ग्वालियर में आचार्य विमल सागर जी महाराज की 111वीं जन्मजयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई
Gwalior । आत्म साधना वर्षायोग समिति एवं सकल जैन समाज ग्वालियर की ओर से वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री 108 विमल सागर जी महाराज की 111वीं जन्मजयंती श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई गई। महोत्सव के अंतिम दिन जैनाचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में दानाओली स्थित दिगंबर बीसपंथी जैन मंदिर से पालकी शोभायात्रा निकाली गई। इसके बाद विनयांजलि सभा आयोजित की गई।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन के अनुसार, शोभायात्रा में आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज की प्रतिमा को पालकी में विराजमान किया गया। संजय सचिन गोधा परिवार की ओर से पालकी में प्रतिमा विराजित की गई। शोभायात्रा के आगे जैन ध्वज पताका चल रही थी, जबकि बैंड-बाजों की धुन के बीच बड़ी संख्या में गुरुभक्त पालकी लेकर आगे बढ़े।
मंगल कलश से महिलाओं ने की अगवानी
शोभायात्रा में कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाह भी शामिल हुए। उन्होंने पालकी में विराजित आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज के दर्शन कर श्रीफल अर्पित किया, मंगल आरती उतारी और पालकी को कंधा दिया। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर जैन समाज के लोगों ने पुष्पवर्षा और आरती के साथ शोभायात्रा का स्वागत किया।
भजनों की धुन पर श्रावक-श्राविकाएं उत्साह के साथ आगे बढ़ते नजर आए। महिलाओं ने केसरिया साड़ी और पुरुषों ने सफेद वस्त्र धारण किए। महिलाओं ने मंगल कलश के साथ शोभायात्रा की अगवानी की और डांडिया नृत्य भी किया। पालकी शोभायात्रा में चार इंद्र भी शामिल रहे।
शोभायात्रा दानाओली से प्रारंभ होकर मोर बाजार, महाराज बाड़ा, सराफा बाजार, गस्त का ताजिया और नई सड़क होते हुए चंपाबाग बगीची पहुंची।

100 रसों से किया पंचामृताभिषेक
प्रतिष्ठाचार्य पंडित विपिन शास्त्री के मार्गदर्शन में आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज की प्रतिमा का जलाभिषेक एवं पंचामृताभिषेक किया गया। समाज के लोगों ने विभिन्न रसों और द्रव्यों से विधि-विधानपूर्वक अभिषेक किया। इस दौरान जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
इसके बाद विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। आत्म साधना वर्षायोग समिति के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र गंगवाल, महामंत्री निर्मल पाटनी, विकास गंगवाल, महेंद्र टोंग्या, बालचंद्र जैन, पंकज छाबड़ा, संजय गोधा सहित दिल्ली, कलकत्ता, आगरा और अन्य स्थानों से आए गुरुभक्तों ने संतों के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद लिया।
सहज और सरल संत थे आचार्य विमल सागर : चैत्य सागर
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज ने कहा कि संतों का मानव समाज पर बड़ा उपकार होता है। वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज सहज और सरल संत थे तथा जन-जन के संत के रूप में समाज में उनका विशेष स्थान रहा। उन्होंने कहा कि आचार्य विमल सागर जी ने आत्मकल्याण के साथ दूसरों के कल्याण और पीड़ा को दूर करने के लिए निरंतर कार्य किया। उनके त्याग, तपस्या, करुणा और वात्सल्य से अनेक लोगों को प्रेरणा मिली। उन्होंने समाजजनों से आचार्य श्री के बताए सद्मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
वात्सल्य के धनी थे आचार्य विमल सागर : अनुमान सागर
मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ने कहा कि आचार्य गुरुदेव विमल सागर जी महाराज महान तपस्वी, साधक और वात्सल्य के धनी थे। उनकी अखंड ध्यान साधना दैनिक तपस्या का हिस्सा थी। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री की साधना और तपस्या का समाज पर गहरा प्रभाव रहा। उनके पास लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते थे और उनके आशीर्वाद से उन्हें संबल एवं मार्गदर्शन मिलता था।
जन्मजयंती महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज के जीवन, तप, साधना और समाज के प्रति उनके योगदान को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
