“भगवान राम के देश में हजारों कत्लखाने कैसे खुल जाते हैं?”: हार्दिक हुंडिया ने सरकार से पूछा सवाल, जीवदया प्रेमियों पर हमलों का भी उठाया मुद्दा
अहिंसा और जीवदया की बात करने वाली सरकार से बिना आवेदन, बिना प्रचार खुलते कत्लखानों पर जवाब की मांग
हार्दिक हुंडिया ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि जिस देश में भगवान राम, महावीर, कृष्ण और गुरु नानक को मानने वाले करोड़ों जीवदया प्रेमी हैं, वहां हजारों कत्लखाने कैसे खुल जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह सब बिना किसी आवाज, मांग या प्रचार के हो रहा है।
“राम के नाम पर वोट मांगने वाली सरकार जवाब दे”
हुंडिया ने कहा कि हिंदुत्व और राम के नाम पर वोट मांगने वाली और अहिंसा परमो धर्म की बात करने वाली सरकार से जनता को ऐसी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा, “हमने भारत माता की पवित्र भूमि और पवित्र सरकार समझकर वोट दिया, फिर भी अबोल जीवों की हत्या हो रही है, यह हम सोच भी नहीं सकते।”
जीवदया प्रेमियों पर हमलों का आरोप
उन्होंने कहा कि जीवदया प्रेमी अपनी जान जोखिम में डालकर अबोल जीवों को बचाते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें कई तरह की तकलीफें झेलनी पड़ती हैं। हुंडिया के अनुसार कई बार उन पर जानलेवा हमले होते हैं और कुछ मामलों में उन्हें मार भी दिया जाता है।
जन्मभूमि पर ही कत्लखाने, त्योहारों पर बंदी के लिए देना पड़ता है आवेदन
हुंडिया ने सरकार से अनुरोध किया कि भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम राम सहित कई महापुरुषों की जन्मभूमि पर खुले कत्लखाने बंद होने चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के पवित्र त्योहारों पर कत्लखाने बंद रखने के लिए जीवदया प्रेमियों को आवेदन देना पड़ता है, जबकि हजारों कत्लखाने बिना किसी आवेदन के कैसे खुल जाते हैं, यह समझ से परे है।
“राम की बात करने वाली सरकार राम के सिद्धांतों पर चले”
हुंडिया ने कहा कि वोट इस सोच के साथ दिया गया था कि राम की बात करने वाली सरकार राम के सिद्धांतों पर चलेगी। उन्होंने सरकार पर “हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और” की कहावत लागू होने का आरोप लगाया और कहा कि अहिंसा प्रेमियों के साथ चलने में ही सरकार की भलाई है।
