सोयाबीन कटाई के लिए मजदूरों का टोटा, बढ़ी मजदूरी से किसान चिंतित
पड़ाना में कटाई सीजन शुरू होते ही बढ़ी मजदूरों की मांग, पिछले साल के मुकाबले मजदूरी में करीब 2 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर तक बढ़ोतरी
पड़ाना। सोयाबीन कटाई का सीजन शुरू होते ही गांवों की दिनचर्या बदल गई है। खेतों में किसान और उनके परिवार के सदस्य सुबह से शाम तक फसल समेटने में जुटे हैं। दूसरी ओर मजदूरों की कमी और बढ़ी मजदूरी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। पिछले साल जहां सोयाबीन कटाई के लिए करीब 6 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर मजदूरी ली जा रही थी, वहीं इस बार मजदूर 8 हजार रुपए तक मांग रहे हैं। अधिक मजदूरी देने के बावजूद किसानों को पर्याप्त संख्या में मजदूर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
कई किसान एक खेत की कटाई पूरी होने के बाद दूसरे खेत से मजदूर आने का इंतजार कर रहे हैं। कुछ किसान मजदूरों की तलाश में गांव-गांव घूम रहे हैं। ऐसे में समय पर फसल कटाई पूरी करना किसानों के लिए चुनौती बन गया है।Soybean Harvesting Faces Labour Shortage in Padana
मौसम की चिंता, जल्द फसल समेटने की कोशिश
बारिश के बाद खेतों में नमी और कई स्थानों पर पानी जमा होने से किसान पहले ही परेशान हैं। इसके अलावा कभी तेज धूप तो कभी अचानक बादल छाने से मौसम को लेकर चिंता बनी हुई है। पक चुकी सोयाबीन की फलियों के चटकने और दाना खेत में गिरने का खतरा किसानों को सता रहा है।
इसी कारण किसान अधिक मजदूरी देने के बावजूद फसल की कटाई जल्द पूरी कराने का प्रयास कर रहे हैं। खेतों में अधिक नमी होने के कारण कई जगह हार्वेस्टर और रीपर मशीनों का संचालन भी मुश्किल हो रहा है। इससे मजदूरों पर निर्भरता और बढ़ गई है।
परिवार के सदस्य संभाल रहे कटाई की जिम्मेदारी
मजदूर नहीं मिलने और महंगी मजदूरी के चलते कई किसान परिवार के सदस्यों को ही कटाई के काम में लगा रहे हैं। सुबह से महिलाएं, पुरुष और बड़े बच्चे खेतों में सोयाबीन काटते नजर आ रहे हैं।
किसान विशाल पाटीदार, नाहरसिंह गुर्जर, रामबाबू परमार, पप्पू खाती, शरीफ मंसूरी और रघु परमार ने बताया कि मजदूरों की कमी के कारण परिवार के सदस्य मिलकर फसल कटाई कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि समय पर मजदूर नहीं मिलने से कटाई में देरी हो रही है और मजदूरी की बढ़ी दर से उत्पादन लागत भी बढ़ रही है।
बाजार और स्कूलों पर भी असर
कटाई के सीजन का असर गांव के बाजारों और स्कूलों में भी दिखाई दे रहा है। किसान और उनके परिवार सुबह से खेतों में व्यस्त होने के कारण बाजारों में पहले जैसी चहल-पहल नहीं है। वहीं कुछ परिवारों के बच्चे भी खेतों में हाथ बंटाने के कारण स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।
कुछ किसान मौसम और खेत की स्थिति अनुकूल होने पर हार्वेस्टर से कटाई करा रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में किसान अभी भी मजदूरों की तलाश में हैं। किसानों के सामने एक ओर फसल को समय पर सुरक्षित घर पहुंचाने की चिंता है, तो दूसरी ओर मजदूरी और कटाई का बढ़ता खर्च उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ा रहा है।
