विश्व हृदय दिवस 2026: ग्वालियर के कार्डियक सेंटर में बढ़ रहे कम उम्र के मरीज
दैनिक स्वराज वाणी | ग्वालियर। हृदय संबंधी परेशानी लेकर अस्पताल पहुंचने वालों में युवाओं की संख्या भी ध्यान खींच रही है। विश्व हृदय दिवस पर ग्वालियर के जया आरोग्य अस्पताल के कार्डियक सेंटर से सामने आए आंकड़ों के अनुसार, ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले करीब 100 मरीजों में 15 से 20 मरीज 45 वर्ष से कम उम्र के होते हैं। अस्पताल से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, 20 से 30 वर्ष की उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक के मामले सामने आ रहे हैं। ये आंकड़े एक अस्पताल के मरीजों से संबंधित हैं; इन्हें प्रदेश के सभी युवाओं में हार्ट अटैक की दर नहीं माना जाना चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, करीब पांच साल पहले 30 से 45 वर्ष आयु वर्ग के मरीजों में हार्ट अटैक के मामले लगभग पांच प्रतिशत बताए जाते थे। अब यह आंकड़ा करीब 20 प्रतिशत बताया जा रहा है। वहीं, 20 से 30 वर्ष के युवाओं में ऐसे मामले तीन से चार प्रतिशत तक सामने आने की बात कही गई है। इन आंकड़ों ने कम उम्र में हृदय स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत को फिर सामने रखा है।
ओपीडी के आंकड़ों का क्या मतलब है?
कार्डियक सेंटर की ओपीडी में आने वाला हर मरीज हार्ट अटैक का मरीज नहीं होता। कोई सीने में दर्द की शिकायत लेकर आता है, तो कोई पहले से चल रहे हृदय रोग की जांच या उपचार के लिए पहुंचता है। इसलिए ओपीडी में 45 वर्ष से कम उम्र के 15 से 20 मरीज होने का अर्थ यह नहीं है कि रोजाना इतने युवाओं को हार्ट अटैक हो रहा है। इसी तरह एक अस्पताल में दिखने वाला बदलाव पूरे शहर या प्रदेश की स्थिति साबित नहीं करता।
फिर भी अस्पताल में कम उम्र के मरीजों का पहुंचना एक महत्वपूर्ण संकेत है। युवाओं में भी रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियों की जांच तथा हृदय संबंधी लक्षणों पर समय से ध्यान देना जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तंबाकू का सेवन, असंतुलित आहार, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि का अभाव और शराब का हानिकारक सेवन हृदय रोग के जोखिम से जुड़े प्रमुख कारण हैं। उच्च रक्तचाप, बढ़ी हुई रक्त शर्करा, कोलेस्ट्रॉल और मोटापा भी जोखिम बढ़ाते हैं।
इन लक्षणों को हल्के में न लें
हार्ट अटैक के दौरान सीने के बीच में दबाव, जकड़न या दर्द हो सकता है। यह परेशानी कुछ मिनट बनी रह सकती है या घटकर फिर लौट सकती है। दर्द या असहजता एक या दोनों बांहों, पीठ, गर्दन अथवा जबड़े तक महसूस हो सकती है। सांस लेने में तकलीफ सीने की परेशानी के साथ या उसके बिना भी हो सकती है। ठंडा पसीना, मतली और चक्कर आना भी संभावित संकेत हैं। सभी लोगों में लक्षण एक जैसे नहीं होते।
ऐसे लक्षण होने पर उन्हें केवल गैस, थकान या उम्र से जोड़कर टालना ठीक नहीं है। सीने में लगातार या बार-बार लौटने वाली तकलीफ और सांस फूलने पर तुरंत आपात चिकित्सा सहायता लें। जांच से ही पता चल सकता है कि परेशानी का कारण क्या है।
विश्व हृदय दिवस का संदेश युवाओं के लिए भी स्पष्ट है: नियमित शारीरिक गतिविधि करें, तंबाकू से दूर रहें, भोजन पर ध्यान दें और रक्तचाप, शुगर तथा कोलेस्ट्रॉल की जांच के बारे में चिकित्सक से सलाह लें। ग्वालियर के कार्डियक सेंटर के आंकड़े चिंता का विषय हैं, लेकिन इनका सही अर्थ समझना भी उतना ही जरूरी है, ताकि लोगों तक डर के बजाय उपयोगी जानकारी पहुंचे।
