“आनंदमयी सद्भावना यात्रा”: दिल्ली से शिमला, मनाली, रोहतांग और कसोल तक, वयोवृद्ध यात्री बने बच्चे, डॉ. अखिल बंसल रहे प्रायोजक
हिमालय की वादियों में यादगार सफर, रोहतांग में नृत्य, अटल टनल का रोमांच, कसोल में पार्वती नदी किनारे रात्रि विश्राम“
(प्रायोजक: डॉ. अखिल बंसल | यात्रा वृत्तांत: योगेन्द्र जैन, दिल्ली-इंदौर)
जीवन के उल्लासपूर्ण और चिरस्थायी क्षणों में से एक रही यह यात्रा। इसमें वयोवृद्ध यात्री भी बच्चे बनकर आनंद लेते नजर आए।
दिल्ली से शिमला: हिमालय की गोद में पहला पड़ाव
यात्रा के पहले चरण में दल दिल्ली से शिमला पहुंचा। हिमालय की गोद में स्थित सुव्यवस्थित रिसॉर्ट में ठहराव रहा, जहां सभी सुविधाएं उपलब्ध थीं। शिमला शहर का भ्रमण मधुर रहा। दूसरे दिन काफी ऊंचाई पर स्थित कुफरी की यात्रा की गई।
शिमला से मनाली: पहाड़ियों के नजारे और हास्य-विनोद
प्रातःकाल शुरू हुई इस यात्रा में रास्ते भर हिमालय की सुरम्य पहाड़ियों का नजारा देखते और हंसी-मजाक करते हुए यात्री मनाली पहुंचे। शहर के बीच स्थित सुंदर होटल में ठहराव हुआ। शाम को मॉल रोड और बुद्धिस्ट मोनेस्ट्री का भ्रमण किया गया और वस्त्रों की खरीदारी हुई।

मनाली से रोहतांग: बर्फीले शिखरों का रोमांच
अल्पाहार के बाद रोमांच से भरी यात्रा शुरू हुई। ऊंचे हिम शिखरों की श्रृंखला का कोई अंत नहीं दिखता था। यहां वयोवृद्ध यात्री भी बच्चों की तरह नृत्य करते नजर आए। फोटोग्राफी की गई और वापसी में 9 किमी लंबी अटल टनल को देखकर सभी आश्चर्यचकित रह गए।
कसोल और पार्वती नदी: कैंप में यादगार रात
कसोल के पहले कैंप में भोजन और रात्रि विश्राम हुआ। कॉटेज के पास बहती पार्वती नदी की कल-कल ध्वनि ने मन मोह लिया। रात में डीजे की मधुर धुनों पर जमकर नृत्य हुआ। नदी किनारे कपड़े से बनी कॉटेज में रुकना रोमांचकारी अनुभव रहा।
मणिकरण दर्शन: उबलते गर्म पानी का स्रोत
यात्रा के अंतिम पड़ाव में मणिकरण के दर्शन हुए। यहां प्रकृति की अद्भुत रचना, उबलते गर्म पानी का स्रोत देखा गया। लंगर वितरण, फोटोग्राफी, कसोल बाजार में खरीदारी और नेचुरल गार्डन का आनंद भी लिया गया।
यादें समेटकर लौटा दल
यात्रियों का वापस आने का मन नहीं था, ऐसा लगता था कि इन हसीन वादियों में हमेशा के लिए बस जाएं। दिल्ली पहुंचकर इस रोमांच से भरी, अविस्मरणीय यात्रा का समापन हुआ।
