भोपाल फर्जी IAS प्रकरण में नया मोड़: पहले शिकायतकर्ता रहे रोहित लिल्हारे भी आरोपी, कॉल डिटेल और लेनदेन की जांच
दैनिक स्वराज वाणी | भोपाल
भोपाल में कथित तौर पर आईएएस अधिकारी बनकर नौकरी और होटल-रिसॉर्ट की लीज दिलाने के नाम पर ठगी के मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस ने अयोध्या नगर थाना प्रभारी महेश लिल्हारे के भाई रोहित लिल्हारे से पूछताछ के बाद उन्हें भी एक प्रकरण में आरोपी बनाया है। रोहित ने पहले तृप्ति सिंह के खिलाफ ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। अब पुलिस यह जांच रही है कि नौकरी दिलाने का भरोसा देने के मामले में उनकी क्या भूमिका थी। किसी व्यक्ति को आरोपी बनाया जाना आरोप सिद्ध होना नहीं है।
कॉल डिटेल से रोहित की भूमिका की जांच
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने मोबाइल नंबर और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच के बाद रोहित लिल्हारे से पूछताछ की। पुलिस का आरोप है कि तृप्ति सिंह के कहने पर रोहित ने एक युवती से फोन पर बात की थी और उसे नौकरी मिलने तथा जॉइनिंग से जुड़ी प्रक्रिया का भरोसा दिलाया था। बागसेवनिया पुलिस ने इस मामले में रोहित को आरोपी बनाया है। अब संबंधित फोन कॉल, दोनों के आपसी संपर्क और कथित लेनदेन की जांच की जा रही है।
जांच का एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि युवती से हुई बातचीत में किसने क्या कहा था और नौकरी से जुड़े दावे किस आधार पर किए गए थे। पुलिस मोबाइल रिकॉर्ड के साथ अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को मिलाकर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य परखे जाने के बाद ही किसी की जिम्मेदारी तय होगी।
शिकायतकर्ता से आरोपी बनने तक
इस मामले का एक पहलू यह है कि रोहित लिल्हारे ने स्वयं तृप्ति सिंह के खिलाफ पहले शिकायत की थी। उनकी शिकायत होटल-रिसॉर्ट की लीज दिलाने के नाम पर कथित ठगी से जुड़ी बताई गई है। इसके बाद नौकरी दिलाने की शिकायत की जांच में रोहित का मोबाइल नंबर और युवती से कथित बातचीत सामने आने की जानकारी प्रकाशित हुई। उसी आधार पर पुलिस ने उनकी भूमिका की जांच आगे बढ़ाई।
पहले दर्ज कराई गई शिकायत और बाद में आरोपी बनाए जाने का मामला अलग-अलग आरोपों तथा घटनाक्रमों से जुड़ा है। रोहित ने तृप्ति को रकम दी थी या नहीं, वह रकम किस प्रयोजन से दी गई थी और युवती से बातचीत में उनकी भूमिका क्या थी, इन प्रश्नों के जवाब जांच के दस्तावेजों से स्पष्ट होने बाकी हैं।
युवती से नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने का आरोप
प्रकरण में एक युवती ने तृप्ति सिंह पर नौकरी दिलाने का भरोसा देकर रकम लेने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, तृप्ति ने स्वयं को प्रभावशाली पद पर बताकर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कराने की बात कही थी। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस दावे को विश्वसनीय बनाने के लिए किन लोगों से युवती की बात कराई गई और किस मोबाइल नंबर का उपयोग हुआ।
इस संबंध में प्रकाशित रिपोर्टों में कथित रकम का विवरण एक जैसा नहीं है। इसलिए युवती से ली गई राशि और उसके भुगतान की स्थिति को जांच से पहले निश्चित मानना उचित नहीं होगा। बैंक खातों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल से यह स्पष्ट हो सकता है कि पैसा किसे मिला और किस माध्यम से भेजा गया।
विधानसभा परिसर के वीडियो भी जांच के दायरे में
पुलिस जांच से जुड़ी रिपोर्टों में विधानसभा परिसर में युवतियों के साथ बनाए गए वीडियो का भी उल्लेख है। जानकारी के अनुसार, इन वीडियो को नौकरी लगने के दावे से जोड़कर दिखाया गया था। पुलिस इनके बनने, भेजे जाने और इस्तेमाल किए जाने की परिस्थितियों की जांच कर रही है। किसी परिसर में वीडियो बनाया जाना अपने आप में सरकारी नियुक्ति या प्रशासनिक मंजूरी का प्रमाण नहीं है।
जांचकर्ताओं के लिए यह जानना भी जरूरी होगा कि वीडियो किसने बनाए, किसे भेजे और उन्हें देखकर संबंधित युवतियों से क्या कहा गया। इन सवालों पर पुष्ट जानकारी सामने आने से कथित ठगी के तरीके की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
कथित 40 लाख रुपये के लेनदेन पर सवाल
रिपोर्टों के मुताबिक, रोहित ने तृप्ति सिंह को करीब 40 लाख रुपये देने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस रकम का पूरा हिसाब और उसके भुगतान का कारण जांच का विषय है। पुलिस बैंक खातों तथा अन्य रिकॉर्ड से लेनदेन की पुष्टि करने में जुटी है। रकम का उल्लेख भर किसी व्यक्ति की कथित धोखाधड़ी में भूमिका सिद्ध नहीं करता।
तृप्ति सिंह और अन्य लोगों पर लगे आरोपों से जुड़े अलग-अलग प्रकरणों में कौन-सा भुगतान किस शिकायत का हिस्सा है, यह स्पष्ट करना भी आवश्यक होगा। जांच के निष्कर्ष के बिना विभिन्न राशियों को जोड़कर एक निश्चित कुल ठगी राशि बताना भ्रामक हो सकता है।
आगे क्या जांच रही है पुलिस?
पुलिस का ध्यान फिलहाल कॉल डिटेल, मोबाइल संपर्क, युवतियों से हुई बातचीत और बैंक खातों के लेनदेन पर है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रकरण में तृप्ति सिंह के अलावा अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। रोहित के आरोपी बनाए जाने के बाद संबंधित मामले में आरोपियों की संख्या पांच बताई गई है।
फिलहाल यह पुलिस की जांच और शिकायतों में लगाए गए आरोपों का मामला है। रोहित लिल्हारे समेत प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी। पुलिस की आगे की कार्रवाई तथा आरोपियों के पक्ष सामने आने के बाद प्रकरण की पूरी स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
