एक दाना, एक राम नाम: पड़ाना के चार बच्चों ने किया करीब 45 हजार बार जप
पड़ाना। श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर में गणेश चतुर्थी से चल रहे सवा करोड़ श्री राम नाम जप संकल्प में बच्चों ने भी श्रद्धा और उत्साह के साथ सहभागिता की। प्रियल पाटीदार, हिमांशी पाटीदार, आराध्य पाटीदार और कार्तिक पाटीदार ने सुबह-शाम मिलकर करीब 800 ग्राम चावल के दानों के माध्यम से लगभग 45 हजार बार श्री राम नाम का जप किया। प्रत्येक दाने के साथ राम नाम का उच्चारण करते हुए बच्चों ने मंदिर में चल रहे सामूहिक संकल्प में अपना योगदान दिया।
नन्हे साधकों की सहभागिता को परिजनों और श्रद्धालुओं ने प्रेरणादायी बताया। उनका कहना है कि परिवार से धार्मिक संस्कार और उचित अवसर मिलने पर बच्चे भी आध्यात्मिक आयोजनों से उत्साहपूर्वक जुड़ सकते हैं।
प्रत्येक दाने के साथ किया राम नाम का जप
मंदिर में चल रहे संकल्प के अंतर्गत श्रद्धालु चावल के दानों के माध्यम से श्री राम नाम का जप कर रहे हैं। इसी क्रम में चारों बच्चों ने भी प्रत्येक दाने के साथ राम नाम का उच्चारण किया। सुबह और शाम मिलकर किए गए इस अभ्यास में उन्होंने लगभग 45 हजार जप पूरे किए।
बच्चों ने करीब 800 ग्राम चावल के दानों का उपयोग करते हुए संकल्प में सहभागिता की। उनकी इस पहल में भक्ति के साथ नियमित रूप से समय देने की भावना दिखाई दी। छोटी उम्र में सामूहिक धार्मिक आयोजन से जुड़कर उन्होंने अन्य बच्चों के सामने भी सहभागिता का उदाहरण प्रस्तुत किया।
गणेश चतुर्थी से जारी है सामूहिक संकल्प
श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर में गणेश चतुर्थी से सवा करोड़ श्री राम नाम जप का संकल्प चल रहा है। इसके अंतर्गत श्रद्धालु चावल के दानों के साथ राम नाम का जप कर अपनी सहभागिता निभा रहे हैं। बच्चों का योगदान भी इसी संकल्प का हिस्सा है।
प्रियल, हिमांशी, आराध्य और कार्तिक पाटीदार ने अपने जप के माध्यम से इस सामूहिक प्रयास में योगदान दिया। मंदिर में चल रहे आयोजन से बच्चों के जुड़ने को श्रद्धालुओं ने महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार धार्मिक गतिविधियों में बच्चों को अवसर देने से वे परंपराओं को समझते हुए उनमें भाग लेना सीखते हैं।
परिवार से मिले संस्कारों की भूमिका
परिजनों और श्रद्धालुओं ने कहा कि बच्चों को धार्मिक संस्कारों से जोड़ने में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। घर में मिलने वाला मार्गदर्शन और ऐसे आयोजनों में सहभागिता का अवसर उन्हें भक्ति एवं परंपराओं से परिचित कराता है।
चारों बच्चों की सहभागिता इसी भावना को सामने लाती है। उन्होंने सुबह-शाम मिलकर जप किया और सामूहिक संकल्प से जुड़े। परिजनों के अनुसार बच्चों को उचित अवसर मिले तो वे धार्मिक गतिविधियों में रुचि और उत्साह के साथ भाग ले सकते हैं। उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करना भी आवश्यक है।
भक्ति और संस्कार से जुड़ने की कोई उम्र नहीं
नन्हे साधकों के इस योगदान ने भक्ति और संस्कारों से जुड़ने के लिए उम्र की सीमा नहीं होने का संदेश दिया। मंदिर में श्रद्धालुओं के साथ बच्चों की सहभागिता ने आयोजन के सामूहिक स्वरूप को भी मजबूत किया।
परिजनों और श्रद्धालुओं ने कहा कि छोटी उम्र में धार्मिक संस्कारों से जुड़ना बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बच्चों का उत्साह इस बात का उदाहरण है कि वे भी अपनी क्षमता के अनुसार सामूहिक धार्मिक संकल्प में योगदान दे सकते हैं।
अन्य बच्चों के लिए प्रेरणादायी सहभागिता
प्रियल पाटीदार, हिमांशी पाटीदार, आराध्य पाटीदार और कार्तिक पाटीदार की पहल को अन्य बच्चों के लिए प्रेरणादायी माना जा रहा है। लगभग 45 हजार बार राम नाम जप में उनका संयुक्त योगदान परिजनों और श्रद्धालुओं के लिए प्रसन्नता का विषय बना।
मंदिर परिसर में चल रहे संकल्प में बच्चों की सहभागिता से भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालुओं ने नन्हे साधकों के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों को ऐसे आयोजनों से जोड़ने के अवसर मिलते रहने चाहिए। चावल के प्रत्येक दाने के साथ राम नाम जप की उनकी सहभागिता ने सामूहिक संकल्प में बाल भक्ति की भावना को स्थान दिया।
