाग्रता का भाव
नवरात्रि के नौ दिनों में कई भक्त रोजाना दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। कुछ श्रद्धालु पूरा पाठ करते हैं, जबकि कुछ अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इसके अंशों का पाठ करते हैं। पूजा-पाठ के लिए समय तय कर लेने से नियमितता बनी रहती है। पाठ के दौरान जल्दबाजी से बचना और देवी का ध्यान करना उचित माना जाता है।
धार्मिक दृष्टि से पाठ केवल किसी मनोकामना की पूर्ति के लिए नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और साधना का अवसर भी है। इससे भक्त को कुछ समय के लिए दैनिक व्यस्तताओं से अलग होकर पूजा और ध्यान में मन लगाने का अवसर मिलता है। मां दुर्गा के स्वरूपों और उनकी शक्ति का स्मरण साधक को धैर्य, साहस और संयम की प्रेरणा देता है।
श्रद्धा और परंपरा के अनुसार करें पूजा
दुर्गा सप्तशती के पाठ की विधि अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में अलग हो सकती है। कुछ लोग नवरात्रि के सभी दिनों में पाठ करते हैं, तो कुछ विशेष दिन पर इसका पाठ करते हैं। भक्त अपनी श्रद्धा, समय और घर की पूजा-पद्धति के अनुसार इसे कर सकते हैं। यदि किसी विशेष विधि या नियम को लेकर जानकारी चाहिए तो जानकार पंडित से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
पाठ के समय स्वच्छता और एकाग्रता बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। पूजा स्थल पर बैठकर मां दुर्गा का ध्यान करें और अपनी क्षमता के अनुसार पूजा-पाठ करें। जो लोग पूरा पाठ नहीं कर पाते, वे देवी का स्मरण, मंत्र-जाप या प्रार्थना कर सकते हैं। धार्मिक आस्था में भाव को महत्वपूर्ण माना गया है।
आज मां चंद्रघंटा की पूजा
आज 13 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। शारदीय नवरात्रि का यह तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित माना जाता है। भक्त मां चंद्रघंटा की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में शांति की कामना करते हैं। नवरात्रि के हर दिन देवी के अलग-अलग स्वरूप की आराधना की जाती है, इसलिए भक्त दिन के अनुसार पूजा और पाठ करते हैं।
दी गई पंचांग जानकारी के अनुसार, तृतीया तिथि रात 11 बजकर 37 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी। आज विशाखा और अनुराधा नक्षत्र रहेंगे। प्रीति और आयुष्मान योग का प्रभाव रहेगा। करण की बात करें तो तैतिल, गर और वणिज करण बताए गए हैं।
नवरात्रि में साधना और भक्ति का अवसर
नवरात्रि को पूजा, संयम और आत्मचिंतन का पर्व माना जाता है। इन दिनों भक्त व्रत, पूजा, ध्यान और सेवा के माध्यम से देवी के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं। दुर्गा सप्तशती का पाठ भी इसी साधना का एक रूप है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा की आराधना से भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा और मनोबल मिलता है।
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ कर भक्त देवी का आशीर्वाद मांग सकते हैं। श्रद्धा और नियमितता के साथ की गई आराधना भक्त को आध्यात्मिक शांति का अनुभव करा सकती है।
