कान्हा नेशनल पार्क: कब जाएं, कैसे बुक करें सफारी और कितना लगेगा खर्च? पहली बार जाने वालों के लिए पूरी गाइड
मध्य प्रदेश के मंडला और बालाघाट जिलों में फैला कान्हा टाइगर रिजर्व बाघ, बारहसिंगा और मध्य भारत के जंगलों के लिए जाना जाता है। यहां घूमने का प्लान बनाते समय सफारी का परमिट, प्रवेश गेट, ठहरने की जगह और मौसम पहले तय करना जरूरी है। सफारी में वन्यजीव दिखने की संभावना रहती है, लेकिन बाघ या किसी खास जानवर का दिखना तय नहीं होता।
घूमने का सही समय
कान्हा टाइगर रिजर्व की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, पार्क आम तौर पर 15 अक्टूबर से 30 जून तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है और मानसून के दौरान बंद रहता है। अक्टूबर से मार्च तक मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और आरामदायक रहता है। अप्रैल से जून में गर्मी अधिक होती है, लेकिन जंगल में पानी के स्रोत घटने पर जानवरों के आसपास दिखने की संभावना बढ़ सकती है। इसी वजह से गर्मियों में भी कई पर्यटक सफारी के लिए पहुंचते हैं। सफारी की ऑनलाइन बुकिंग पहले से खुलती है और लोकप्रिय तारीखों के परमिट जल्दी भर सकते हैं, इसलिए यात्रा की योजना पहले बनाना बेहतर है।
सफारी के जोन और प्रवेश गेट
कान्हा के कोर क्षेत्र में कान्हा, किसली, मुक्की और सरही जोन हैं। बफर क्षेत्र में खटिया, खापा और सिजोरा जोन में भी सफारी की सुविधा है। हर जोन का अपना प्रवेश गेट है, इसलिए परमिट बुक करने के बाद उसी गेट के पास ठहरने की व्यवस्था करना सुविधाजनक होगा। रिजर्व की वेबसाइट के अनुसार, खटिया, मुक्की और सरही प्रमुख प्रवेश बिंदु हैं।
ऑनलाइन सफारी बुकिंग कैसे करें
सफारी परमिट मध्य प्रदेश वन विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर बुक किया जा सकता है। पोर्टल पर कान्हा चुनें, फिर सफारी की तारीख, जोन और परमिट का प्रकार—पूरी गाड़ी या सिंगल सीट—चुनकर उपलब्धता देखें। पूरी गाड़ी के परमिट में एक वाहन के लिए बुकिंग होती है, जबकि सिंगल सीट बुकिंग अकेले या कम लोगों में जाने वालों के लिए विकल्प हो सकती है। बुकिंग के समय यात्रियों के नाम और पहचान-पत्र की जानकारी सही भरें।
वन विभाग के पोर्टल पर सामान्य सफारी की बुकिंग 120 दिन पहले रोजाना सुबह 11 बजे खुलने की जानकारी दी गई है। सामान्य बुकिंग सफारी से एक दिन पहले शाम 5 बजे बंद हो जाती है। कुछ उपलब्ध सीटों के लिए सिंगल सीट बुकिंग एक दिन पहले दोपहर 2 बजे और प्रीमियम तत्काल बुकिंग सात दिन पहले सुबह 11 बजे खुलती है। ये विकल्प सीट उपलब्ध होने पर ही मिलते हैं।
सफारी का समय और अनुमानित खर्च
अक्टूबर और नवंबर के लिए वन विभाग के पोर्टल पर सुबह की सफारी का प्रवेश समय सुबह 6 बजे से और वापसी समय 11:30 बजे तक दिया गया है। शाम की सफारी का प्रवेश समय दोपहर 3 बजे और वापसी समय शाम 6 बजे तक है। दिसंबर से महीने के अनुसार समय बदलता है, इसलिए अपनी तारीख के लिए परमिट पोर्टल पर समय जरूर जांचें।
खर्च में केवल ऑनलाइन परमिट शामिल मानकर बजट न बनाएं। वन विभाग का पोर्टल बताता है कि वाहन और गाइड का शुल्क परमिट राशि से अलग लिया जाता है। एक ऑनलाइन सफारी बुकिंग सेवा के अनुसार, भारतीय पर्यटकों के लिए कोर जोन की एक जीप सफारी का कुल अनुमान लगभग ₹7,500 से ₹8,000 प्रति जीप हो सकता है; इसमें तारीख के अनुसार परमिट और वाहन-गाइड शुल्क शामिल होते हैं। यह एक अनुमान है, सरकारी तय पैकेज नहीं। तारीख, जोन और शुल्क में बदलाव से कुल रकम बदल सकती है, इसलिए भुगतान से पहले आधिकारिक पोर्टल पर दिखाई गई राशि और गेट पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क की पुष्टि करें। ठहरने, भोजन और आने-जाने का खर्च इसमें शामिल नहीं है।
कान्हा कैसे पहुंचें और कहां ठहरें
रिजर्व की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, जबलपुर से खटिया गेट की दूरी सड़क मार्ग से लगभग 160 किलोमीटर है। मुक्की गेट जबलपुर से करीब 200 किलोमीटर और सरही गेट लगभग 150 किलोमीटर दूर है। निकट के रेलवे स्टेशनों में जबलपुर, गोंदिया, रायपुर, बिलासपुर और बालाघाट शामिल हैं। हवाई यात्रा के लिए जबलपुर, रायपुर और नागपुर के हवाई अड्डों का विकल्प है। सफारी के प्रवेश गेट के अनुसार आगे की सड़क यात्रा तय करनी होगी।
खटिया, मुक्की और सरही के आसपास मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम और निजी संचालकों के ठहरने तथा भोजन के विकल्प हैं। पार्क प्रबंधन के अनुसार, खटिया प्रवेश के पास वन विभाग का कान्हा जंगल कैंप भी उपलब्ध है। छुट्टियों और व्यस्त सीजन में कमरा पहले से बुक कराना ठीक रहेगा। सफारी का गेट दूर होने पर सुबह समय से पहुंचने के लिए उसी तरफ ठहरने की व्यवस्था करें।
पहली बार जा रहे हैं तो ध्यान रखें
सफारी परमिट, पहचान-पत्र और प्रवेश गेट की जानकारी यात्रा से पहले दोबारा जांच लें। निर्धारित समय से पहले गेट पर पहुंचें और गाइड के निर्देशों का पालन करें। जंगल में शोर न करें, वन्यजीवों को खाना न दें और वाहन से उतरने की कोशिश न करें। मौसम के अनुसार गर्म कपड़े, पानी और जरूरी दवाएं साथ रखें। बाघ दिखना सफारी की गारंटी नहीं है—कान्हा का अनुभव जंगल, बारहसिंगा, पक्षियों और प्राकृतिक वातावरण को देखने में भी है।
