अक्टूबर में आएगी लाड़ली बहना की 41वीं किस्त, 40 किस्तों में खाते में पहुंचे 65,396 करोड़ रुपये
1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये
फिलहाल 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की सहायता राशि मिल रही है। अक्टूबर, यानी इसी महीने, योजना की 41वीं किस्त आने वाली है। इसकी राशि भी 1,500 रुपये ही तय है, यानी हितग्राहियों को पिछली किस्त जितनी ही रकम मिलेगी।
इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को हर महीने सीधे बैंक खाते में राशि भेजना राज्य के लिए बड़ी वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारी है। हर किस्त का सीधा असर लाखों परिवारों के मासिक बजट और राज्य के खजाने, दोनों पर पड़ता है।
जून 2023 से सितंबर 2026 तक 40 किस्तें
योजना की शुरुआत से अब तक, यानी जून 2023 से सितंबर 2026 तक, 40 किस्तों में महिलाओं के खातों में कुल 65,396 करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं। यह आंकड़ा योजना के पैमाने को दिखाता है। साधारण गणना करें तो 40 किस्तों का औसत लगभग 1,635 करोड़ रुपये प्रति किस्त बैठता है। यह औसत इसलिए कम दिखता है कि शुरुआती किस्तों की राशि बाद की किस्तों से कम थी। 40वीं किस्त की राशि 1,835 करोड़ रुपये से ज्यादा रही, जो इस औसत से ऊपर है।
13 सितंबर को जारी हुई 40वीं किस्त
13 सितंबर 2026 को जारी की गई 40वीं किस्त में 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार 150 महिलाओं के खातों में 1,835 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर हुई। अब इसके बाद अक्टूबर की 41वीं किस्त का इंतजार है।
मौजूदा दर पर इस योजना का खर्च सालाना करीब 22,000 करोड़ रुपये बैठता है। एक किस्त का खर्च लगभग 1,835 करोड़ रुपये मानें तो 12 महीनों में यह करीब 22,000 करोड़ रुपये होता है। यानी योजना हर साल राज्य के खजाने से इतनी बड़ी रकम महिलाओं तक पहुंचाती है।
बजट में 23,883 करोड़ रुपये का प्रावधान
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 23,883 करोड़ रुपये रखे गए हैं। यह राशि राज्य के कुल बजट (4.38 लाख करोड़ रुपये) का करीब 5.4 प्रतिशत है। दूसरे शब्दों में, राज्य के हर 100 रुपये के बजट में से लगभग साढ़े पांच रुपये इसी एक योजना के लिए तय हैं।
बजट प्रावधान और अनुमानित सालाना खर्च की तुलना भी दिलचस्प है। सालाना खर्च करीब 22,000 करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि बजट में 23,883 करोड़ रुपये रखे गए हैं। यानी प्रावधान मौजूदा खर्च से कुछ ऊपर है। यह अंतर किसी भी तरह की अतिरिक्त जरूरत के लिए गुंजाइश देता है, हालांकि इस बारे में आधिकारिक स्पष्टीकरण खबर में नहीं दिया गया है।
शुरुआती अनुमान से करीब दोगुना हुआ खर्च
घोषणा के समय योजना का अनुमान आज के खर्च से लगभग आधा था। फरवरी 2023 में जब शुरुआती गणना की गई थी, तब सालाना खर्च करीब 12,000 करोड़ रुपये आंका गया था, क्योंकि उस समय सहायता राशि 1,000 रुपये तय की गई थी।
अब यह अनुमान और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर है। मौजूदा सालाना खर्च करीब 22,000 करोड़ रुपये है, जो शुरुआती अनुमान से लगभग 10,000 करोड़ रुपये ज्यादा है। इसका एक स्पष्ट कारण मासिक राशि का बदलना है। शुरुआती गणना 1,000 रुपये प्रति माह पर थी, जबकि अब हर माह 1,500 रुपये दिए जा रहे हैं। यानी प्रति हितग्राही राशि में 500 रुपये, या 50 प्रतिशत का अंतर है।
आंकड़ों से क्या समझ आता है
खबर में दिए गए आंकड़ों को साथ रखकर देखें तो कुछ बातें सामने आती हैं।
पहली, योजना अब राज्य के बजट का स्थायी और बड़ा हिस्सा बन चुकी है। कुल बजट का 5.4 प्रतिशत किसी एक योजना पर खर्च होना उसकी वित्तीय अहमियत बताता है।
दूसरी, योजना का दायरा बहुत बड़ा है। सवा करोड़ से ज्यादा महिलाएं हर महीने इसका लाभ ले रही हैं, इसलिए किस्त की तारीख और राशि का असर बहुत बड़ी आबादी पर पड़ता है।
तीसरी, खर्च का अनुमान शुरुआती दौर में काफी कम था। जैसे-जैसे राशि बढ़ी और योजना आगे बढ़ी, खर्च भी उसी अनुपात में बढ़ता गया। ऐसी बड़ी योजनाओं में खर्च का अनुमान और वास्तविकता अक्सर अलग निकलती है, और यह मामला उसका उदाहरण है।
हितग्राहियों को क्या ध्यान रखना चाहिए
अक्टूबर की 41वीं किस्त की राशि 1,500 रुपये तय है, इसलिए इसमें किसी बदलाव की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। किस्त जारी होने की सटीक तारीख खबर में नहीं बताई गई है। पिछली किस्त 13 सितंबर को जारी हुई थी, पर इससे अगली तारीख का अंदाजा लगाना ठीक नहीं होगा। लाभार्थी महिलाएं अपने बैंक खाते की स्थिति और सरकार की आधिकारिक घोषणा पर नजर रखें।
आगे क्या
41वीं किस्त जारी होने के बाद योजना के तहत कुल वितरित राशि 65,396 करोड़ रुपये से और बढ़ जाएगी। अब देखना होगा कि सरकार आने वाले महीनों में योजना के खर्च और बजट प्रावधान के बीच कैसे संतुलन बनाती है।
