CJI का खरगे-राहुल को पत्र: लंबित मामलों पर बैठक शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ
सीजेआई सूर्यकांत ने ज्ञापन सौंपने के लिए मांगा गया समय देने से किया इनकार; कहा—मुद्दे न्यायिक प्रक्रिया से उठाएं
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर उनसे मुलाकात का अनुरोध स्वीकार नहीं किया। दोनों नेताओं ने सोमवार, 12 अक्टूबर को शाम 4 से 5 बजे के बीच मुलाकात के लिए समय मांगा था। वे सीजेआई को ज्ञापन सौंपना चाहते थे। सीजेआई ने 11 अक्टूबर को लिखे पत्र में कहा कि ज्ञापन में उठाए गए मुद्दे सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित हैं। ऐसे मामलों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाना संविधान के शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत और न्यायिक मर्यादा के अनुरूप नहीं होगा।
ज्ञापन में किन मुद्दों का उल्लेख था?
सीजेआई के पत्र के मुताबिक, खरगे और राहुल गांधी के अनुरोध में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और भारत निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दे, कई छात्रों की कथित मनमानी गिरफ्तारी, मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने और ट्रेनों के रद्द होने जैसे विषय शामिल थे। पत्र में कहा गया कि ये मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर बैठक कर लंबित मामलों पर चर्चा करना उचित नहीं होगा।
सीजेआई ने लिखा कि लंबित मामलों पर बैठक करना संविधान के मूल ढांचे से जुड़े शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ होगा। उन्होंने इसे स्थापित न्यायिक आचरण और न्यायिक मर्यादा के भी अनुरूप नहीं बताया। शक्तियों का पृथक्करण विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के कामकाज तथा अधिकारों की सीमाओं से जुड़ा संवैधानिक सिद्धांत है। पत्र में सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि अदालत के सामने विचाराधीन मुद्दों पर प्रशासनिक मुलाकात के जरिए चर्चा करना उचित प्रक्रिया नहीं होगी।
सुप्रीम कोर्ट की प्रशासनिक भूमिका पर टिप्पणी
सीजेआई सूर्यकांत ने पत्र में कहा कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट को ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर प्रशासनिक आदेश देने का अधिकार नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 32 और न्यायिक समीक्षा सहित अदालत की अन्य शक्तियों के तहत नागरिकों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर न्यायिक पक्ष में विचार किया जा सकता है।
पत्र में सुप्रीम कोर्ट की ओर से नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। सीजेआई ने कहा कि नागरिक कानून में निर्धारित प्रक्रिया के जरिए अपने मौलिक अधिकारों के संरक्षण और प्रवर्तन की मांग कर सकते हैं। उन्होंने खरगे और राहुल गांधी को प्रशासनिक पक्ष में ज्ञापन देने के बजाय अदालत की न्यायिक शक्तियों का इस्तेमाल करने की सलाह दी।
याचिका दाखिल करने का विकल्प दिया
सीजेआई ने पत्र में यह भी बताया कि समान मुद्दों से जुड़े कुछ मामले मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि यदि दोनों नेता उचित समझें तो सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं। याचिका सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक अदालत में भौतिक रूप से जमा की जा सकती है। इसके अलावा ई-फाइलिंग की सुविधा से किसी भी दिन और किसी भी समय याचिका दाखिल करने का विकल्प भी दिया गया।
सीजेआई ने भरोसा दिलाया कि कानून के मुताबिक ऐसी किसी भी याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी। इस तरह पत्र में मुलाकात से इनकार करने के साथ ही संबंधित मुद्दों को अदालत के न्यायिक पक्ष के सामने रखने का रास्ता भी बताया गया।
विपक्षी नेताओं के अनुरोध के बाद आया पत्र
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने सीजेआई से मिलने के लिए समय मांगा था ताकि वे संबंधित मुद्दों पर ज्ञापन सौंप सकें। यह अनुरोध ऐसे समय आया जब विपक्षी दलों ने इन मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की बात कही थी। सीजेआई का जवाब मिलने के बाद अब इन मुद्दों को अदालत के सामने रखने के लिए याचिका दाखिल करने का विकल्प सामने है।
पत्र में सीजेआई ने मुलाकात न देने का कारण लंबित मामलों की स्थिति, न्यायपालिका की प्रशासनिक सीमाओं और न्यायिक मर्यादा से जुड़ा बताया। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत मौलिक अधिकारों से जुड़े मामलों पर कानून के अनुसार सुनवाई के लिए उपलब्ध है। अब आगे की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष याचिका दाखिल करते हैं या नहीं और अदालत उसमें क्या निर्णय लेती है।
