आदिवासी परिवारों की जमीन निजी संस्था को देने की तैयारी का आरोप, कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन
कोमल अहिरवार | दमोह
दमोह। ग्राम कुसमी मानगढ़ के अनुसूचित जनजाति वर्ग के परिवारों की जमीन सुरक्षित रखने की मांग को लेकर जिला पंचायत सदस्य रजनी ठाकुर के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में गांव की महिलाएं और पुरुष शामिल हुए। महिलाओं ने हाथों में रस्सी बांधकर प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जताई और नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ग्राम कुसमी की करीब 50 एकड़ जमीन निजी संस्था को सौंपने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के परिवार लंबे समय से इस जमीन पर खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते आए हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि जमीन उनसे चली गई तो उनकी आजीविका प्रभावित होगी।
रजनी ठाकुर के नेतृत्व में सौंपा ज्ञापन
ज्ञापन सौंपते समय जिला पंचायत सदस्य रजनी ठाकुर ने कहा कि गरीब आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि उनकी जमीन और अधिकार सुरक्षित रखे जाएं तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। प्रदर्शनकारियों ने जमीन निजी संस्था को दिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
रजनी ठाकुर के साथ कांग्रेस के जिला और जबेरा ब्लॉक के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल हुए। ज्ञापन में ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग रखी गई।
महिलाओं ने रस्सी बांधकर जताया विरोध
कलेक्ट्रेट में हुए प्रदर्शन के दौरान ग्राम कुसमी की महिलाएं हाथों में रस्सी बांधकर पहुंचीं। उन्होंने कहा कि जमीन उनकी आजीविका से जुड़ी है और उसे खोने की आशंका से परिवार चिंतित हैं। प्रदर्शनकारियों ने जल, जंगल और जमीन पर आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा की मांग करते हुए नारे लगाए।
प्रदर्शन के दौरान रजनी ठाकुर ने कहा कि यदि परिवारों की जमीन छीनी गई तो वे आंदोलन तेज करेंगे। उन्होंने भूख हड़ताल और आत्मघाती कदम उठाने जैसी चेतावनी भी दी। यह बयान जमीन खोने की आशंका और परिवारों की आजीविका को लेकर उनकी चिंता के संदर्भ में दिया गया।
निष्पक्ष जांच और अधिकारों की सुरक्षा की मांग
ग्रामीणों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने प्रशासन से मांग की कि जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों और प्रस्तावित कार्रवाई की जांच की जाए। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को सुने बिना कोई निर्णय नहीं होना चाहिए। ज्ञापन में आदिवासी परिवारों के साथ न्याय करने, उनकी जमीन और अधिकार सुरक्षित रखने तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई हो तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जल, जंगल और जमीन पर अधिकार के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जीना आदिवासी समुदाय का हक है। उन्होंने प्रशासन से मामले में जल्द हस्तक्षेप कर परिवारों की चिंताओं का समाधान करने की अपील की।
इस संबंध में प्रशासन या संबंधित निजी संस्था का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका। जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया और ग्रामीणों के आरोपों की स्थिति आधिकारिक जांच या प्रशासनिक जानकारी के बाद स्पष्ट होगी।
