कच्ची सड़क से परेशान पोहर के ग्रामीणों ने फिर किया धरना प्रदर्शन
पोहर से वायगांव तक पक्की सड़क की मांग, तीन माह में निर्माण शुरू नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रभात पट्टन। लंबे समय से कच्ची सड़क की समस्या से परेशान पोहर गांव के ग्रामीणों ने एक बार फिर सड़क निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। रविवार को जन आंदोलन मंच के माध्यम से ग्राम के हनुमान मंदिर परिसर में एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया गया। ग्रामीणों ने पोहर से वायगांव तक पक्की सड़क बनाने की मांग को प्रमुखता से उठाया। ग्रामीणों ने मंच से घोषणा करते हुए कहा कि यदि तीन माह के भीतर सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं की जाती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि पोहर से वायगांव तक का मार्ग उनके लिए आवागमन का प्रमुख साधन है। कच्ची सड़क होने के कारण ग्रामीणों को पूरे वर्ष परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन बारिश के मौसम में स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। सड़क पर जगह-जगह कीचड़ और दलदल बन जाने से पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। दोपहिया और अन्य वाहनों से आवागमन भी जोखिम भरा हो जाता है।
पहले भी किया था चक्काजाम और चुनाव बहिष्कार
ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण की मांग को लेकर वे पहले भी कई बार आंदोलन कर चुके हैं। जनवरी 2026 में वायगांव के मुख्य मार्ग पर ग्रामीणों ने चक्काजाम कर धरना प्रदर्शन किया था। इसके साथ ही चुनाव बहिष्कार जैसे कदम उठाने की चेतावनी भी दी गई थी। उस दौरान ग्रामीणों को सड़क निर्माण का आश्वासन दिया गया था।
ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन मिलने के बावजूद कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन सड़क निर्माण को लेकर धरातल पर कोई ठोस प्रक्रिया दिखाई नहीं दे रही है। इसी कारण ग्रामीणों को दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उनका कहना है कि जब तक पक्की सड़क का निर्माण शुरू नहीं होता, तब तक समस्या बनी रहेगी।
महिला, बच्चे और बुजुर्ग भी धरने में शामिल
रविवार को आयोजित धरना प्रदर्शन की शुरुआत भारत माता के पूजन के साथ की गई। इसके बाद ग्रामीण हनुमान मंदिर परिसर में एकत्र हुए। धरने में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक ग्रामीणों ने धरना देकर पोहर से वायगांव तक पक्की सड़क निर्माण की मांग उठाई।
ग्रामीणों ने कहा कि सड़क की खराब स्थिति का सबसे अधिक असर स्कूली विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। बारिश के दिनों में विद्यार्थियों को कीचड़ और दलदल से होकर स्कूल जाना पड़ता है। कई बार वाहन भी रास्ते में फंस जाते हैं। ग्रामीणों ने मांग की कि सड़क निर्माण को प्राथमिकता के साथ कराया जाए, ताकि गांव के लोगों और विद्यार्थियों को राहत मिल सके।

धरना स्थल पर नहीं पहुंचे अधिकारी और जनप्रतिनिधि
धरना प्रदर्शन की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले ही दे दी गई थी। इसके बावजूद मौके पर कोई विभागीय अधिकारी या जनप्रतिनिधि ग्रामीणों से चर्चा करने नहीं पहुंचा। हालांकि, किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने और शांति व्यवस्था कायम रहे, इसके लिए पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।
ग्रामीणों ने बताया कि मासोद, मुलताई और आठनेर क्षेत्र की पुलिस धरना स्थल पर तैनात रही। ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखी और प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद जताई।
बारिश में दलदल बन जाता है पूरा मार्ग
पोहर-वायगांव मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने बताया कि सामान्य दिनों में भी कच्चे रास्ते पर धूल और गड्ढों के कारण परेशानी होती है। बारिश शुरू होते ही स्थिति गंभीर हो जाती है। सड़क पर पानी जमा होने के साथ ही कीचड़ और दलदल बन जाता है। इससे पैदल चलने वाले लोगों के साथ-साथ बाइक और अन्य वाहनों को भी काफी परेशानी होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला यह रास्ता पक्का होने से विद्यार्थियों, किसानों, मजदूरों और आम ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी। सड़क बनने से आसपास के गांवों तक आवागमन भी सुगम हो सकेगा।
विधायक ने दिया सड़क निर्माण का भरोसा
इधर विधायक चंद्रशेखर देशमुख ने वीडियो जारी कर ग्रामीणों को सड़क निर्माण को लेकर भरोसा दिलाया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की मंजरा टोला योजना के अंतर्गत क्षेत्र की 20 किलोमीटर सड़क को शामिल किया गया है। योजना के दूसरे चरण में 10 किलोमीटर सड़क का निर्माण प्रस्तावित है, जिसमें वायगांव से पोहर तक का मार्ग भी शामिल बताया गया है।
विधायक ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि पोहर से वायगांव तक सड़क निर्माण का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। अब ग्रामीणों का कहना है कि वे आश्वासन के बजाय सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि सड़क निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू कर उन्हें वर्षों पुरानी समस्या से राहत दिलाई जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन को आगे बढ़ाने पर मजबूर होंगे।
