भोपाल मेट्रो रूट पर फिर विवाद: शाही कब्रिस्तान के पास काम की तैयारी पर आतिफ अकील की आपत्ति
भोपाल। राजधानी में मेट्रो की ऑरेंज लाइन के फेज-2 का रूट एक बार फिर विवाद में आ गया है। सोमवार देर रात शाही कब्रिस्तान के पास मेट्रो टीम के मशीनों और सामान के साथ पहुंचने पर भोपाल उत्तर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने आपत्ति जताई। मौके पर पहुंचे विधायक ने मेट्रो और पुलिस अधिकारियों से अनुमति के बारे में सवाल किए। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित संस्था की अनुमति के बिना काम की तैयारी की जा रही है और टीम से मशीनें तथा सामान हटाने को कहा।
देर रात बैरिकेडिंग करने पहुंची मेट्रो टीम
समाचार रिपोर्टों के अनुसार, सोमवार रात मेट्रो की टीम भोपाल टॉकीज के पास स्थित शाही कब्रिस्तान पहुंची थी। टीम वहां बैरिकेडिंग और अन्य कार्यों की तैयारी कर रही थी। मशीनरी पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद विधायक आतिफ अकील मौके पर आए और अधिकारियों से बातचीत की।
विधायक की नाराजगी कब्रिस्तान की संपत्ति पर काम शुरू करने की प्रक्रिया को लेकर थी। उन्होंने पूछा कि मशीनें लाने से पहले संबंधित संस्था को जानकारी दी गई थी या नहीं। साथ ही, काम की अनुमति से जुड़े दस्तावेजों के बारे में भी सवाल उठाए।
शाही औकाफ की अनुमति लेने पर जोर
आतिफ अकील ने कहा कि शाही कब्रिस्तान की जमीन पर किसी भी तरह का कार्य आवश्यक अनुमति लेने के बाद ही होना चाहिए। उन्होंने मेट्रो अधिकारियों से शाही औकाफ की स्वीकृति के बारे में जानकारी मांगी। विधायक ने पुलिस की मौजूदगी पर भी आपत्ति जताते हुए पहले अनुमति की स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
मौके पर मौजूद समाज के लोगों ने भी मशीनें और सामान हटाने की मांग की। उनका कहना था कि वैधानिक अनुमति के बिना कार्य आगे नहीं बढ़ना चाहिए। हालांकि, संबंधित अनुमति वास्तव में ली गई थी या नहीं, इस बारे में विभाग का विस्तृत आधिकारिक जवाब उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दिया गया है।
अधिकारियों से फोन पर भी हुई बातचीत
स्थानीय समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, विधायक ने मेट्रो के वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर संपर्क कर अनुमति के संबंध में जानकारी मांगी। बाद में दोबारा संपर्क करने पर फोन नहीं उठाए जाने का दावा भी उन्होंने किया। यह जानकारी विधायक के कथन के आधार पर सामने आई है।
अकील ने सुबह तक मशीनरी और अन्य सामान हटाने की मांग रखी। रिपोर्ट में उनके द्वारा क्रेन की व्यवस्था कराने के लिए अल्पना टॉकीज तिराहे की ओर जाने का भी उल्लेख है। हालांकि, बाद में कितना सामान हटाया गया और मौके पर कार्य की स्थिति क्या रही, इसका पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है।
कब्रिस्तान के नीचे प्रस्तावित भूमिगत रूट पर विरोध
विवाद की मुख्य वजह ऑरेंज लाइन के दूसरे चरण का प्रस्तावित भूमिगत मार्ग है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, मेट्रो को शाही कब्रिस्तान के नीचे से ले जाने की योजना पर विधायक पहले भी आपत्ति जता चुके हैं। उनका विरोध कब्रिस्तान में मौजूद कब्रों और वहां दफन लोगों से जुड़ी भावनाओं को लेकर है।
अकील का कहना है कि इस स्थान से मेट्रो का मार्ग नहीं गुजरना चाहिए। सोमवार रात मशीनरी पहुंचने के बाद उनकी पुरानी आपत्ति फिर सामने आई। इस घटनाक्रम से रूट संबंधी विवाद और मौके पर काम की अनुमति, दोनों विषय चर्चा में आ गए।
वक्फ अधिकरण में भी चल रहा मामला
प्रस्तावित मार्ग से जुड़ा विवाद मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण तक पहुंच चुका है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्ष वहां अपनी बात रख रहे हैं। हालांकि, मौजूदा न्यायिक आदेश का पूरा दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण काम पर रोक या अनुमति की स्थिति पर निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
किसी पुराने बयान के आधार पर वर्तमान आदेश की स्थिति तय करना भी उचित नहीं होगा। संबंधित पक्षों की आपत्तियों और परियोजना के दस्तावेजों के साथ नवीनतम आदेश से ही स्पष्ट होगा कि विवादित हिस्से में कौन-सा कार्य किया जा सकता है।
मौके पर पहुंची पुलिस, विभागीय जवाब का इंतजार
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, सूचना मिलने पर एसीपी शाहजहानाबाद और कोहेफिजा थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। फिलहाल मुख्य सवाल मशीनरी लाने और कार्य की तैयारी के लिए आवश्यक स्वीकृतियों को लेकर है।
मेट्रो प्रबंधन का विस्तृत जवाब मिलने से विधायक के आरोपों और अनुमति की स्थिति पर स्पष्टता आएगी। अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर बिना अनुमति काम करने की बात विधायक का आरोप है। किसी कब्र को नुकसान पहुंचने या मेट्रो रूट में बदलाव का निर्णय होने की पुष्टि सामने नहीं आई है।
