Tikamgarh के कारी जंगल में 300 से अधिक सागौन के पेड़ कटने, 40-50 अवैध खदानों और 150 एकड़ वन भूमि पर कब्जे का आरोप, वन विभाग पर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं का दावा: कार्रवाई नहीं हुई, जांच दल पहुंचने से पहले ठूंठों पर नंबर डालने और खदानें भरने का काम; वन विभाग का पक्ष नहीं मिला
Tikamgarh । वन मंडल टीकमगढ़ के वन परिक्षेत्र टीकमगढ़ अंतर्गत बीट कारी नंबर-2, कक्ष क्रमांक आरएफ-51 के कारी जंगल में बड़े पैमाने पर वन अपराध का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि यहां 300 से अधिक सागौन के वृक्षों की अवैध कटाई, 40-50 से अधिक रेत-मुरम की अवैध खदानें और 150 एकड़ से अधिक वन भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत और मीडिया में खबरें आने के बावजूद वन विभाग ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
रोस्टर निरीक्षण पर सवाल
शिकायत में कहा गया है कि डिप्टी रेंजर से लेकर डीएफओ तक के अधिकारियों के रोस्टर के अनुसार बीट निरीक्षण केवल कागजों में हो रहे हैं। आरोप है कि मौके पर सैकड़ों कटे सागौन के ठूंठ, दर्जनों खदानें और बड़े पैमाने पर अतिक्रमण होने के बावजूद निरीक्षण पंजी में वन हानि दर्ज नहीं की गई। यह भी आरोप है कि सीसीएफ छतरपुर तक सूचना पहुंचने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।
गश्ती मार्ग निर्माण पर भी संदेह
बीट कारी में वन मार्ग (गश्ती मार्ग) उन्नयन कार्य को लेकर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि करीब 15 लाख रुपये की लागत से बने इस मार्ग के आसपास मिट्टी-मुरम के बड़े गड्ढे खोदे गए हैं। सवाल उठाया गया है कि यदि अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था तो सड़क किनारे हुए अवैध उत्खनन को नजरअंदाज क्यों किया गया।

सबूत मिटाने का आरोप
सबसे गंभीर आरोप यह है कि मामला मीडिया में आने के बाद वन अपराध को छिपाने का प्रयास हो रहा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि डीएफओ टीकमगढ़ ने पत्र क्रमांक 1167 दिनांक 04/10/26 से जांच दल गठित किया था। इसके बाद जांच दल के पहुंचने से पहले ही, बिना वन अपराध प्रकरण (POR) दर्ज किए, कटे हुए सागौन के ठूंठों पर झूठे नंबर डालने और खदानों को भरने का काम कराया जा रहा है। उनका कहना है कि इसके फोटो-वीडियो भी सामने आए हैं।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
शिकायत में वन परिक्षेत्र अधिकारी सौरभ जैन, एसडीओ मनीषा बघाड़े और डीएफओ राजाराम परमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि संबंधित वनरक्षक को जानबूझकर भारमुक्त नहीं किया जा रहा, ताकि गश्ती मार्ग सहित अन्य कार्यों की अनियमितताएं उजागर न हों।
उड़नदस्ता दल से जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच भोपाल के राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल से कराई जाए। उनका कहना है कि इससे वन संपदा के नुकसान और भ्रष्टाचार का बड़े पैमाने पर खुलासा हो सकता है। बताया गया है कि विधानसभा में भी टीकमगढ़ में अवैध उत्खनन और कटाई को लेकर प्रश्न उठ चुके हैं।
विभाग का पक्ष नहीं मिला
इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों का पक्ष नहीं मिल सका है। अधिकारियों से संपर्क करने पर जांच की बात कही जा रही है।
(खूब चन्द्र लोधी, संवाददाता, दैनिक स्वराज वाणी, टीकमगढ़)
