नेत्रदान के 1001 लक्ष्य की प्राप्ति पर गीता भवन में गौरव समारोह, नेत्रदानी संस्थाओं का सम्मान
ब्रजेश बोहरा
बड़नगर। नेत्रदान-महादान के 1001 ऐतिहासिक लक्ष्य की प्राप्ति के अवसर पर गीता भवन न्यास समिति द्वारा गौरव समारोह आयोजित किया गया। समारोह में नेत्रदान के कार्य से जुड़ी संस्थाओं का सारस्वत सम्मान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ट्रस्टी सेठ राजेन्द्र दंगवाड़ा ने की। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों, ट्रस्टियों और सेवादारों की उपस्थिति में सेवा कार्यों के प्रति समर्पण तथा नेत्रदान के जनजागरण को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।
समारोह में गीता भवन न्यास समिति और डॉ. ददरवाल को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की मांग भी उठी। पत्रकार ब्रजेश बोहरा, नागदा ने यह मांग सभा के समक्ष रखी। उपस्थित सदस्यों ने तालियों के साथ इसका समर्थन किया। आयोजन में गीता भवन के भूमिदाता जगन्नाथ शास्त्री के योगदान का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।
नेत्रदानी संस्थाओं का सारस्वत सम्मान
नेत्रदान के 1001 लक्ष्य की प्राप्ति समारोह का प्रमुख आधार रही। इस उपलब्धि के अवसर पर गीता भवन न्यास समिति ने नेत्रदानी संस्थाओं का सम्मान कर उनके योगदान को मान्यता दी। आयोजन में नेत्रदान-महादान के कार्य को समाजसेवा से जोड़ते हुए जनजागरण बढ़ाने का संदेश सामने रखा गया।
सम्मान समारोह के माध्यम से नेत्रदान से जुड़े सेवा प्रयासों और उनमें सहयोग देने वाली संस्थाओं के योगदान को स्थान मिला। कार्यक्रम का केंद्र उपलब्धि के साथ इस कार्य को निरंतर आगे बढ़ाने की भावना रही। नेत्रदान के प्रति जागरूकता और समाज की सहभागिता बढ़ाने का संदेश भी आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
राजेन्द्र दंगवाड़ा की अध्यक्षता में हुआ आयोजन
कार्यक्रम की अध्यक्षता गीता भवन के ट्रस्टी सेठ राजेन्द्र दंगवाड़ा ने की। समारोह में समिति अध्यक्ष हरिकिशन मेलवाणी, प्रमुख ट्रस्टी हरिश लाठी और कोषाध्यक्ष चन्द्रप्रकाश नागर सहित सभी ट्रस्टी एवं सेवादार उपस्थित रहे। पदाधिकारियों और सेवा कार्यों से जुड़े सदस्यों की उपस्थिति ने आयोजन को सामूहिक स्वरूप दिया।
समारोह में समिति के सेवा कार्यों का उल्लेख किया गया। नेत्रदान की उपलब्धि के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम गीता भवन से जुड़े लोगों के योगदान को सामने लाने का माध्यम भी बना। समिति के पदाधिकारियों, ट्रस्टियों और सेवादारों की सहभागिता के बीच सम्मान तथा समाजसेवा का संदेश प्रमुख रहा।
60 वर्ष से अधिक आयु के सेवादार भी सक्रिय
गीता भवन न्यास समिति से जुड़े अनेक सेवादार 60 वर्ष से अधिक आयु के होने के बावजूद प्रतिदिन निष्ठा और समर्पण के साथ सेवा कार्य कर रहे हैं। उनकी निरंतर सक्रियता समिति की सेवा भावना का महत्वपूर्ण पक्ष है। समारोह के विवरण में इन सेवादारों के दैनिक योगदान का विशेष उल्लेख किया गया।
उम्र के इस पड़ाव पर भी सेवा कार्यों में नियमित सहभागिता उनके समर्पण को दर्शाती है। समिति के कार्यों में पदाधिकारियों के साथ सेवादारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। नेत्रदान की उपलब्धि के अवसर पर उनकी सक्रियता का उल्लेख सेवा कार्यों के पीछे मौजूद निरंतर प्रयास और सहयोग को सामने लाता है।
करीब 40 सेवा प्रकल्पों का संचालन
गीता भवन न्यास समिति द्वारा वर्तमान में करीब 40 सेवा प्रकल्प संचालित किए जा रहे हैं। यह जानकारी संस्था की सेवा गतिविधियों के व्यापक स्वरूप को दर्शाती है। नेत्रदान के लक्ष्य की प्राप्ति का समारोह इन्हीं सेवा प्रयासों के संदर्भ में आयोजित किया गया।
समिति से जुड़े ट्रस्टी और सेवादार इन कार्यों में अपना योगदान दे रहे हैं। कार्यक्रम में समाजसेवा को निरंतर आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। करीब 40 प्रकल्पों का संचालन और दैनिक सेवा में सदस्यों की सहभागिता गीता भवन की गतिविधियों के महत्वपूर्ण पहलू के रूप में सामने आए।
राष्ट्रपति पुरस्कार देने की उठी मांग
पत्रकार ब्रजेश बोहरा, नागदा ने सभा में गीता भवन न्यास समिति एवं डॉ. ददरवाल को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की मांग रखी। उपस्थित सदस्यों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
यह मांग समारोह में संस्था और डॉ. ददरवाल के सम्मान के पक्ष में रखी गई। कार्यक्रम के दौरान मिले समर्थन ने सभा की भावना को व्यक्त किया। राष्ट्रपति पुरस्कार देने की बात आयोजन में उठी मांग है; किसी पुरस्कार की घोषणा का उल्लेख नहीं किया गया।
भूमिदाता जगन्नाथ शास्त्री का स्मरण
समारोह में गीता भवन के भूमिदाता जगन्नाथ शास्त्री को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान का स्मरण करते हुए आयोजन में उन्हें सम्मानपूर्वक स्थान दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन प्रेमनारायण पोरवाल ने किया। नेत्रदानी संस्थाओं के सम्मान, सेवादारों के योगदान और भूमिदाता के स्मरण के साथ समारोह में नेत्रदान-महादान के प्रति जनजागरण बढ़ाने तथा समाजसेवा के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।
