कांग्रेस नेता दीपक बाबरिया का निधन, एमपी में उनके प्रभारी रहते बनी थी कमलनाथ सरकार
भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रभारी दीपक बाबरिया का शनिवार को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे और अहमदाबाद के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर से कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
बाबरिया मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी उस समय थे, जब पार्टी ने 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर राज्य में सरकार बनाई थी। चुनाव के बाद कमलनाथ मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस के गुजरात प्रवक्ता मनीष दोशी के अनुसार, जीत के बाद बाबरिया ने राहुल गांधी से कहा था कि अब उन्हें सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए।
संगठन में निभाई अहम जिम्मेदारी
दीपक बाबरिया कांग्रेस के संगठनात्मक कामों में लंबे समय तक सक्रिय रहे। वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव भी रहे और 2023 में हरियाणा तथा दिल्ली के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली। पार्टी में उन्हें पर्दे के पीछे संगठन को मजबूत करने वाले नेता के रूप में जाना जाता था। उन्होंने चुनावी रणनीति और घोषणापत्र तैयार करने जैसे कामों में भी भूमिका निभाई।
मध्य प्रदेश में प्रभारी रहते हुए उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी संगठन के साथ काम किया। कांग्रेस ने उस चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर कर सरकार बनाई थी। बाबरिया की भूमिका को लेकर पार्टी के नेताओं ने उन्हें कुशल संगठनकर्ता और रणनीतिकार बताया है। 2024 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री के चयन के लिए कांग्रेस की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षकों में भी वे शामिल थे।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने जताया दुख
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बाबरिया के निधन को कांग्रेस परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने उनके संगठन के प्रति समर्पण और पार्टी को मजबूत करने में योगदान को याद किया। प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी शोक व्यक्त करते हुए उन्हें कांग्रेस पार्टी और उसकी विचारधारा के प्रति समर्पित नेता बताया। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताई।
1970 के दशक से कांग्रेस से जुड़े थे
बाबरिया 1970 के दशक से कांग्रेस के साथ जुड़े थे। उन्होंने पार्टी में कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं, हालांकि वे कभी कोई चुनाव नहीं लड़े और निर्वाचित पद पर नहीं रहे। पेशे से वे केमिकल इंजीनियर थे। वर्ष 2020 में उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, जिसके बाद स्वस्थ होकर वे फिर संगठन के काम में सक्रिय हुए। वे अहमदाबाद में रहते थे।
उनके निधन से कांग्रेस ने एक ऐसे संगठनात्मक नेता को खो दिया है, जिन्होंने कई राज्यों में पार्टी की जिम्मेदारी संभाली। मध्य प्रदेश कांग्रेस में उनके कार्यकाल को 2018 के विधानसभा चुनाव और कमलनाथ सरकार के गठन के दौर के लिए याद किया जाएगा।
