वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिलने पर कोच मनीष ओझा नाराज, टीम मैनेजमेंट पर लगाए आरोप
भारतीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा टी20 सीरीज के शुरुआती तीन मुकाबलों में प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली। इस फैसले पर उनके बचपन के कोच मनीष ओझा ने नाराजगी जताई है। उन्होंने गौतम गंभीर की अगुवाई वाले टीम मैनेजमेंट की चयन नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रतिभाशाली खिलाड़ी को बेंच पर बैठाकर तैयार नहीं किया जा सकता। ओझा ने मैनेजमेंट के रवैये को “तानाशाही” बताया। ये आरोप कोच की राय हैं; चयन के फैसले पर टीम मैनेजमेंट का अपना पक्ष भी सामने आया है।
इंग्लैंड में कर चुके हैं अंतरराष्ट्रीय डेब्यू
वैभव ने जुलाई 2026 में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 मुकाबले से भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। इसके बाद वह टीम के साथ कई मुकाबलों में शामिल रहे, लेकिन उन्हें लगातार प्लेइंग इलेवन में खेलने का मौका नहीं मिला। उनकी भारतीय सरजमीं पर अब तक टी20 अंतरराष्ट्रीय शुरुआत भी नहीं हुई है। इसीलिए घरेलू मैदान पर उन्हें खेलते देखने की उम्मीद कर रहे प्रशंसकों के बीच चयन को लेकर चर्चा जारी है।
वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में टीम ने शुरुआती तीन मुकाबलों के लिए अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन की ओपनिंग जोड़ी को प्राथमिकता दी। वैभव टीम में शामिल हैं, लेकिन शुरुआती मैचों में उन्हें अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली। इससे उनके खेलने की भूमिका और टीम की ओपनिंग संयोजन पर सवाल उठे हैं
कोच मनीष ओझा ने क्या कहा?
स्पोर्ट्स नाउ से बातचीत में मनीष ओझा ने कहा कि वैभव बेहद प्रतिभाशाली हैं और उन्हें मैदान पर खेलने का अवसर मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, युवा खिलाड़ियों को दबाव और चुनौती वाली परिस्थितियों में उतारकर ही तैयार किया जा सकता है। ओझा ने कहा कि केवल बेंच पर बैठने से खिलाड़ी का अनुभव और आत्मविश्वास नहीं बढ़ता। उन्होंने वैभव को बाहर बैठाए रखने के फैसले पर सवाल उठाया और कहा कि खिलाड़ी को पानी पिलाने तक सीमित रखना उसके विकास में मददगार नहीं होगा।
ओझा ने यह भी कहा कि वैभव को लगातार मौका न देना उन्हें निराश कर सकता है। उनके बयान का सीधा निशाना टीम मैनेजमेंट के चयन और खिलाड़ी को इस्तेमाल करने के तरीके पर था। उन्होंने मैनेजमेंट पर मनमाने फैसले लेने का आरोप लगाते हुए उसके रवैये को तानाशाही जैसा बताया।
गंभीर ने बताई थी इंतजार कराने की वजह
वैभव को मौका नहीं मिलने पर कोच गौतम गंभीर पहले अपनी बात रख चुके हैं। उन्होंने कहा था कि उन्होंने युवा बल्लेबाज से बातचीत कर समझाया कि उसे अवसर के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। गंभीर के अनुसार, अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन ने लंबे समय से टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन किया है, इसलिए संयोजन में बदलाव करते समय उन खिलाड़ियों के योगदान को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
गंभीर ने यह भी कहा था कि केवल बाहरी चर्चा या सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया से प्लेइंग इलेवन तय नहीं होती। उनके मुताबिक, चयन का आधार यह होता है कि कप्तान और कोच को टीम की जीत के लिए कौन-सा संयोजन सबसे उपयुक्त लगता है। इस तरह चयन को लेकर कोच ओझा और टीम मैनेजमेंट की सोच में अंतर साफ दिखाई देता है: ओझा युवा खिलाड़ी को नियमित मौका देने की बात कर रहे हैं, जबकि गंभीर मौजूदा ओपनिंग जोड़ी में निरंतरता बनाए रखने के पक्ष में हैं।
एशियन गेम्स में मिला था मौका
वैभव को 2026 एशियन गेम्स के दौरान टी20 टीम में खेलने का अवसर मिला था। उस समय वीवीएस लक्ष्मण टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वैभव ने अभिषेक शर्मा के साथ ओपनिंग की और टूर्नामेंट में उपयोगी पारियां खेलीं। इसी प्रदर्शन के बाद वेस्टइंडीज सीरीज में भी उन्हें मौके की उम्मीद थी, लेकिन पहले तीन मैचों में टीम ने सैमसन और अभिषेक को ओपनिंग के लिए चुना।
चयन पर बहस जारी
वैभव की उम्र और कम समय में मिली लोकप्रियता ने उनके चयन को चर्चा का विषय बना दिया है। उनके समर्थक चाहते हैं कि उन्हें पर्याप्त मैच खेलने का अवसर मिले, जबकि टीम मैनेजमेंट अनुभवी खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टीम संयोजन को आधार बता रहा है। कोच ओझा की नाराजगी के बाद यह बहस और तेज हो गई है कि युवा प्रतिभा को कितनी जल्दी नियमित भूमिका मिलनी चाहिए और टीम में जगह बनाने के लिए उसे कितना इंतजार करना चाहिए।
फिलहाल वैभव टीम के साथ हैं और आगे के मुकाबलों में उन्हें मौका मिलेगा या नहीं, यह टीम मैनेजमेंट के चयन पर निर्भर करेगा। उनके कोच की टिप्पणी ने चयन नीति पर सवाल जरूर उठाए हैं, लेकिन अंतिम फैसला मैदान पर टीम संयोजन और उपलब्ध खिलाड़ियों को देखकर लिया जाएगा।
