जशपुर में बिजली का खंभा गाड़ते समय करंट की चपेट में आए चार मजदूर, दो की मौत
दैनिक स्वराज वाणी | जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में बिजली का खंभा गाड़ने के दौरान बड़ा हादसा हो गया। पत्थलगांव थाना क्षेत्र के पाकरगांव में काम कर रहे चार मजदूर 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन की चपेट में आ गए। हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को इलाज के लिए पत्थलगांव के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
खंभा गाड़ने का काम किस विभाग या एजेंसी की ओर से कराया जा रहा था और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है। उपलब्ध विवरण में मृतकों और घायलों के नाम भी नहीं दिए गए हैं।
खंभा गाड़ने के दौरान हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मजदूर पाकरगांव में बिजली का खंभा लगाने का काम कर रहे थे। इसी दौरान वे ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की लाइन के संपर्क में आ गए। करंट लगने से चार मजदूर प्रभावित हुए। इनमें से दो की मौत हो गई और दो को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया।
यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बिजली की लाइन से खंभे का संपर्क हुआ था या मजदूर किसी अन्य तरीके से करंट की चपेट में आए। हादसे के समय खंभे को उठाने और गाड़ने की प्रक्रिया किस चरण में थी, इसका विवरण भी सामने नहीं आया है। घटनाक्रम की सही जानकारी मौके की जांच और वहां मौजूद लोगों के बयानों से मिल सकेगी।
दो मजदूर अस्पताल में भर्ती
करंट से झुलसे दोनों मजदूरों का पत्थलगांव के सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है। उनकी चोटों की गंभीरता और वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति के बारे में अस्पताल की ओर से विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उन्हें आगे के इलाज के लिए किसी अन्य अस्पताल में भेजने की जरूरत पड़ेगी या नहीं।
मृत मजदूरों की पहचान सामने आने पर उनके परिवारों को घटना की पूरी जानकारी मिल सकेगी। अभी उपलब्ध रिपोर्ट में मजदूरों की उम्र, निवास स्थान और वे किस एजेंसी के लिए काम कर रहे थे, इसका उल्लेख नहीं है।
बिजली आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
हादसे के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि खंभा लगाते समय पास की बिजली लाइन में आपूर्ति जारी थी या उसे बंद कराया गया था। काम शुरू होने से पहले लाइन की स्थिति की जांच हुई थी या नहीं, यह भी पता चलना बाकी है। इसी तरह मजदूरों को काम के लिए कौन-से सुरक्षा उपकरण दिए गए थे, इसकी पुष्टि आवश्यक है।
बिजली की लाइन के आसपास खंभा लगाते समय खंभे की लंबाई, लाइन से उसकी दूरी और उसे संभाल रहे मजदूरों की स्थिति पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। इस मामले में कौन-सी सावधानियां अपनाई गई थीं, यह जांच का विषय है। बिना जांच के किसी कर्मचारी, ठेकेदार या विभाग की लापरवाही तय करना उचित नहीं होगा।
काम किसके जिम्मे था, यह भी स्पष्ट होना बाकी
पाकरगांव में बिजली का खंभा किस काम के लिए लगाया जा रहा था, इसकी जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं है। यह नया खंभा था, खराब खंभे को बदला जा रहा था या किसी अन्य बिजली संबंधी कार्य का हिस्सा था—इसकी पुष्टि नहीं हुई है। कार्यस्थल पर सुपरवाइजर मौजूद था या नहीं और काम शुरू करने की अनुमति किसने दी थी, ये सवाल भी जवाब मांगते हैं।
इन तथ्यों से यह समझने में मदद मिलेगी कि हादसे से पहले काम की योजना कैसे बनाई गई थी और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। प्रशासन तथा संबंधित बिजली विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
जांच से स्पष्ट होगा हादसे का कारण
फिलहाल पुष्टि किए गए विवरण के अनुसार, पाकरगांव में खंभा गाड़ते समय चार मजदूर करंट की चपेट में आए, जिनमें दो की मौत हुई और दो का इलाज चल रहा है। हादसे की वजह और जिम्मेदारी के बारे में निष्कर्ष जांच के बाद ही निकलेगा।
घटना की जांच में बिजली आपूर्ति की स्थिति, कार्यस्थल की व्यवस्था, मजदूरों को दिए गए सुरक्षा साधन और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अहम होंगे। मृतकों के परिवारों तथा घायल मजदूरों को सहायता देने के संबंध में भी अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
