90 की उम्र में भी जज्बा बरकरार, लोकतंत्र सेनानी सुदामा भाटोदरा का सम्मान
Alirajpur । “उम्र शरीर की होती है, हौसले की नहीं” इस संदेश को चरितार्थ करते हुए अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट, अलीराजपुर ने 90 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी सुदामा भाटोदरा और 76 वर्षीय शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद गहलोत का सम्मान किया। यह आयोजन समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदना और कृतज्ञता की भावना को मजबूत करने वाला रहा।
वृद्धजन दिवस पर बुजुर्गों के सम्मान की पहल
हर वर्ष 1 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने समाज के उन वरिष्ठजनों को सम्मानित करने की पहल की, जिन्होंने अपने जीवन में संघर्ष, सेवा और संस्कारों की मिसाल कायम की है। ट्रस्ट का मानना है कि बुजुर्ग समाज की नींव हैं और उनका सम्मान करना नई पीढ़ी का दायित्व है।
निवास पर पहुंचकर किया गया सम्मान
ट्रस्ट के सदस्य सुदामा भाटोदरा के निवास पर पहुंचे और उन्हें शॉल भेंट कर सम्मानित किया। सदस्यों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके दीर्घ एवं संघर्षपूर्ण जीवन को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। सम्मान के इस अवसर पर आत्मीय माहौल रहा। भाटोदरा ने ट्रस्ट के सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए इस स्नेह और सम्मान के लिए धन्यवाद दिया।
आपातकाल में जेल में बिताए सात महीने
सम्मान के दौरान सुदामा भाटोदरा ने आपातकाल के दौर की स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि 26 जून 1975 को आपातकाल लागू होने के बाद उन्हें करीब छह माह इंदौर और एक माह झाबुआ की जेल में रहना पड़ा। स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण बाद में उन्हें रिहा किया गया।
उस कठिन दौर में लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खड़े होने की उनकी प्रतिबद्धता आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले सेनानियों का संघर्ष देश के लोकतांत्रिक इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है, और भाटोदरा उन्हीं सेनानियों में से एक हैं।
ताम्रपत्र से मिला शासन का सम्मान
लोकतंत्र के लिए उनके संघर्ष और योगदान के सम्मान में 26 जनवरी 2018 को मुख्यमंत्री निवास में मध्यप्रदेश शासन ने उन्हें ताम्रपत्र प्रदान कर लोकतंत्र सेनानी के रूप में सम्मानित किया था। यह सम्मान उनके त्याग और संघर्ष की शासकीय स्वीकृति के रूप में उनके जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।
बीमारी को हराया, हौसले को नहीं
90 वर्ष की उम्र में भी उत्साह से भरे भाटोदरा ने अपने जीवन के संघर्षों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण कभी नहीं छोड़ा। उनका कहना है कि कठिन परिस्थितियां इंसान को तोड़ती नहीं, बल्कि और मजबूत बनाती हैं, बशर्ते मन में हौसला बना रहे।
उन्होंने कहा कि परिवार में एकता, समाज में सद्भाव और मन में उत्साह हो तो उम्र कभी जीवन की खुशियों में बाधा नहीं बनती। वे आज भी स्वयं को सामाजिक और पारिवारिक रूप से सक्रिय और गौरवान्वित महसूस करते हैं। उनकी यह सकारात्मक सोच युवाओं और बुजुर्गों, दोनों के लिए प्रेरणादायी संदेश है।
शिक्षाविद अरविंद गहलोत का भी हुआ सम्मान
कार्यक्रम में 76 वर्षीय शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद गहलोत का भी ट्रस्ट द्वारा सम्मान किया गया। शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को सराहा गया तथा उनके अनुभव को समाज की अमूल्य पूंजी बताया गया। ट्रस्ट सदस्यों ने कहा कि ऐसे समर्पित व्यक्तित्व समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं।
“वरिष्ठजन समाज की जीवंत धरोहर”
ट्रस्ट अध्यक्ष संजय पवार ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक केवल उम्र का पड़ाव नहीं, बल्कि अनुभव, संघर्ष, संस्कार और इतिहास की अमूल्य विरासत अपने साथ लेकर चलते हैं। उनके जीवन संघर्षों से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। ऐसे वरिष्ठजनों का सम्मान करना समाज की जिम्मेदारी भी है और गौरव भी।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के अनुभव और मार्गदर्शन से ही समाज सही दिशा में आगे बढ़ता है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जरूरी है कि हम अपने बड़ों के पास बैठें, उनकी बातें सुनें और उनके अनुभवों से सीखें।
इनकी रही उपस्थिति
कार्यक्रम में ट्रस्ट अध्यक्ष संजय पवार, उपाध्यक्ष बद्रीलाल भाटोदरा, उपाध्यक्ष दिलीप गादर और जिला संयोजक राजेश राठौर उपस्थित रहे।
बुजुर्गों के सम्मान की सार्थक पहल
ट्रस्ट द्वारा वरिष्ठजनों के सम्मान का यह प्रयास समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदना और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने बड़ों के अनुभवों से सीखने और उनके प्रति आदर का भाव रखने की प्रेरणा देते हैं। समाज के जागरूक नागरिकों ने भी ट्रस्ट की इस पहल की सराहना की और आशा जताई कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर होते रहेंगे।
