गुरु वंदन और क्षमायाचना के भाव के साथ निकलेगी ‘संयम वंदन यात्रा’
संवाददाता: ब्रजेश बोहरा
अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद परिवार द्वारा आयोजित ‘संयम वंदन यात्रा’ का द्वितीय चरण 11 अक्टूबर को मुंबई से प्रारंभ होगा। राष्ट्रसंत पुण्यसम्राट गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के समुदायवर्ती चातुर्मासरत साधु-साध्वी भगवंतों के दर्शन-वंदन, आशीर्वाद और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करने के उद्देश्य से यह यात्रा निकाली जा रही है। यात्रा के दौरान विभिन्न श्रीसंघों एवं महात्माओं के समक्ष क्षमायाचना भी की जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, विभिन्न धार्मिक स्थलों से होते हुए यात्रा 17 अक्टूबर को सूरत पहुंचेगी, जहां इसका समापन होगा।
पिछले 12 वर्षों से जारी धार्मिक यात्रा
परिषद परिवार की यह धार्मिक यात्रा पिछले 12 वर्षों से निरंतर आयोजित की जा रही है। इसका नेतृत्व परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, वर्तमान राष्ट्रीय परामर्शदाता तथा थराद त्रिस्तुतिक जैन श्रीसंघ मुंबई के अध्यक्ष परम गुरुभक्त रमेश धरू कर रहे हैं।
यात्रा में गुरु भगवंतों के प्रति श्रद्धा और विनय व्यक्त करने के साथ उनके सान्निध्य में आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करने का भाव प्रमुख है। परिषद परिवार के सदस्य विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर चातुर्मासरत साधु-साध्वी भगवंतों के दर्शन करते हैं। साथ ही श्रीसंघों और महात्माओं से क्षमायाचना के माध्यम से धार्मिक संबंधों को सुदृढ़ करने की भावना व्यक्त करते हैं।
आनंद से शुरू हुआ था पहला चरण
संयम वंदन एवं क्षमायाचना यात्रा का प्रारंभ 21 सितंबर को गुजरात के आनंद से हुआ था। प्रथम चरण में यात्रा गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंची। इन स्थानों पर परिषद परिवार के सदस्यों ने साधु-साध्वी भगवंतों के दर्शन-वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
पहले चरण के बाद अब द्वितीय चरण की शुरुआत मुंबई से होगी। इस चरण में महाराष्ट्र से होते हुए दक्षिण भारत के विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्रों तक पहुंचने का कार्यक्रम है। अलग-अलग स्थानों पर गुरु भगवंतों के प्रति श्रद्धा, विनय और समर्पण व्यक्त करना यात्रा का प्रमुख उद्देश्य रहेगा।
11 अक्टूबर को मुंबई से होगी शुरुआत
निर्धारित यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, 11 अक्टूबर को मुंबई से द्वितीय चरण प्रारंभ होगा। इसके बाद 12 अक्टूबर को यात्रा विजय नगर, बीजापुर पहुंचेगी। यहां से आगे बढ़ते हुए परिषद परिवार के सदस्य 13 अक्टूबर को मैसूर और 14 अक्टूबर को मदुराई पहुंचेंगे।
यात्रा का अगला पड़ाव 15 अक्टूबर को विजयवाड़ा रहेगा। इसके पश्चात 16 अक्टूबर को श्री अंतरिक्ष पार्श्वनाथ तीर्थ पहुंचने का कार्यक्रम निर्धारित है। सभी पड़ावों से होते हुए यात्रा 17 अक्टूबर को सूरत पहुंचेगी। इस प्रकार द्वितीय चरण में मुंबई से सूरत तक विभिन्न धार्मिक स्थानों पर दर्शन-वंदन और क्षमायाचना की जाएगी।
साधु-साध्वी भगवंतों का मिलेगा मार्गदर्शन
यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर चातुर्मासरत साधु-साध्वी भगवंतों के दर्शन-वंदन किए जाएंगे। परिषद परिवार के सदस्य उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे और आध्यात्मिक मार्गदर्शन लेंगे। गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए आयोजित यह यात्रा विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद धार्मिक समुदायों तक पहुंचेगी।
दर्शन-वंदन के साथ यात्रा में विनय और समर्पण की भावना को विशेष स्थान दिया गया है। गुरु भगवंतों के सान्निध्य में पहुंचकर परिषद परिवार के सदस्य धार्मिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने का भाव व्यक्त करेंगे। यात्रा का स्वरूप इसी उद्देश्य के अनुरूप निर्धारित किया गया है।
‘मिच्छामि दुक्कडम्’ कहकर करेंगे क्षमायाचना
संयम वंदन यात्रा में क्षमायाचना भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। विभिन्न श्रीसंघों एवं महात्माओं के समक्ष परिषद परिवार के सदस्य ‘मिच्छामि दुक्कडम्’ कहकर क्षमा मांगेंगे। दर्शन-वंदन और आशीर्वाद प्राप्ति के साथ क्षमाभाव को आत्मसात करने की भावना यात्रा में शामिल रहेगी।
परिषद परिवार के लिए यह आयोजन गुरु भक्ति, विनय और क्षमायाचना को एक साथ व्यक्त करने का माध्यम है। विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया जाएगा। यात्रा के माध्यम से धार्मिक संबंधों में श्रद्धा एवं समर्पण की भावना को प्रगाढ़ करने का उद्देश्य रखा गया है।
विभिन्न क्षेत्रों के सदस्य होंगे सहभागी
यात्रा में रमेश धरू के साथ अहमदाबाद के पूर्व राष्ट्रीय वेरावच्च मंत्री भरतभाई लाडू सहभागी होंगे। नागदा के पूर्व राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा और भायंदर के पूर्व राष्ट्रीय शिक्षामंत्री भरतभाई वोरा भी यात्रा में शामिल रहेंगे।
इनके अतिरिक्त विभिन्न क्षेत्रों से परिषद परिवार के सदस्य सहभागिता करेंगे। सभी सहभागी निर्धारित पड़ावों पर साधु-साध्वी भगवंतों के दर्शन-वंदन और क्षमायाचना में सम्मिलित होंगे। 17 अक्टूबर को सूरत पहुंचने के साथ यात्रा का द्वितीय चरण पूर्ण होगा। परिषद परिवार की यह यात्रा गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा तथा समाज में विनय, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संदेश लेकर आगे बढ़ेगी।
