अच्छे कर्म करो, फल अपने आप मिलेगा: मुनिश्री रजतचन्द्र विजयजी
माणकमल भंडारी
मोहनखेड़ा। श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में बैंगलोर जैन सेवा परिषद के तत्वावधान में पिछले दो दिनों से चल रहे प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षणार्थियों को ईमानदारी, मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया गया। सुरि ऋषभ गुरुदेव के शिष्य पूज्य मुनिराज श्री रजतचन्द्र विजयजी म.सा. ने जैन बंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें जहां भी कार्य करने का अवसर मिले, वहां फल की इच्छा किए बिना पूरी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
मुनिराजश्री ने कहा कि अच्छे कार्य व्यक्ति की पहचान बनाते हैं। यदि व्यक्ति अपना काम सही ढंग से करता है, तो उसका कार्य स्वयं बोलता है और उसे अपनी प्रशंसा में कुछ कहने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से परिणाम की अपेक्षा से पहले अपने कार्य और व्यवहार को बेहतर बनाने पर ध्यान देने का आह्वान किया।
अच्छे कार्यों से बनती है पहचान
मुनिश्री रजतचन्द्र विजयजी ने कहा कि व्यक्ति को किसी भी स्थान पर काम करते समय ईमानदारी का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। अच्छे कार्यों के माध्यम से वह दूसरों का विश्वास और सम्मान प्राप्त कर सकता है। उन्होंने समझाया कि अपनी जिम्मेदारी निष्ठापूर्वक निभाने वाला व्यक्ति अपने काम से ही योग्यता का परिचय देता है।
उन्होंने कहा कि कार्य करने से पहले ही फल की इच्छा रखने वाला व्यक्ति सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। इसलिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बंधुओं को अपने दायित्वों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनका संदेश था कि अच्छे कर्म और ईमानदार प्रयास को प्राथमिकता देने से कार्य की गुणवत्ता स्वयं सामने आती है।
ईमानदारी को जीवन में अपनाने की प्रेरणा
जैन धर्म के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए मुनिराजश्री ने कहा कि धर्म में ईमानदारी को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को ईमानदारी से कार्य कर सभी का विश्वास प्राप्त करने और सबकी आंखों का तारा बनने का प्रयास करने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि जैन धर्मस्थलों पर जैन बंधुओं के कार्य करने से धार्मिक मर्यादाओं के पालन को भी महत्व मिलेगा। कार्य करते समय ईमानदारी के साथ यह ध्यान रखना चाहिए कि धर्म की अवहेलना न हो। मुनिराजश्री ने अपने उद्बोधन में कार्य के प्रति निष्ठा और धार्मिक मूल्यों को व्यवहार में अपनाने पर जोर दिया।
जैन धर्मस्थलों पर रोजगार उपलब्ध कराने की पहल
प्रशिक्षण शिविर के मुख्य संचालक वसंत भाई वेदमुथा ने परिषद की योजना के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैन धर्मस्थलों पर जैन बंधुओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे देश में एक अनूठी योजना बताया।
वेदमुथा ने कहा कि परिषद का उद्देश्य प्रत्येक जैन धर्मस्थल पर जैन बंधुओं को कार्य करने का अवसर दिलाना है। प्रशिक्षण के माध्यम से इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने योजना की अब तक की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए प्रशिक्षणार्थियों को इसके उद्देश्य से अवगत कराया।
अब तक 45 बंधुओं को मिली नियुक्ति
वसंत भाई वेदमुथा ने बताया कि देशभर के विभिन्न जैन धर्मस्थलों पर अब तक 45 बंधुओं को नियुक्ति दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि पर परिषद गर्व महसूस करती है। रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में मिली सफलता को उन्होंने योजना की महत्वपूर्ण प्रगति बताया।
उनके अनुसार, जैन बंधुओं को धर्मस्थलों पर कार्य से जोड़ना परिषद का प्रमुख लक्ष्य है। शिविर में उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों के समक्ष उन्होंने इस लक्ष्य को दोहराया और योजना के माध्यम से अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों की जानकारी रखी।
लक्ष्य से नहीं भटकने का आह्वान
शिविर संचालन समिति के वरिष्ठ सदस्य माणकमल भंडारी ने कहा कि हमें अपने उद्देश्यों से भटकना नहीं चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से मेहनत और ईमानदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया। भंडारी ने कहा कि इन गुणों को अपनाने पर सफलता उनके कदमों में होगी।
उन्होंने अपने संबोधन में लक्ष्य के प्रति दृढ़ता बनाए रखने का संदेश दिया। प्रशिक्षणार्थियों को जिम्मेदारी से कार्य करने और अपने उद्देश्य पर केंद्रित रहने की प्रेरणा दी गई।
संचालन समिति ने दिया योगदान
शिविर को सफल बनाने में संचालन समिति के राजकुमार जैन, जिनेन्द्र गुन्दीगरा सहित अनेक बंधुओं ने सेवाएं दीं। उनके सहयोग से प्रशिक्षण की गतिविधियों का संचालन हुआ। मुनिराजश्री के मार्गदर्शन और समिति के संबोधनों में ईमानदारी, मेहनत तथा उद्देश्य के प्रति समर्पण का संदेश प्रमुख रहा।
