संसार की वस्तुएँ नहीं, परमात्मा से मांगें आत्मशुद्धि और मुक्ति: साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी
महिदपुर रोड में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा—मोह, ममता और आसक्ति ही दुख का कारण, परमात्मा के निर्मल स्वरूप जैसा बनने का करें प्रयास
महिदपुर रोड। संसार में मनुष्य जीवनभर सुख की तलाश करता रहता है, लेकिन वास्तविक सुख बाहरी वस्तुओं, धन-संपत्ति और वैभव में नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धता और आंतरिक शांति में निहित है। संसार के प्रति मोह, ममता और आसक्ति ही दुख का प्रमुख कारण हैं। इसलिए परमात्मा से सांसारिक सुख-सुविधाएं मांगने के बजाय आत्मकल्याण, आत्मशुद्धि और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति की प्रार्थना करनी चाहिए। यह विचार चातुर्मास के लिए महिदपुर रोड में विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
साध्वीश्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल धन, वैभव और प्रतिष्ठा प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने आत्मस्वरूप को पहचानना है। परमात्मा का स्वरूप शुद्ध, शांत, निर्मल और वीतराग है। मनुष्य को भी अपने भीतर ऐसे गुण विकसित करने का प्रयास करना चाहिए। जब जीवन से राग-द्वेष, अहंकार और मोह कम होने लगते हैं, तब आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने कहा कि परमात्मा से ऐसी चेतना प्राप्त करने की प्रार्थना करनी चाहिए, जिससे मनुष्य संसार की क्षणभंगुर वस्तुओं में उलझकर अपने वास्तविक लक्ष्य को न भूले। जीवन में सुख-दुख की परिस्थितियों के बीच समभाव बनाए रखना और आत्मशुद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ना ही आध्यात्मिक जीवन की सार्थकता है।

साध्वीश्री के अनुसार, सच्ची भक्ति का सार केवल सांसारिक सुखों की प्राप्ति नहीं, बल्कि आत्मकल्याण और मुक्ति की भावना है। मनुष्य को अपने जीवन में ऐसे प्रयास करने चाहिए, जिनसे मोह और आसक्ति कम हों तथा आत्मा की निर्मलता बढ़े।
चोपड़ा और लुणावत परिवार ने लिया प्रभावना का लाभ
जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि धर्मसभा में साधार्मिक भक्ति प्रभावना एवं संपूर्ण दिवस प्रभावना का लाभ राजेंद्र कुमार और अपूर्व कुमार चोपड़ा परिवार ने लिया। वहीं, प्रभावना का लाभ महिदपुर सिटी के रमेश चंद, राजेंद्र कुमार और पारसमल लुणावत परिवार ने प्राप्त किया।
इस अवसर पर नागदा श्री संघ ने भी पूज्य साध्वीश्री के दर्शन-वंदन कर धर्मलाभ लिया। मंगलकारी प्रवचन श्रृंखला में समाज के अनेक सदस्य उपस्थित रहे और उन्होंने साध्वीश्री के प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया।
