स्टेट हाईवे-45 पर मंडरा रहा बड़े हादसे का खतरा, पावर प्लांट का बैचिंग प्लांट दे रहा दुर्घटना को न्योता
धूल से घट रही दृश्यता, बारिश में सड़क पर फैल रहा कीचड़; दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने का दावा, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
संदीप तायडे, स्वराज वाणी सारनी/घोड़ाडोंगरी
सारनी। नगर पालिका परिषद सारनी के बीच से गुजरने वाले स्टेट हाईवे-45 पर बंद पड़े बैरियर के समीप नवनिर्मित पावर प्लांट के लिए स्थापित बैचिंग प्लांट को लेकर सड़क सुरक्षा के सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर शिकायत है कि प्लांट से निर्माण सामग्री और कंक्रीट की आवाजाही के दौरान उड़ने वाली धूल तथा बारिश के समय सड़क पर बनने वाला कीचड़ वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। लोगों को आशंका है कि समय रहते सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो यहां गंभीर सड़क दुर्घटना हो सकती है।
धूल से वाहन चालकों को हो रही परेशानी
स्टेट हाईवे-45 से प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोपहिया, चारपहिया और भारी वाहन गुजरते हैं। बैचिंग प्लांट से पावर प्लांट की नई इकाई के लिए कंक्रीट और अन्य निर्माण सामग्री की सप्लाई की जा रही है।
स्थानीय वाहन चालकों का कहना है कि सामग्री के परिवहन के दौरान सड़क और आसपास के क्षेत्र में धूल फैल रही है। तेज हवा या भारी वाहनों के गुजरने पर धूल का गुबार उठने से कुछ समय के लिए सामने का रास्ता स्पष्ट दिखाई नहीं देता। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति अधिक परेशानी वाली बताई जा रही है।
बारिश होते ही सड़क पर बढ़ रही फिसलन
समस्या केवल धूल तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक हल्की बारिश होने पर सड़क पर जमा मिट्टी और धूल कीचड़ में बदल जाती है। इससे सड़क के कुछ हिस्सों में फिसलन बढ़ जाती है।
दावा किया जा रहा है कि इस स्थान पर दोपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर चुके हैं। हालांकि ऐसे हादसों की आधिकारिक संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही को देखते हुए ऐसी स्थिति गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
सड़क की नियमित सफाई की उठी मांग
निर्माण गतिविधियों के दौरान धूल नियंत्रण और सड़क सुरक्षा के पर्याप्त उपाय किए जाने की आवश्यकता होती है। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि प्लांट और सड़क के आसपास नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराया जाए तथा हाईवे पर आने वाली मिट्टी, कंक्रीट अथवा अन्य निर्माण सामग्री को तत्काल हटाया जाए।
इसके साथ ही प्लांट के प्रवेश और निकास स्थल पर स्पष्ट चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर, बैरिकेडिंग और गति नियंत्रित करने वाले संकेत लगाए जाने की मांग भी की जा रही है।
भारी वाहनों के हाईवे पर प्रवेश और निकास के दौरान यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती भी सड़क सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का सवाल है कि शहर के बीच से गुजरने वाले व्यस्त मार्ग पर निर्माण गतिविधियों के कारण यदि धूल और कीचड़ फैल रहा है तो संबंधित निर्माण एजेंसी, प्लांट प्रबंधन और सड़क की देखरेख करने वाली एजेंसी द्वारा तत्काल सुधारात्मक कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं।
लोगों ने संबंधित विभागों से स्थल निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि बैचिंग प्लांट का संचालन निर्धारित पर्यावरणीय एवं सड़क सुरक्षा मानकों के अनुसार हो रहा है या नहीं।
यदि जांच में सड़क पर निर्माण सामग्री, मिट्टी या अन्य कारणों से यातायात सुरक्षा प्रभावित होना पाया जाता है तो संबंधित एजेंसी से सड़क की तत्काल सफाई और आवश्यक सुरक्षा उपाय करवाए जाने चाहिए।
प्रदूषण को लेकर भी जताई चिंता
बैचिंग प्लांट से कथित रूप से उड़ रही धूल को लेकर आसपास के क्षेत्र में वायु प्रदूषण की चिंता भी जताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि संबंधित विभाग को स्थल पर धूल नियंत्रण के इंतजामों की जांच करनी चाहिए।
निर्माण गतिविधियों के दौरान प्रभावी डस्ट कंट्रोल, पानी का छिड़काव और सामग्री के सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी न हो।
बड़े हादसे से पहले कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन, सड़क की जिम्मेदार एजेंसी और संबंधित विभागों से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही सड़क की सफाई, धूल नियंत्रण, चेतावनी संकेतक और सुरक्षित ट्रैफिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस संबंध में पक्ष जानने के लिए एमपीआरडीसी के अधिकारी रवि नागल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर समाचार में शामिल किया जा सकेगा।
