शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू, 19 को अष्टमी-नवमी के अनुष्ठान और 20 को विजयादशमी
संवाददाता: मनोज जैन नायक
मुरैना मां दुर्गा की साधना और आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्टूबर, रविवार से प्रारंभ होगा। घटस्थापना के साथ श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करेंगे। नवरात्र के प्रमुख अनुष्ठानों के बाद 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। इस बार सप्तमी तिथि में वृद्धि तथा 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी के प्रमुख अनुष्ठानों का संयोग रहेगा। श्रद्धालुओं के लिए घटस्थापना की तिथि, पूजा का क्रम और शुभ मुहूर्त विशेष महत्व रखेंगे।
उदया तिथि के अनुसार 11 अक्टूबर को होगी घटस्थापना
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 11 अक्टूबर को नवरात्र का पहला दिन माना जाएगा। इसी दिन घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना की जाएगी।
वर्ष में शारदीय और वासंतिक नवरात्र के अवसर पर मां दुर्गा की विशेष साधना की जाती है। शारदीय नवरात्र में श्रद्धालु देवी के नौ स्वरूपों के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। प्रत्येक स्वरूप की आराधना अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी है। इनमें स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, साहस, पारिवारिक कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति की कामना प्रमुख है।
हाथी की सवारी पर आगमन, घोड़े पर विदाई की मान्यता
डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार इस वर्ष रविवार से नवरात्र प्रारंभ होने के कारण धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा का आगमन हाथी की सवारी पर होगा। वहीं विदाई घोड़े की सवारी पर मानी जाएगी।
धार्मिक परंपरा में हाथी पर देवी के आगमन को अच्छी वर्षा, बेहतर फसल और जनजीवन में सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है। देवी के आगमन और प्रस्थान की सवारी का उल्लेख नवरात्र से जुड़ी मान्यताओं में किया जाता है। श्रद्धालु इन परंपराओं के साथ मां दुर्गा की पूजा करते हैं।
पहले चार दिन शैलपुत्री से कूष्मांडा तक की आराधना
11 अक्टूबर, रविवार—मां शैलपुत्री: प्रतिपदा पर घटस्थापना के साथ नवरात्र की शुरुआत होगी। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। धार्मिक मान्यता में इन्हें स्वास्थ्य, स्थिरता और सौभाग्य की देवी माना जाता है।
12 अक्टूबर, सोमवार—मां ब्रह्मचारिणी: द्वितीया पर मां ब्रह्मचारिणी की साधना होगी। देवी का यह स्वरूप तप और संयम से जुड़ा माना जाता है। श्रद्धालु मनोकामना पूर्ति की भावना से इनकी आराधना करते हैं।
13 अक्टूबर, मंगलवार—मां चंद्रघंटा: तृतीया पर मां चंद्रघंटा की पूजा होगी। इनकी आराधना साहस, शांति और भय से मुक्ति की कामना के साथ की जाती है।
14 अक्टूबर, बुधवार—मां कूष्मांडा: चतुर्थी पर मां कूष्मांडा की पूजा की जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवी का यह स्वरूप आरोग्य, ऊर्जा और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है।
स्कंदमाता, कात्यायनी और कालरात्रि की होगी पूजा
15 अक्टूबर, गुरुवार—मां स्कंदमाता: पंचमी तिथि पर मां स्कंदमाता की आराधना होगी। इनकी पूजा संतान सुख तथा परिवार के कल्याण की कामना से की जाती है।
16 अक्टूबर, शुक्रवार—मां कात्यायनी: षष्ठी पर मां कात्यायनी की साधना होगी। देवी के इस स्वरूप को विवाह, दांपत्य सुख और मनोकामना पूर्ति से जोड़ा जाता है।
17 अक्टूबर, शनिवार—मां कालरात्रि: बताए गए पूजा क्रम के अनुसार षष्ठी-सप्तमी के दौरान मां कालरात्रि की आराधना होगी। श्रद्धालु भय, बाधाओं और नकारात्मकता से रक्षा की भावना के साथ देवी की साधना करेंगे।
19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी के प्रमुख अनुष्ठान
18 अक्टूबर, रविवार—मां महागौरी: सप्तमी पर मां महागौरी की पूजा होगी। देवी का यह स्वरूप शांति, पवित्रता और सुख प्रदान करने वाला माना जाता है। इस बार सप्तमी तिथि में वृद्धि होने से पूजा क्रम में यह विशेष स्थिति रहेगी।
19 अक्टूबर, सोमवार—मां सिद्धिदात्री: अष्टमी-नवमी के संयोग में मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाएगी। इनकी साधना सिद्धि, पूर्णता और आध्यात्मिक उन्नति की कामना से जुड़ी मानी जाती है। डॉ. जैन के अनुसार इसी दिन अष्टमी और नवमी के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।
20 अक्टूबर, मंगलवार—विजयादशमी: दशमी तिथि पर विजयादशमी अर्थात दशहरा मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता में यह पर्व विजय तथा शुभ कार्यों में सफलता का प्रतीक माना जाता है।
घटस्थापना के लिए लाभ, अमृत और अभिजीत मुहूर्त
इंजीनियर हिमांशु जैन ने बताया कि 11 अक्टूबर को घटस्थापना के लिए चौघड़िया के अनुसार लाभ मुहूर्त सुबह 9:14 बजे से 10:41 बजे तक रहेगा। इसके बाद अमृत मुहूर्त सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:08 बजे तक होगा।
वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। इसे घटस्थापना के लिए विशेष शुभ बताया गया है। इस प्रकार नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के लिए लाभ, अमृत और अभिजीत मुहूर्त के समय उपलब्ध रहेंगे। घटस्थापना के साथ शुरू होने वाली देवी आराधना में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करेंगे।
