11 अक्टूबर से शुरू होगा नवरात्र, अभिजीत मुहूर्त में होगी घट स्थापना, हाथी पर आएंगी माता
शहर। शहरभर में शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्र का उल्लास हर ओर नजर आने लगा है। आराधना स्थलों पर नौ दिनों में होने वाले विशेष शृंगार और अनुष्ठानों की रूपरेखा तय हो गई है। वहीं गली, मोहल्लों और कॉलोनियों में दुर्गा महोत्सव समितियों और गरबा मंडलों ने भी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक शक्ति उपासना
नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं। 11 से 19 अक्टूबर तक पूरे नौ दिन शक्ति की उपासना के बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) मनाया जाएगा।
अभिजीत मुहूर्त में होगी घट स्थापना
मध्यप्रदेश ज्योतिष एवं विद्वत परिषद के अध्यक्ष आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के चलते इस बार घट स्थापना अभिजीत मुहूर्त में होगी। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 से 12:31 बजे तक रहेगा।
ज्योतिर्विदों के अनुसार पद्म योग के साथ गुरु के उच्च राशि कर्क में स्थित होने से मंगलकारी काहल योग बनेगा, जो साधना में सफलता प्रदान करने वाला माना गया है।
सप्तमी तिथि की वृद्धि, अष्टमी-नवमी पर मतभेद
चित्रा पक्षीय अयनांश आधारित पंचांगों ने नवरात्र में सप्तमी तिथि की वृद्धि बताई है। यह 17 अक्टूबर, शनिवार से 18 अक्टूबर, रविवार तक रहेगी। इन पंचांगों के अनुसार अष्टमी और महानवमी का पर्व 19 अक्टूबर, सोमवार को मनाया जाएगा। हालांकि कुछ पंचांगकर्ताओं ने 18 अक्टूबर, रविवार को महाअष्टमी और 19 अक्टूबर, सोमवार को महानवमी बताई है।
नवमी का बलिदान और विजयादशमी पर शमी पूजन
आचार्य शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार 20 अक्टूबर, मंगलवार को दोपहर 12:49 बजे तक दुर्गा नवमी का बलिदान होगा। इसके बाद श्रवण नक्षत्र युक्त अपराह्न व्यापिनी विजयादशमी पर शमी पूजन किया जाएगा।
हाथी पर होगा माता का आगमन
इस वर्ष माता का आगमन हाथी पर होगा, जिसे ज्योतिष गणना में समृद्धिदायक बताया गया है।
