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एशियन गेम्स में परवीन हुड्डा का गोल्डन पंच, भारत को मिला 73वां पदक

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Published On: 2 October 2026
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एशियन गेम्स में परवीन हुड्डा का गोल्डन पंच, भारत को मिला 73वां पदक

महिलाओं के 65 किलोग्राम भारवर्ग में चीनी ताइपे की चेन निएन चिन को 3–2 से हराया, एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने वाली तीसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं

नई दिल्ली। भारत की युवा मुक्केबाज परवीन हुड्डा ने एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। महिलाओं के 65 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में उन्होंने चीनी ताइपे की चेन निएन चिन को 3–2 से हराया। इस जीत के साथ भारत के खाते में प्रतियोगिता का 73वां पदक जुड़ गया। परवीन की सफलता भारतीय महिला मुक्केबाजी के लिए भी खास रही। वह एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की तीसरी महिला मुक्केबाज बन गई हैं।

करीबी मुकाबले में परवीन ने हासिल की जीत

महिलाओं के 65 किलोग्राम भारवर्ग का फाइनल परवीन हुड्डा और चेन निएन चिन के बीच खेला गया। परवीन ने यह मुकाबला 3–2 के अंतर से अपने नाम किया। परिणाम का अंतर बताता है कि स्वर्ण पदक की यह लड़ाई करीबी रही। अंत में फैसला भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में आया और परवीन ने शीर्ष स्थान हासिल किया।

फाइनल में जीत के साथ परवीन का अभियान स्वर्णिम उपलब्धि में बदल गया। उन्होंने अपने भारवर्ग में भारत को गोल्ड दिलाया। यह सफलता व्यक्तिगत पदक तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारतीय दल की कुल पदक संख्या में भी इजाफा हुआ। भारत के लिए प्रतियोगिता का 73वां पदक परवीन के स्वर्ण के रूप में आया।

मैरी कॉम और लवलीना की सूची में शामिल

इस उपलब्धि के साथ परवीन हुड्डा ने भारतीय महिला मुक्केबाजी की विशेष रिकॉर्ड सूची में अपना नाम दर्ज कराया। उनसे पहले मैरी कॉम और लवलीना बोरगोहेन एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। मैरी कॉम ने वर्ष 2014 में यह उपलब्धि हासिल की थी, जबकि लवलीना ने 2026 के एशियन गेम्स में गोल्ड जीता।

अब परवीन इस सूची में शामिल होने वाली तीसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बन गई हैं। तीनों खिलाड़ियों की उपलब्धियां भारतीय महिला मुक्केबाजी के लिए महत्वपूर्ण हैं। परवीन का स्वर्ण इस क्रम को आगे बढ़ाता है और एशियन गेम्स में भारत की महिला मुक्केबाजों की सफलताओं में एक नया नाम जोड़ता है।

लवलीना के बाद परवीन ने दिलाया स्वर्ण

परवीन हुड्डा से पहले भारत की स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने भी स्वर्ण पदक हासिल किया था। लवलीना की जीत के बाद परवीन ने अपने फाइनल मुकाबले में सफलता पाकर भारतीय मुक्केबाजी को एक और गोल्ड दिया। इस तरह भारत को महिला मुक्केबाजी में लगातार दो स्वर्ण पदकों की खुशी मिली।

दो अलग भारतीय मुक्केबाजों का स्वर्ण जीतना प्रतियोगिता में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा। लवलीना के बाद परवीन की सफलता ने मुक्केबाजी में भारतीय प्रदर्शन को और मजबूत किया। दोनों खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स की स्वर्ण पदक विजेताओं की सूची में अपना स्थान बनाया।

भारत की पदक संख्या पहुंची 73

परवीन की जीत का असर भारत की कुल पदक संख्या पर भी पड़ा। उनके स्वर्ण पदक के साथ भारतीय दल के पदकों की संख्या 73 हो गई। ऐसे में यह मुकाबला व्यक्तिगत उपलब्धि और देश की पदक संख्या, दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।

एशियन गेम्स जैसे बड़े आयोजन में प्रत्येक पदक भारतीय दल के प्रदर्शन का हिस्सा होता है। परवीन ने अपने भारवर्ग में सर्वोच्च स्थान हासिल करके इस प्रदर्शन में योगदान दिया। उनके नाम जुड़ा स्वर्ण भारत की पदक सूची में एक और सफलता लेकर आया।

भारतीय महिला मुक्केबाजी के लिए खास उपलब्धि

परवीन हुड्डा की जीत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनका ऐतिहासिक रिकॉर्ड रहा। चीनी ताइपे की चेन निएन चिन पर 3–2 की जीत ने उन्हें एशियन गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता बनाया। साथ ही, वह मैरी कॉम और लवलीना बोरगोहेन के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली तीसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं।

महिलाओं के 65 किलोग्राम भारवर्ग में मिली इस सफलता ने परवीन के लिए प्रतियोगिता को यादगार बना दिया। लवलीना के स्वर्ण के बाद उनका गोल्ड भारतीय महिला मुक्केबाजी की दूसरी बड़ी सफलता रहा। भारत के 73वें पदक के साथ परवीन ने अपना नाम एशियन गेम्स के स्वर्णिम इतिहास में दर्ज कराया।

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