दिग्विजय सिंह ने आरएसएस के पंजीकरण पर उठाए सवाल, व्यवस्था पर प्रभाव का लगाया आरोप
भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने संघ को अपंजीकृत संस्था बताते हुए उसकी संगठनात्मक स्थिति पर सवाल किया। साथ ही आरोप लगाया कि पूरे सिस्टम पर संघ का कब्जा है। ये बातें दिग्विजय सिंह के आरोप और राजनीतिक वक्तव्य हैं। उनके बयान में संगठन के पंजीकरण, वित्तीय पारदर्शिता और सार्वजनिक संस्थाओं में प्रभाव जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर उठाए सवाल
बुधवार को अपनी प्रस्तावित सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा की जानकारी देते हुए दिग्विजय सिंह ने आरएसएस और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों में संघ से जुड़े लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। उनके बयान में सार्वजनिक व्यवस्था और नियुक्तियों पर संगठन के प्रभाव का मुद्दा उठाया गया।
हालांकि, उपलब्ध समाचार विवरण में ऐसी नियुक्तियों की पूरी सूची या प्रत्येक मामले का दस्तावेजी आधार नहीं दिया गया है। इसलिए इस कथन को दिग्विजय सिंह के आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। नियुक्तियों से संबंधित विशिष्ट मामलों पर निष्कर्ष के लिए संबंधित रिकॉर्ड और पक्षों की प्रतिक्रिया आवश्यक होगी।
पंजीकरण और जवाबदेही का मुद्दा
दिग्विजय सिंह संघ की कानूनी स्थिति और जवाबदेही को लेकर पहले भी प्रश्न उठाते रहे हैं। उनकी वेबसाइट पर प्रकाशित 17 जून 2026 की प्रेस विज्ञप्ति में आरएसएस के पंजीकरण, संगठनात्मक संरचना, वित्तीय स्रोतों और आय-व्यय संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग का उल्लेख है।
उस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय किसी संस्था को जवाबदेही से ऊपर नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने संघ के संबंध में उठाए गए सवालों को वित्तीय पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन से जोड़ा था।
वित्तीय स्रोतों पर मांगा स्पष्टीकरण
दिग्विजय सिंह की पूर्व प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने 22 अक्टूबर 2021 को तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर संघ के वित्तीय स्रोतों और खर्च से जुड़े सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि अन्य संस्थाओं पर लागू पारदर्शिता के मानकों को लेकर संघ से भी जानकारी मांगी जानी चाहिए।
उसी विज्ञप्ति में उन्होंने दावा किया था कि उनके पत्र का जवाब नहीं मिला। यह जानकारी उनके स्वयं के प्रकाशित बयान पर आधारित है। पत्राचार और जवाब की स्थिति को लेकर संबंधित विभाग का पक्ष उस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है।
मंदिरों और मठों को लेकर भी आरोप
बुधवार के बयान की समाचार रिपोर्ट में दिग्विजय सिंह के इस आरोप का भी उल्लेख है कि आरएसएस विभिन्न मठों और मंदिरों पर कब्जा करना चाहता है। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं में संगठन की भूमिका पर आपत्ति व्यक्त की।
यह एक व्यापक आरोप है। उपलब्ध रिपोर्ट में संबंधित मंदिरों या मठों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए किसी विशेष धार्मिक संस्था की स्थिति को इस बयान के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। संबंधित संस्थाओं के रिकॉर्ड और उनका पक्ष अलग से महत्वपूर्ण होगा।
पहले के बयानों पर भाजपा की आपत्ति
दिग्विजय सिंह के आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और सनातन धर्म से संबंधित पूर्व बयानों पर भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताई थी। पांच अक्टूबर की समाचार रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने उनके बयानों की आलोचना की और उन्हें बेबुनियाद बताया। यह प्रतिक्रिया पहले के बयानों पर थी, बुधवार के नए आरोपों पर नहीं।
नए आरोपों पर प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल दिग्विजय सिंह के ताजा बयान में संघ के पंजीकरण और व्यवस्था पर उसके कथित प्रभाव का मुद्दा सामने आया है। उपलब्ध सामग्री में बुधवार के इन आरोपों पर आरएसएस की विस्तृत प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। संगठन का पक्ष और संबंधित दस्तावेज सामने आने पर उठाए गए प्रश्नों की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
