कम उम्र में भी हार्ट अटैक का खतरा: दिनचर्या की ये आदतें रखेंगी दिल का ध्यान
दैनिक स्वराज वाणी | हेल्थ डेस्क। हार्ट अटैक को केवल अधिक उम्र की समस्या मानकर युवाओं में उसके लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। विश्व हृदय दिवस पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हर पांच में से एक हार्ट अटैक का मरीज 40 वर्ष से कम उम्र का है। हालांकि, इस आंकड़े के साथ किसी राष्ट्रीय अध्ययन का आधार नहीं दिया गया है, इसलिए इसे भारत के सभी मरीजों का प्रमाणित अनुपात नहीं माना जा सकता। चिकित्सकीय स्रोत भी बताते हैं कि कम उम्र में हार्ट अटैक हो सकता है और इसके जोखिम को समझना जरूरी है।
हृदय रोग का जोखिम किसी एक कारण से तय नहीं होता। धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह और मोटापा इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास भी डॉक्टर को बताना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन असंतुलित आहार, शारीरिक निष्क्रियता और तंबाकू सेवन को हृदय रोग से जुड़े महत्वपूर्ण कारणों में गिनता है।
दिनचर्या में क्या बदलें?
रोज चलने-फिरने के लिए समय निकालें। लंबे समय तक बैठे रहने वाली दिनचर्या में नियमित गतिविधि जोड़ें। विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता की शारीरिक गतिविधि करने की सलाह देता है। इसे सप्ताह के अलग-अलग दिनों में बांटना आसान हो सकता है। पहले से कोई बीमारी हो या व्यायाम के दौरान तकलीफ होती हो, तो अपनी क्षमता के अनुसार गतिविधि तय करने के लिए डॉक्टर से बात करें।
भोजन और तंबाकू पर ध्यान दें। रोजमर्रा के खाने में संतुलन रखें और नमक का सेवन कम करने की कोशिश करें। सिगरेट, बीड़ी या अन्य तंबाकू उत्पादों से दूर रहना हृदय स्वास्थ्य के लिए अहम कदम है। शराब का हानिकारक सेवन भी जोखिम बढ़ाता है। ये बदलाव किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं हैं, लेकिन हृदय रोग का जोखिम घटाने में मदद कर सकते हैं।
अपनी जांच के आंकड़े जानें। उच्च रक्तचाप, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की समस्या हमेशा स्पष्ट लक्षणों के साथ सामने नहीं आती। जांच कब और कितनी बार करानी है, यह उम्र, पारिवारिक इतिहास और दूसरे जोखिमों के आधार पर डॉक्टर से तय करें। पहले से दवा चल रही हो तो उसे अपने स्तर पर बंद न करें।
हार्ट अटैक के संकेत पहचानें
सीने के बीच दबाव, जकड़न या दर्द हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है। दर्द बांह, पीठ, गर्दन या जबड़े तक जा सकता है। सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, मतली या चक्कर भी हो सकते हैं। लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। सीने की परेशानी कुछ देर बाद लौटे, तब भी उसे मामूली समझकर न टालें।
ऐसे लक्षण होने पर तुरंत आपात चिकित्सा सहायता लें। घर पर बैठकर यह तय करने की कोशिश न करें कि तकलीफ गैस की है या दिल की। समय पर चिकित्सकीय जांच ही कारण स्पष्ट कर सकती है। विश्व हृदय दिवस पर सबसे उपयोगी संदेश यही है कि युवा भी अपने जोखिम कारकों को जानें, स्वस्थ आदतें अपनाएं और चेतावनी के संकेतों पर तुरंत कदम उठाएं।
