MP फसल बीमा योजना: पात्रता, नुकसान की सूचना और क्लेम स्टेटस जानने की प्रक्रिया समझें
भोपाल। प्राकृतिक आपदा और प्रतिकूल मौसम से फसल को नुकसान होने पर किसानों के लिए फसल बीमा आर्थिक सुरक्षा का माध्यम है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY में बीमित किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार नुकसान की भरपाई मिल सकती है। मध्य प्रदेश के किसानों को अपने जिले, मौसम और फसल के लिए जारी अधिसूचना देखना जरूरी है। केवल फसल खराब होना भुगतान की गारंटी नहीं है; बीमा कवरेज, नुकसान का प्रकार और आकलन भी महत्वपूर्ण हैं।
किन किसानों को मिल सकता है लाभ?
योजना में बीमित फसल में हित रखने वाले पात्र किसान शामिल हो सकते हैं। किरायेदार और बटाईदार किसानों को भी योजना में शामिल करने का प्रावधान है। उनके लिए खेती तथा बीमायोग्य हित से संबंधित आवश्यक प्रमाण राज्य के नियमों के अनुसार देखे जाते हैं। योजना सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक है।
किसान पहले पुष्टि करें कि उनकी फसल और क्षेत्र संबंधित मौसम में अधिसूचित हैं। आवेदन की अंतिम तारीख, बीमा कंपनी और आवश्यक दस्तावेज जिले के कृषि कार्यालय, संबंधित बैंक या आधिकारिक पोर्टल से जानें। किसी दूसरे जिले की तारीख अपने क्षेत्र पर लागू न मानें।
किसानों को कितना प्रीमियम देना होता है?
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, खरीफ की खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए किसान का अधिकतम प्रीमियम बीमित राशि का दो प्रतिशत है। रबी की इन फसलों के लिए अधिकतम डेढ़ प्रतिशत तथा वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए अधिकतम पाँच प्रतिशत निर्धारित है। वास्तविक बीमा दर इससे कम हो तो कम दर लागू होती है। शेष प्रीमियम में सरकार सहायता देती है।
प्रीमियम भुगतान के बाद रसीद सुरक्षित रखें। उदाहरण के लिए, रसीद में फसल या क्षेत्रफल गलत दर्ज हो तो नुकसान के समय परेशानी हो सकती है। इसलिए जानकारी का मिलान समय रहते कराएँ।
किन नुकसान में बीमा सुरक्षा मिलती है?
योजना में निर्धारित शर्तों के तहत सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, कीट और रोग जैसे जोखिम शामिल हैं। स्थानीय आपदाओं तथा कटाई के बाद कुछ विशेष परिस्थितियों में हुए नुकसान का भी कवरेज उपलब्ध है।
कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल का कवरेज सामान्यतः निर्धारित जोखिमों के लिए अधिकतम 14 दिन तक होता है। प्रत्येक प्रकार का नुकसान स्वतः बीमित नहीं होता, इसलिए अपनी पॉलिसी और मौसम की अधिसूचना पढ़ना आवश्यक है।
स्थानीय नुकसान की सूचना 72 घंटे में दें
स्थानीय आपदा और पात्र कटाई-पश्चात नुकसान के मामलों में किसान को घटना के 72 घंटे के भीतर सूचना देनी चाहिए। सूचना देने में देरी से बचें। फसल बीमा ऐप, संबंधित बीमा कंपनी, बैंक या कृषि विभाग के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया अपनाएँ। सूचना की पावती अथवा शिकायत संख्या सुरक्षित रखना उपयोगी है।
नुकसान की तारीख, खेत का स्थान, फसल और बीमा विवरण तैयार रखें। फोटो लेते समय अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें। आवेदन संख्या तथा उपलब्ध भुगतान रिकॉर्ड भी संभालकर रखें।
क्लेम की राशि कैसे तय होती है?
व्यापक नुकसान के मामलों में अधिसूचित बीमा इकाई की वास्तविक उपज की तुलना निर्धारित उपज से की जाती है। इसमें फसल कटाई प्रयोग और जहाँ लागू हो, तकनीक आधारित उपज आकलन का उपयोग होता है।
स्थानीय जोखिम और पात्र कटाई-पश्चात नुकसान का आकलन व्यक्तिगत बीमित खेत के आधार पर किया जाता है। इसलिए पड़ोसी किसान को मिली राशि और अपनी राशि समान होना जरूरी नहीं है।
आवेदन और क्लेम की स्थिति कहाँ जानें?
पर आवेदन स्थिति संबंधी सुविधा उपलब्ध है। पॉलिसी आईडी से स्थिति जाँची जा सकती है। आवेदन स्वीकार होना और क्लेम मंजूर होना अलग चरण हैं।
क्लेम, नुकसान की सूचना या शिकायत के लिए कृषि रक्षक हेल्पलाइन 14447 पर संपर्क करें। शिकायत संख्या लिखकर रखें और भुगतान की पुष्टि बैंक खाते से करें।
