कामिका धाम में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ
भागवत केवल श्रवण नहीं, आत्मजागरण और जीवन परिवर्तन का मार्ग : सर्वेश गुरुजी
देवास। जवाहर नगर स्थित कामिका धाम में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण में हुआ। कथा के प्रथम दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा श्रवण किया। कथा व्यास डॉ. सर्वेश्वर शर्मा (सर्वेश गुरुजी) ने श्रीमद्भागवत महात्म्य एवं कथा के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, आत्मचिंतन और आत्मजागरण का संदेश दिया।
आयोजन समिति के सदस्य गुरप्रीत ईशर, हेमंत उपाध्याय, हेमंत बिसोरे एवं अंकित सिंह ने बताया कि कथा के शुभारंभ अवसर पर व्यास पीठ की आरती मुख्य अतिथि कपालिक अखाड़ा भय्यू महाराज एवं पार्षद गणेश पटेल ने की। विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के साथ कथा प्रारंभ हुई। भगवान के जयकारों और भक्ति के वातावरण से पूरा परिसर धर्ममय हो गया।
मनुष्य को वास्तविक स्वरूप से परिचित कराती है भागवत
कथा व्यास सर्वेश गुरुजी ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा सुनने का ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित कराने वाला आत्मज्ञान का मार्ग है। भागवत मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने और अपने भीतर छिपी आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवनभर सांसारिक उपलब्धियों के पीछे दौड़ता रहता है। धन, पद, प्रतिष्ठा और भौतिक सुविधाएं जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन इन्हें ही जीवन का अंतिम उद्देश्य मान लेना उचित नहीं है। यदि मन में शांति, संतोष और ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव नहीं है तो तमाम भौतिक उपलब्धियों के बाद भी व्यक्ति स्वयं को अधूरा महसूस कर सकता है।
अपने भीतर की यात्रा सबसे महत्वपूर्ण
सर्वेश गुरुजी ने कहा कि मनुष्य की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा बाहर की नहीं, बल्कि अपने भीतर की यात्रा है। मनुष्य जब स्वयं के विचारों, कर्मों और व्यवहार का चिंतन करता है, तभी वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत होती है।
उन्होंने कहा कि अज्ञान, अहंकार, भय, क्रोध और असंतोष जैसी प्रवृत्तियां मनुष्य को आंतरिक शांति से दूर करती हैं। श्रीमद्भागवत इन प्रवृत्तियों से ऊपर उठकर प्रेम, करुणा, भक्ति और समर्पण के माध्यम से परमात्मा से जुड़ने का मार्ग बताती है।
कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक प्रसंगों को सुनना नहीं, बल्कि उनमें निहित संदेश को अपने आचरण में शामिल करना भी है।
भागवत को जीवन में उतारना जरूरी
प्रथम दिवस की कथा का प्रमुख संदेश रहा कि भागवत को केवल सुना नहीं, बल्कि जीवन में उतारा जाना चाहिए। सर्वेश गुरुजी ने कहा कि वास्तविक भक्ति वही है जो मनुष्य के विचार, व्यवहार और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए।
यदि कथा सुनने के बाद व्यक्ति अपने क्रोध, अहंकार, द्वेष और नकारात्मक विचारों को कम करने का प्रयास करता है तथा दूसरों के प्रति प्रेम, सहयोग और सद्भाव की भावना बढ़ाता है, तभी कथा श्रवण की सार्थकता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि धर्म का वास्तविक स्वरूप मनुष्य को जोड़ना, उसके भीतर सद्भाव पैदा करना और जीवन को सद्कर्मों की दिशा में आगे बढ़ाना है।
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
कथा के शुभारंभ अवसर पर कामिका धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कथा प्रारंभ होने के साथ ही पूरा परिसर भक्ति और अध्यात्म के रंग में रंग गया। श्रद्धालुओं ने शांत भाव से कथा का श्रवण किया और भगवान के जयकारों के साथ अपनी आस्था प्रकट की।
आयोजन से जुड़े सदस्यों ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक कथाओं के साथ जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया जा रहा है।
आत्मजागरण का माध्यम है श्रीमद्भागवत
सर्वेश गुरुजी ने कहा कि भागवत मनुष्य को यह समझने का अवसर देती है कि जीवन केवल सांसारिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। व्यक्ति को अपने कर्तव्य निभाते हुए ईश्वर के प्रति श्रद्धा, समाज के प्रति सेवा और दूसरों के प्रति करुणा का भाव रखना चाहिए।
कथा के प्रथम दिवस श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत महात्म्य का श्रवण कर आध्यात्मिक संदेश ग्रहण किया। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से आगामी कथा प्रसंगों में भी अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया।
कार्यक्रम की जानकारी राहुल शर्मा ने दी।
