परिवार की 100वीं रीजनल पेरेंट्स मीट का शुभारंभ, पूर्वोत्तर राज्यों के 150 से अधिक प्रतिभागी हुए शामिल
नागालैंड के कोहिमा में दो दिवसीय आयोजन; बौद्धिक दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण, अधिकार और समावेशन पर हुआ मंथन
Nagda। बौद्धिक दिव्यांगजनों और उनके परिवारों के सशक्तिकरण की दिशा में कार्यरत राष्ट्रीय संगठन ‘परिवार’ की 100वीं रीजनल पेरेंट्स मीट का शनिवार को नागालैंड की राजधानी कोहिमा स्थित टाफमा ऑडिटोरियम में शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह में पूर्वोत्तर राज्यों से 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने किया। दो दिवसीय क्षेत्रीय मीट की थीम ‘देखभाल से सशक्तिकरण की ओर- सशक्त परिवारों और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से समावेशी समुदायों का निर्माण’ रखी गई है।
परिवार मध्य क्षेत्र के सचिव महेश चंद्र राठौर ने बताया कि आयोजन परिवार राष्ट्रीय महासंघ द्वारा मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद तथा नागालैंड दिव्यांगजन अभिभावक संगठन के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
अधिकार और समावेशन पर हुआ मंथन
उद्घाटन सत्र में नागालैंड अभिभावक संघ की अध्यक्ष नलियो ने स्वागत उद्बोधन दिया। वहीं नागालैंड के दिव्यांगजन आयुक्त टोंपांग एल. जमीर ने दिव्यांगजनों के अधिकार, समावेशन तथा परिवारों और अभिभावक संगठनों की भूमिका पर विचार रखे।
परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पंकज मारू ने 100वीं रीजनल पेरेंट्स मीट के अवसर पर परिवार आंदोलन की यात्रा और अभिभावक संगठनों की सामूहिक शक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के संदर्भ में दृष्टिकोण को केवल देखभाल तक सीमित रखने के बजाय सशक्तिकरण, अधिकार, स्व-वकालत और स्वतंत्र एवं सम्मानजनक सहभागिता की दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह बैठक परिवारों की संगठित एवं सामूहिक भूमिका की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
दिव्यांगजनों को उनकी क्षमता से पहचानने पर जोर
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने दिव्यांगजनों को उनकी दिव्यांगता के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी योग्यता और क्षमताओं के आधार पर देखने पर जोर दिया।
उन्होंने दिव्यांगजनों के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का उल्लेख करते हुए उनके सशक्तिकरण के लिए सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

‘सीमाओं से परे’ प्रस्तुति रही आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण ‘सीमाओं से परे’ प्रस्तुति रही, जिसे सेल्फ-एडवोकेट्स ने प्रस्तुत किया। प्रस्तुति के माध्यम से दिव्यांगजनों की प्रतिभा, क्षमताओं और संभावनाओं को मंच प्रदान किया गया।
इस प्रस्तुति ने आयोजन के मूल संदेश को प्रभावी ढंग से सामने रखा और प्रतिभागियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम का आभार केविरहेबी मोर ने व्यक्त किया। उद्घाटन सत्र का समापन राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
पूर्वोत्तर की संस्कृति की झलक
आयोजन के दौरान पूर्वोत्तर भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को समर्पित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें नागालैंड सरकार के सामाजिक न्याय मंत्रालय के सलाहकार एवं विधायक वापांग कोण्यक विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
दूसरे दिन इन विषयों पर होगी चर्चा
रीजनल पेरेंट्स मीट के दूसरे दिन कौशल विकास, स्व-अधिवक्ता, व्यवहार प्रबंधन, दिव्यांग सारथी, वयस्कता की ओर संक्रमण, प्रोजेक्ट हितार्थ तथा अभिभावक संगठनों द्वारा प्रणालीगत बदलाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और सत्र आयोजित किए जाएंगे।
आयोजकों के अनुसार, 100वीं रीजनल पेरेंट्स मीट का उद्देश्य दिव्यांगजनों और उनके परिवारों को केवल देखभाल के दायरे से आगे ले जाकर अधिकार, आत्मनिर्भरता, स्व-वकालत और सम्मानजनक सामाजिक सहभागिता के लिए सशक्त करना है।
