महिदपुर रोड में साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी का प्रवचन: क्रियाओं के साथ ज्ञान जरूरी, भगवान की प्रदक्षिणा से मिटती है भव-भ्रमणा
जिन मंदिर की क्रियाओं का रहस्य बताया
महिदपुर रोड। नगर में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा ने मंगलवार को धर्मसभा में उपस्थित समाजजनों को जिन मंदिर से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में हर कार्य के पीछे गूढ़ रहस्य और ज्ञान छिपा हुआ है।
“क्यों” के जवाब से जोड़ा श्रद्धालुओं को
साध्वीजी ने समझाया कि परमात्मा के मंदिर में नित्य क्यों जाना चाहिए, प्रदक्षिणा क्यों लगानी चाहिए, मंदिर में घंटी क्यों बजानी चाहिए, आरती क्यों उतारनी चाहिए और पूजा क्यों करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इन क्रियाओं से क्या लाभ प्राप्त होता है। इस तरह की अनेक दुर्लभ जानकारियां उन्होंने श्रद्धालुओं को दीं।

ज्ञान के बिना क्रिया निष्फल
साध्वीजी ने कहा कि हम क्रियाएं तो रोज करते हैं, लेकिन जब तक उनका ज्ञान नहीं होगा, तब तक वे क्रियाएं पूरा फल नहीं देंगी। उन्होंने गुरुदेव श्री राजेंद्र सूरीजी द्वारा अष्टप्रकारी पूजा में लिखी पंक्ति का उल्लेख किया कि ज्ञान के बिना सब क्रिया झूठी हैं। अर्थात हम कितनी भी क्रियाएं करें, यदि उनका वास्तविक ज्ञान नहीं है तो परिणाम के अनुरूप फल नहीं मिलता। इसलिए क्रियाओं के साथ ज्ञान होना परम आवश्यक है।
साधर्मिक भक्ति का लाभ
जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि आज की साधर्मिक भक्ति और प्रभावना का संपूर्ण दिवस का लाभ प्रकाशचंद अरविंद कुमार बरडिया परिवार ने लिया। मंगलकारी प्रवचन श्रृंखला में सभी समाजजनों ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
