बढ़ती महंगाई से घर का बजट बिगड़ा, सिलवानी की महिलाओं ने सरकार से मांगी राहत
बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर-गृहस्थी तक का खर्च संभालना हो रहा मुश्किल; मध्यमवर्गीय परिवारों ने जताई चिंता
संवाददाता : वैभव जैन मस्ताना
सिलवानी। रोजमर्रा की जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्च को लेकर सिलवानी के कुछ परिवारों ने बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि परिवार की आय सीमित होने के कारण घरेलू बजट संभालना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से आम और मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
महंगाई को लेकर स्थानीय स्तर पर सामने आई यह चिंता ऐसे समय में है जब अगस्त 2026 के आधिकारिक आंकड़ों में देश की खुदरा मुद्रास्फीति 4.82 प्रतिशत और खाद्य मुद्रास्फीति 5.95 प्रतिशत दर्ज की गई है। ये आंकड़े राष्ट्रीय स्तर के हैं और सिलवानी में अलग से कीमतों में वृद्धि का प्रतिशत उपलब्ध नहीं है।
बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्च को लेकर चिंता
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि परिवारों को बच्चों की शिक्षा, राशन, दैनिक उपयोग की वस्तुओं और अन्य आवश्यकताओं पर पहले की तुलना में अधिक बजट रखना पड़ रहा है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए एक साथ सभी आवश्यक खर्चों को पूरा करना कठिन हो रहा है।
महिलाओं ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई परिवारों की पहली प्राथमिकता है, लेकिन शिक्षा से जुड़े खर्च के साथ घरेलू जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक दबाव महसूस हो रहा है।
अनीता, ममता, दुर्गा देवी और विनीता कुशवाहा ने रखी बात
स्थानीय निवासी अनीता, ममता, दुर्गा देवी और विनीता कुशवाहा ने महंगाई को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। महिलाओं का कहना है कि रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों का सीधा असर घर के मासिक बजट पर पड़ रहा है।
उनका कहना है कि मध्यमवर्गीय परिवारों की आय में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं होने पर घरेलू खर्च का संतुलन बिगड़ जाता है। परिवारों को कई बार आवश्यक और गैर-आवश्यक खर्चों के बीच प्राथमिकता तय करनी पड़ती है।
त्योहार और रिश्तेदारी निभाना भी हो रहा महंगा
महिलाओं ने कहा कि महंगाई का असर केवल रसोई या बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है। त्योहारों, पारिवारिक आयोजनों और रिश्तेदारों के यहां आने-जाने पर होने वाला खर्च भी परिवार के बजट को प्रभावित करता है।
उनका कहना है कि भारतीय परिवारों में त्योहार और सामाजिक रिश्ते महत्वपूर्ण हैं, लेकिन यात्रा, उपहार, कपड़े और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बनता है।
सरकार से राहत के उपाय करने की मांग
महिलाओं ने सरकार से रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर ध्यान देने और मध्यम तथा निम्न आय वर्ग के परिवारों को राहत पहुंचाने वाले कदम उठाने की मांग की।
कुछ महिलाओं ने सरकार की आर्थिक नीतियों और निजीकरण को लेकर भी असहमति व्यक्त की। उनका आरोप है कि निजी व्यवस्थाओं के विस्तार का आर्थिक बोझ अंततः आम लोगों पर पड़ता है। हालांकि इस दावे के समर्थन में महिलाओं ने कोई विशिष्ट संस्था, सेवा या आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया।
महिलाओं ने चुनाव के दौरान किए जाने वाले महंगाई कम करने संबंधी राजनीतिक वादों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारों को ऐसे मुद्दों पर जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिक के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय उसकी आय के मुकाबले रोजमर्रा का खर्च है।
बेरोजगार युवाओं को लेकर भी जताई चिंता
स्थानीय लोगों ने युवाओं के रोजगार का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि बेरोजगार या सीमित आय वाले युवाओं के लिए बढ़ते खर्चों का सामना करना अधिक कठिन हो जाता है।
उन्होंने रोजगार के अवसर बढ़ाने और युवाओं को स्थायी आय के साधन उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जाने की मांग की।
अगस्त में खाद्य महंगाई 5.95 प्रतिशत
केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के 14 सितंबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में देश की सालाना खुदरा मुद्रास्फीति 4.82 प्रतिशत रही। जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी। वहीं अगस्त में खाद्य मुद्रास्फीति 5.95 प्रतिशत दर्ज की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा मुद्रास्फीति 5.23 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 4.31 प्रतिशत रही।
इन राष्ट्रीय आंकड़ों के बीच सिलवानी की महिलाओं ने सरकार से घरेलू बजट पर पड़ रहे दबाव को ध्यान में रखते हुए आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर राहतकारी कदम उठाने की मांग की है।
