माओवादी गतिविधियों में कमी के बाद पहली बार राहुल गांधी का बस्तर दौरा प्रस्तावित, बोधघाट प्रभावितों से करेंगे मुलाकात
रायपुर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का दौरा प्रस्तावित है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के मुताबिक, राहुल गांधी बस्तर में बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों और किसानों से मिलकर उनकी चिंताएं सुनेंगे। दौरे की तारीख और विस्तृत कार्यक्रम अभी घोषित नहीं हुआ है। कांग्रेस इस प्रवास के जरिए आदिवासी ग्रामीणों के अधिकार, विस्थापन और परियोजना से जुड़ी आशंकाओं को उठाने की तैयारी में है।
यह दौरा ऐसे समय प्रस्तावित है, जब बस्तर में माओवादी गतिविधियों में कमी के बाद विकास परियोजनाओं और स्थानीय समुदायों के अधिकारों को लेकर चर्चा तेज हुई है। बोधघाट परियोजना का मुद्दा लंबे समय से क्षेत्र में विवाद का विषय रहा है। कांग्रेस के अनुसार, राहुल गांधी प्रभावित गांवों के लोगों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं जानेंगे। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वे किन गांवों में जाएंगे और दौरे के दौरान उनकी बैठकें कहां होंगी।
बोधघाट परियोजना को लेकर ग्रामीणों की चिंता
बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य सिंचाई और बिजली उत्पादन जैसे लाभ देना बताया गया है। हालांकि, परियोजना से जमीन, जंगल और बस्तियों के प्रभावित होने की आशंका को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया है। जून में दंतेवाड़ा जिले के हिटलाकुडुम में 56 गांवों के लोगों की बैठक हुई थी। ग्रामीणों ने कहा था कि परियोजना आगे बढ़ने पर उन्हें विस्थापन और आजीविका के नुकसान का डर है।
बोधघाट परियोजना की परिकल्पना 1979 में की गई थी। विस्थापन और पर्यावरण संबंधी चिंताओं के बाद इस पर काम रुक गया था। हाल में परियोजना से जुड़े सर्वे फिर शुरू होने की खबरों के बाद स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ी है। प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन और जंगल केवल आजीविका के साधन नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से भी जुड़े हैं।
कांग्रेस उठाएगी आदिवासी अधिकारों का मुद्दा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि पार्टी प्रभावित ग्रामीणों की आवाज उठाएगी। राहुल गांधी के संभावित दौरे में ग्रामीणों से संवाद कर उनकी मांगें और आशंकाएं समझने की योजना है। कांग्रेस का कहना है कि परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले स्थानीय लोगों की सहमति, पुनर्वास और अधिकारों से जुड़े सवालों का समाधान होना चाहिए। यह पार्टी का राजनीतिक पक्ष है; परियोजना के भविष्य और प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार और संबंधित विभागों को लेना है।
परियोजना को लेकर प्रशासन और समर्थकों का पक्ष भी है। अधिकारियों ने इसके संभावित सिंचाई और बिजली उत्पादन लाभों का उल्लेख किया है तथा प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा और कानून के अनुसार मुआवजा देने की बात कही है। ग्रामीणों की मांग है कि किसी भी निर्णय से पहले उन्हें परियोजना की पूरी जानकारी दी जाए और उनकी चिंताओं पर खुली बातचीत हो।
बिजली और स्मार्ट मीटर पर भी चर्चा की तैयारी
दौरे से जुड़ी रिपोर्ट में बिजली संकट और स्मार्ट मीटर का मुद्दा भी कांग्रेस की संभावित रणनीति में शामिल बताया गया है। पार्टी राज्य सरकार को इन मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर रही है। हालांकि, राहुल गांधी के कार्यक्रम में इन विषयों पर कोई अलग बैठक या स्थल तय होने की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
राहुल गांधी के बस्तर पहुंचने की तारीख तय होने के बाद दौरे का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया जा सकता है। फिलहाल ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि प्रस्तावित मुलाकात में उनकी विस्थापन, जमीन, जंगल और पुनर्वास संबंधी चिंताओं को किस तरह सुना जाता है। वहीं, कांग्रेस इस दौरे को आदिवासी अधिकारों और क्षेत्रीय विकास के मुद्दे पर संवाद के अवसर के रूप में देख रही है।
