राहुल गांधी को मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत, ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ महाराष्ट्र की ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर मंगलवार को रोक लगा दी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता महेश एच. श्रीश्रीमल को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ मानहानि की कार्यवाही रद्द करने की मांग खारिज कर दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि इस विषय में सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों से कानून स्थापित है। याचिका में मानहानि की शिकायत और निचली अदालत की कार्यवाही को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। पीठ ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और इस बीच ट्रायल कोर्ट में आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई है।
इस आदेश का अर्थ यह है कि मामले की सुनवाई निचली अदालत में अस्थायी रूप से रुकेगी। शिकायत समाप्त होने या राहुल गांधी
किस टिप्पणी को लेकर दर्ज है मामला?
शिकायत 2018 में राफेल विमान सौदे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर राहुल गांधी के भाषणों तथा कथित टिप्पणियों से जुड़ी है। शिकायतकर्ता महेश एच. श्रीश्रीमल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के बयान प्रधानमंत्री के साथ-साथ भाजपा और उससे जुड़े लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं। शिकायत में “चोरों का सरदार” और “कमांडर-इन-थीफ” जैसे कथित बयानों का उल्लेख किया गया है। इन टिप्पणियों को लेकर मुंबई की गिरगांव अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दायर की गई थी।
शिकायतकर्ता ने अदालत में यह भी तर्क दिया था कि वह भाजपा का सदस्य है और प्रधानमंत्री के बारे में की गई टिप्पणी से वह आहत हुआ। राहुल गांधी की ओर से पहले यह सवाल उठाया गया कि क्या शिकायतकर्ता को इस मामले में मानहानि की शिकायत करने का अधिकार है, क्योंकि कथित टिप्पणी में उसका नाम नहीं लिया गया था। इस विवाद का कानूनी पहलू यही है कि क्या किसी राजनीतिक नेता के बारे में की गई टिप्पणी से पार्टी के सदस्य भी शिकायतकर्ता के रूप में प्रभावित पक्ष माने जा सकते हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की थी?
राहुल गांधी ने मजिस्ट्रेट अदालत की ओर से जारी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने 8 सितंबर 2026 को उनकी याचिका खारिज कर दी और मानहानि की शिकायत रद्द करने से इनकार किया। अदालत ने कहा था कि शुरुआती स्तर पर यह तय करना उचित नहीं होगा कि कथित टिप्पणी केवल प्रधानमंत्री तक सीमित थी या उसका असर भाजपा के सदस्यों और पदाधिकारियों पर भी पड़ सकता था। इस प्रश्न पर विचार सुनवाई के दौरान किया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट जाने का अवसर देने के लिए निचली अदालत की कार्यवाही को छह सप्ताह तक टालने का निर्देश दिया था। इसके बाद राहुल गांधी ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की। अब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर अगला आदेश आने तक रोक लगा दी है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। जवाब आने के बाद अदालत यह तय करेगी कि याचिका पर आगे किस तरह सुनवाई की जाए। फिलहाल निचली अदालत में मामले की आगे की सुनवाई रुकी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश राहुल गांधी को प्रक्रियात्मक राहत देता है, लेकिन मानहानि की शिकायत पर अंतिम निर्णय नहीं है।
मामला राजनीतिक बयान और आपराधिक मानहानि कानून की सीमा से जुड़े सवाल भी उठाता है। अदालत को आगे यह देखना होगा कि शिकायतकर्ता की याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं और कथित टिप्पणी के दायरे को किस तरह समझा जाना चाहिए। तब तक मामले में लगाए गए आरोप शिकायत और याचिका के पक्षों के दावे हैं; उनका अंतिम निर्धारण अदालत की आगे की सुनवाई में होगा।
