भागवत कथा का श्रवण बड़े सौभाग्य की बात : सुश्री जया देवी
मनावर। रुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन प्रातःकाल पंचकुंडी महारुद्र यज्ञ में यजमानों ने आहुतियां अर्पित कीं। इसके बाद कथा सत्र में व्यासपीठ से कथावाचिका सुश्री जया देवी ने श्रद्धालुओं को धर्म और जीवन के महत्व का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा का श्रवण एवं स्मरण बड़े सौभाग्य की बात है। कथा मनुष्य को जीवन जीने की प्रेरणा देती है और मन, कर्म तथा धर्म से जुड़ने का मार्ग बताती है।
संत श्री अखंडानंद जी महाराज द्वारा आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में दूसरे दिन सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। मनावर विधायक हीरालाल अलावा भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ कथा स्थल पर उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान वरिष्ठ पत्रकार बसंत जख्मी एवं स्वप्निल शर्मा को समिति की ओर से सम्मानित किया गया।
प्रातःकाल पंचकुंडी महारुद्र यज्ञ
आयोजन के दूसरे दिन सुबह महारुद्र यज्ञ के साथ धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। पंचकुंडी यज्ञ में यजमानों ने विधि-विधान से सहभागिता करते हुए 108 आहुतियां अर्पित कीं। भगवान शिव के रुद्र स्वरूप को समर्पित इस वैदिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने आराधना की।
आयोजन से जुड़ी जानकारी के अनुसार संत श्री अखंडानंद जी महाराज ने शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप यज्ञशाला का निर्माण कराया है। धार्मिक मान्यता में रुद्र महायज्ञ को आत्मशुद्धि और कल्याण की भावना से जोड़ा जाता है। इसी भावना के साथ यजमानों ने यज्ञ में भाग लिया।
पांच यजमान दंपतियों ने दी आहुतियां
द्वितीय दिवस के पंचकुंडी यज्ञ में मुकेश एवं ऋतु पाटीदार, अंकित एवं शिवानी शुक्ला, दीपक एवं सोनिका मोगरिया, राजा एवं शालिनी पाठक तथा अरविंद एवं सोनु पाटीदार ने आहुतियां अर्पित कीं।
यजमान दंपतियों की सहभागिता के साथ प्रातःकालीन अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। यज्ञ और श्रीमद्भागवत कथा के संयुक्त आयोजन में श्रद्धालुओं को दोनों धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिल रहा है। दूसरे दिन भी यज्ञ के बाद कथा श्रवण का क्रम जारी रहा।
कथा मनुष्य को जीना सिखाती है
सुश्री जया देवी ने व्यासपीठ से कहा कि कथा संसार में मनुष्य को जीना सिखाती है। व्यक्ति का मन, कर्म और धर्म से जुड़ाव होना चाहिए। उन्होंने भागवत कथा के संदेश को जीवन से जोड़ते हुए श्रद्धालुओं को उसके महत्व से परिचित कराया।
कथावाचिका ने कहा कि धार्मिक कथा का श्रवण और स्मरण सौभाग्य का विषय है। उनके उद्बोधन में जीवन और धर्म के संबंध पर विशेष जोर रहा। पितृपक्ष के अवसर पर आयोजित कथा में उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्म से जुड़े रहने की प्रेरणा दी।
नैमिषारण्य के कथा प्रसंग का उल्लेख
कथा के दौरान सुश्री जया देवी ने नैमिषारण्य तीर्थ से जुड़े प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वहां श्री सूत जी ने 88 हजार ऋषि-मुनियों को कथा सुनाई थी। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने कथा श्रवण की धार्मिक परंपरा का महत्व समझाया।
पितृपक्ष के पावन अवसर पर चल रहे आयोजन में कथा के विविध प्रसंग प्रस्तुत किए जा रहे हैं। दूसरे दिन उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथावाचिका के विचार सुने और भक्ति कार्यक्रम में सहभागिता की।
भजनों पर झूमीं श्रद्धालु महिलाएं
द्वितीय दिवस कथा श्रवण के लिए सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित हुए। कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु महिलाएं झूमती दिखाई दीं। धार्मिक प्रसंगों और भजनों के बीच कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण रहा।
विधायक हीरालाल अलावा ने भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ आयोजन में उपस्थिति दर्ज कराई। श्रद्धालुओं की सहभागिता के बीच दूसरे दिन का कथा सत्र सम्पन्न हुआ।
पत्रकारों का समिति ने किया सम्मान
आयोजन के दौरान वरिष्ठ पत्रकार बसंत जख्मी और स्वप्निल शर्मा का समिति द्वारा सम्मान किया गया। आयोजकों के अनुसार संत श्री अखंडानंद जी महाराज की पहल पर मनावर में श्राद्ध पक्ष के दौरान इस स्वरूप का आयोजन पहली बार किया गया है।
रुद्र महायज्ञ, भागवत कथा, भजन और श्रद्धालुओं की सामूहिक सहभागिता के साथ दूसरे दिन की धार्मिक गतिविधियां सम्पन्न हुईं।
