परमात्मा को साथी बनाकर समस्याओं का समाधान संभव: ब्रह्माकुमारी वीणा दीदी
Indore , 28 सितंबर। वर्तमान जीवन में मनुष्य अनेक तरह की चिंताओं, उलझनों और चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे में यदि मन को शांत रखते हुए परमात्मा को अपना साथी बनाकर उनसे संवाद करना सीखा जाए तो समस्याओं के समाधान की दिशा मिल सकती है। यह विचार हुबली से पधारीं गीता ज्ञान विशेषज्ञ एवं प्रेरक वक्ता ब्रह्माकुमारी वीणा दीदी ने चार दिवसीय शिविर के दूसरे सत्र में ‘सांसारिक चिंताओं का आध्यात्मिक समाधान’ विषय पर व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि गीता संवाद का शास्त्र है, जिसमें श्रीकृष्ण, अर्जुन, संजय और धृतराष्ट्र जैसे पात्र हैं। गीता के प्रथम अध्याय में अर्जुन अपने सामने खड़ी परिस्थितियों को लेकर तनाव और उलझन में थे। उनके सामने अनेक सांसारिक समस्याएं थीं, लेकिन गीता का ज्ञान सुनते-सुनते उनकी चिंताओं का समाधान हुआ और वे संतुष्ट होकर अपने कर्तव्य के लिए तैयार हुए।
हर समस्या के साथ समाधान भी मौजूद
ब्रह्माकुमारी वीणा दीदी ने कहा कि गीता का ज्ञान केवल अर्जुन के लिए नहीं है, बल्कि आज का हर मनुष्य भी अपने जीवन की परिस्थितियों में अर्जुन के समान अनेक प्रश्नों और चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि जहां समस्या है, वहां समाधान भी मौजूद है। इसे समझाते हुए उन्होंने ताले और चाबी का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि समस्याओं का स्थायी समाधान केवल बाहरी प्रयासों से नहीं मिल सकता। इसके लिए मन को शांत रखना और भीतर की स्थिति को समझना जरूरी है। परमपिता परमात्मा को अपना साथी मानकर उनसे संवाद करने की आदत विकसित की जाए तो जीवन की समस्याओं से निपटने की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

देह के अभिमान से ऊपर उठने का संदेश
उन्होंने मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह मंदिर में प्रवेश करते समय व्यक्ति अपने कीमती जूते-चप्पल बाहर उतार देता है, उसी प्रकार परमात्मा से संबंध जोड़ने के लिए शरीर रूपी जूते को छोड़ना होगा। इसका अर्थ नश्वर देह के अभिमान से ऊपर उठकर स्वयं को आत्मा के रूप में पहचानना है।
उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रवेश करते समय ओम का उच्चारण भी इसी आंतरिक स्मृति से जुड़ा है। आत्मिक चेतना के साथ परमात्मा से संबंध स्थापित करने से मन को शांति और स्थिरता प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है।
बुजुर्गों से दूर होने पर संस्कारों पर असर
ब्रह्माकुमारी वीणा दीदी ने अपने जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि बचपन में उन्होंने अपने दादा-दादी को गीता का पाठ करते देखा और उन्हीं से श्लोक बोलना सीखा। इससे उनके भीतर गीता के प्रति रुचि विकसित हुई।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में परिवारों में बुजुर्गों के साथ संवाद और समय कम होता जा रहा है। इसका असर संस्कारों और संस्कृति से जुड़ाव पर भी पड़ सकता है। उन्होंने बुजुर्गों को परिवार का मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उनके अनुभव जीवन की कई समस्याओं को समझने में मदद कर सकते हैं।
30 सितंबर से सात दिवसीय राजयोग अनुभूति शिविर
क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने बताया कि ब्रह्माकुमारी संस्थान में मेडिटेशन के माध्यम से स्वयं और परमात्मा के साथ संबंध स्थापित करने तथा आंतरिक संवाद का अभ्यास कराया जाता है।
उन्होंने बताया कि चार दिवसीय शिविर के बाद 30 सितंबर से ज्ञानशिखर में सात दिवसीय राजयोग अनुभूति शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर का समय सुबह 7 से 8:30 बजे और शाम 7 से 8:30 बजे तक रहेगा। इच्छुक लोग किसी एक सत्र में शामिल हो सकते हैं।
कार्यक्रम की जानकारी ब्रह्माकुमारी अनीता की ओर से दी गई। आयोजन ज्ञानशिखर, ओमशांति भवन, इंदौर में किया जा रहा है।
