SIR Controversy: “प्रधानमंत्री पर केस हो सकता है, चुनाव आयुक्तों को छूट क्यों?” ओवैसी ने कानून वापस लेने की मांग की
लखनऊ। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कामकाज के संबंध में कानूनी संरक्षण देना चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर सकता है। ओवैसी ने नियुक्ति समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को फिर से शामिल करने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रोकने की भी मांग की।
चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण पर उठाए सवाल
ओवैसी ने कहा कि जब नियुक्ति संबंधी विधेयक संसद में पेश हुआ था, तब भी उन्होंने इस प्रावधान पर चिंता जताई थी। उनके मुताबिक, चुनाव आयुक्तों को आधिकारिक कर्तव्य निभाते समय किए गए कामों के लिए कानूनी संरक्षण देने से संस्था पर जनता का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री या अन्य बड़े राजनीतिक नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है, तो चुनाव आयुक्तों को यह संरक्षण क्यों दिया जाना चाहिए। ओवैसी ने अपने तर्क में पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव और भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी से जुड़े पुराने मामलों का जिक्र किया। यह उनकी ओर से कानून के प्रावधान पर की गई राजनीतिक आलोचना है।
कानून की धारा 16 में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कर्तव्य या कार्य के निर्वहन में किए गए अथवा किए जाने का दावा किए गए कामों के संबंध में संरक्षण दिया गया है। ओवैसी ने इसी प्रावधान को लेकर कानून वापस लेने की मांग की।
नियुक्ति समिति में CJI को शामिल करने की मांग
ओवैसी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनी समिति की संरचना पर भी आपत्ति जताई। 2023 के कानून के तहत समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री की ओर से नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं। ओवैसी का कहना है कि इस व्यवस्था में सरकार का पक्ष मजबूत रहता है और इससे नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह पैदा हो सकता है।
उन्होंने मांग की कि नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाए। ओवैसी के मुताबिक, CJI की मौजूदगी से चयन प्रक्रिया में संतुलन और संस्थागत भरोसा मजबूत हो सकता है।
SIR रोकने की मांग, हटाए गए नामों पर सवाल
AIMIM प्रमुख ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर भी सवाल उठाए और इसे तत्काल रोकने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं और नए मतदाताओं से फॉर्म-6 भरते समय मैपिंग से जुड़ी जानकारी मांगी जा रही है। ओवैसी ने पूछा कि इस प्रक्रिया का आधार क्या है और मतदाताओं के लिए इसे पूरा करना कितना व्यावहारिक होगा।
उनके इन आंकड़ों और आरोपों की खबर में स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है। ओवैसी ने इन्हें अपनी आपत्तियों और राजनीतिक दावों के रूप में रखा। उन्होंने कहा कि कानून में बदलाव और SIR पर रोक, दोनों जरूरी हैं।
INDIA ब्लॉक के मार्च से खुद को अलग बताया
दिल्ली में INDIA ब्लॉक के नेताओं के सुप्रीम कोर्ट मार्च के बारे में पूछे जाने पर ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी इस गठबंधन का हिस्सा नहीं है और मार्च से उसका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन स्पष्ट किया कि INDIA ब्लॉक का कार्यक्रम उसका अपना है और AIMIM इसमें शामिल नहीं है।
ओवैसी ने कहा कि नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है। साथ ही उन्होंने दिल्ली में सुरक्षा और बैरिकेडिंग को लेकर हुई व्यवस्थाओं की आलोचना की। इस तरह ओवैसी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और SIR पर अपनी मांगें रखीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट तक प्रस्तावित मार्च से दूरी बनाए रखी।
