अलग-अलग स्वभाव का महत्व विषय पर साध्वी अर्हमव्रता श्रीजी का प्रेरक प्रवचन
नवकार कलश यात्रा के तहत निकला विशाल चल समारोह धर्मसभा में बदला, श्रद्धालुओं ने उत्साह से लिया हिस्सा
नागदा। श्री श्वेतांबर मूर्ति पूजक जैन श्री संघ एवं आत्मलक्षी चातुर्मास समिति के तत्वावधान में बुधवार, 30 सितंबर को श्री नवकार कलश यात्रा के अंतर्गत विशाल चल समारोह निकाला गया। साध्वी श्री अर्हमव्रता श्रीजी म.सा. आदि ठाणा-4 की निश्रा में आयोजित इस चल समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और समाजजनों ने भक्ति एवं उत्साह के साथ सहभागिता की।
चल समारोह श्री पार्श्वप्रधान पाठशाला भवन से प्रारंभ हुआ। समाजजनों और श्रद्धालुओं के साथ यह यात्रा लाभार्थी परिवार श्रीमती नूतनदेवी प्रकाशचंदजी तथा श्रीसंघ अध्यक्ष श्री मनीष सालेचा व्होरा के प्रतिष्ठान हेल्थकेयर न्यूट्रीशन क्लब चिकित्सालय मार्ग पहुंची। यहां चल समारोह धर्मसभा में परिवर्तित हो गया।
चार प्रकार के स्वभावों की व्याख्या
धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी श्री अर्हमव्रता श्रीजी ने “अलग-अलग स्वभाव का महत्व” विषय पर प्रेरणादायी प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य की पहचान केवल उसकी शारीरिक आकृति से नहीं होती, बल्कि उसके स्वभाव, विचारों और व्यवहार से होती है। व्यक्ति का व्यवहार ही उसके व्यक्तित्व और दूसरों के साथ उसके संबंधों को प्रभावित करता है।
साध्वीश्री ने प्रकृति के उदाहरणों के माध्यम से मनुष्य के विभिन्न स्वभावों को समझाया। उन्होंने मुख्य रूप से चार प्रकार के स्वभावों का उल्लेख किया—ब्लेसिंग नेचर (शुभचिंतक प्रकृति), बॉन्डिंग नेचर (जोड़ने वाली प्रकृति), तोड़ने वाला स्वभाव और झुकने का स्वभाव।
उन्होंने बताया कि शुभचिंतक व्यक्ति दूसरों का हित देखकर प्रसन्न होता है। वहीं जोड़ने वाला स्वभाव प्रेम, मैत्री और करुणा के माध्यम से लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का कार्य करता है।

ईर्ष्या और निंदा से कमजोर होते हैं रिश्ते
साध्वीश्री ने कहा कि ईर्ष्या, निंदा और द्वेष जैसे भाव व्यक्ति के संबंधों को कमजोर करते हैं। ऐसे भावों से बचने और सकारात्मक सोच विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने व्यवहार का आत्ममंथन करते हुए यह प्रयास करना चाहिए कि उसके कारण किसी व्यक्ति या संबंध को नुकसान न पहुंचे।
विनम्रता को जीवन की महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक हो, वहां व्यक्ति को अहंकार छोड़कर झुकना सीखना चाहिए। परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालना और दूसरों का सम्मान करना भी जीवन के महत्वपूर्ण गुण हैं।
जीवन में संतुलन जरूरी
साध्वी श्री अर्हमव्रता श्रीजी ने कहा कि जीवन में चारों स्वभावों का संतुलन जरूरी है। मनुष्य को शुभचिंतक बनने, लोगों को जोड़ने, तोड़ने वाले स्वभाव को त्यागने तथा आवश्यक स्थान पर विनम्रता के साथ झुकने का प्रयास करना चाहिए। इन गुणों का संतुलन जीवन को अधिक सार्थक बनाने में सहायक होता है।
धार्मिक वातावरण में हुआ आयोजन
नवकार कलश यात्रा और धर्मसभा में समाजजनों के साथ अनेक गणमान्यजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने साध्वीश्री के प्रवचन को ध्यानपूर्वक सुना।
