बड़वाह-धामनोद मार्ग पर 29.34 लाख रुपये का डिवाइडर निर्माण रुका, विधायक ने किया था भूमिपूजन, भाजपा पार्षदों के विरोध के बाद प्रशासन ने रोका काम
एसडीएम के मौखिक निर्देश पर नायब तहसीलदार ने बंद करवाया काम, सीएमओ बोले- लिखित आदेश नहीं मिला, अधिकारी मीडिया के सवालों से बचते दिखे
मंडलेश्वर। बड़वाह-धामनोद मार्ग पर सड़क सुरक्षा मद के तहत 29.34 लाख रुपये की लागत से बन रहे 400 एमएम डिवाइडर का निर्माण कार्य अचानक रोक दिया गया है। इस परियोजना का भूमिपूजन क्षेत्रीय विधायक राजकुमार मेव ने किया था। अब भाजपा पार्षदों, नगर परिषद के एल्डरमेन और भाजपा से जुड़े लोगों के विरोध के चलते काम रुकवाना पड़ा है।
16 जून को हुआ था भूमिपूजन, शिलालेख पर पार्षदों के नाम
परियोजना का भूमिपूजन 16 जून को क्षेत्रीय विधायक राजकुमार मेव के मुख्य आतिथ्य में हुआ था। शिलान्यास के शिलालेख पर स्थानीय भाजपा पार्षदों और जनप्रतिनिधियों के नाम भी दर्ज हैं। 30 सितंबर से जमीन पर काम शुरू हुआ और 8 दिन तक सुचारू चला। इसके बाद अपनी ही पार्टी के जनप्रतिनिधियों की आपत्तियां सामने आने लगीं।
शुक्रवार को नायब तहसीलदार ने बंद करवाया काम
शुक्रवार को मंडलेश्वर एसडीएम पूर्वा मंडलोई के मौखिक निर्देश पर नायब तहसीलदार संजय बावेल मौके पर पहुंचे और नगर परिषद कर्मचारियों की मौजूदगी में निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया।
पार्षद के पत्र में केवल आंशिक संशोधन की मांग
वार्ड क्रमांक 08 के पार्षद नितिन पाटीदार ने 23 सितंबर को मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि बस स्टैंड के पास सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण नर्मदा द्वार से कसरावद फाटे तक डिवाइडर न बनाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया था कि नवलपुरा से नर्मदा द्वार के सामने तक और कसरावद फाटे के आगे से बड़वाह रोड पेट्रोल पंप तक डिवाइडर बनाकर उस पर लाइटें लगाई जाएं।
पत्र के अनुसार पार्षद ने बस स्टैंड क्षेत्र की व्यावहारिक समस्या के कारण केवल आंशिक संशोधन मांगा था और बाकी मार्ग पर निर्माण का समर्थन किया था। इसके बावजूद आंशिक आपत्ति पर पूरा निर्माण रुकवा देने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
सीएमओ बोले- लिखित आदेश नहीं मिला
नगर परिषद सीएमओ संजय रावल ने बताया कि काम बंद कराने का कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि एसडीएम का फोन आया था और उनके निर्देश पर नायब तहसीलदार की मौजूदगी में काम बंद कराया गया। वरिष्ठ अधिकारियों से लिखित मार्गदर्शन मिलने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

अधिकारियों का पक्ष नहीं मिला
काम रोके जाने के कारणों पर जब प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया गया तो वे मीडिया के सवालों से बचते दिखे। नायब तहसीलदार संजय बावेल ने फोन रिसीव नहीं किया। एसडीएम पूर्वा मंडलोई से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने भी फोन नहीं उठाया।
विरोध करने वालों पर भी उठ रहे सवाल
विरोध करने वाले पार्षदों और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। 16 जून को भूमिपूजन के समय क्षेत्रीय विधायक, भाजपा मंडल अध्यक्ष, नगर परिषद अध्यक्ष, पार्षद और एल्डरमेन स्वयं मौजूद थे। ऐसे में परियोजना के तकनीकी पहलुओं पर पहले ही विस्तार से चर्चा क्यों नहीं हुई, यह सवाल उठ रहा है।
अतिक्रमण पर निष्क्रियता का आरोप
नगर परिषद से अंबेडकर चौराहे तक का मुख्य मार्ग फल-सब्जी के अवैध ठेलों और अनियंत्रित पार्किंग के कारण रोज जाम से जूझता है। स्थानीय समाचार पत्रों और शांति समिति की बैठकों में यह मुद्दा बार-बार उठा और राजस्व विभाग से शिकायतें भी की गईं, लेकिन अतिक्रमण हटाने में विभाग ने रुचि नहीं दिखाई। आरोप है कि जो विभाग डिवाइडर का काम रुकवाने में तत्पर रहा, वही अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर कार्रवाई में निष्क्रिय है।
अब देखना होगा कि स्वीकृत राशि वाले इस जनहित के काम का आगे क्या भविष्य तय होता है।
(दैनिक स्वराज वाणी संवाददाता, मंडलेश्वर)
