बंदर और जंगली सूअर बर्बाद कर रहे मक्के की फसल, प्रभात पट्टन के किसानों ने मांगी सुरक्षा
दैनिक स्वराज वाणी | बैतूल
प्रभात पट्टन। खेतों में तैयार हो रही मक्के की फसल बचाने के लिए प्रभात पट्टन ब्लॉक के कई गांवों के किसानों को दिन और रात निगरानी करनी पड़ रही है। किसानों के अनुसार, दिन में बंदरों के झुंड और रात में जंगली सूअर खेतों में पहुंचकर फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। मासोद, सिरडी, वायगांव, साइखेड़ा खुर्द, सांवगी और दतोरा सहित आसपास के गांवों के किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से समस्या का समाधान करने की मांग की है।
दिन में बंदर, रात में सूअर पहुंच रहे खेतों तक
ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों और सूअरों की गतिविधियां अब गांव के किनारे स्थित खेतों तक बढ़ गई हैं। इससे किसानों को अपनी फसल की रखवाली के लिए बार-बार खेतों में जाना पड़ता है। दिन में बंदरों से फसल बचाने की चिंता रहती है, जबकि रात में सूअरों के झुंड आने का डर बना रहता है। किसानों के मुताबिक, इस स्थिति में खेतों की निगरानी करना भी कठिन हो गया है।
किसानों ने बताया कि सबसे अधिक शिकायत मक्के की फसल को लेकर है। खेतों में घुसने वाले जानवर पौधों और भुट्टों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। फसल पर हुए नुकसान का पूरा आकलन अभी सामने नहीं आया है, लेकिन प्रभावित किसानों का कहना है कि लगातार ऐसी घटनाओं से उनकी मेहनत और खेती में लगाई रकम दोनों पर असर पड़ रहा है।
मासोद के किसानों ने बताई परेशानी
मासोद के मनोहर कडू, उत्तम खाड़े, साहेबराव देशमुख, गुलाब धोटे, गुलाब सिंह ठाकुर, पूरन ठाकुर, श्रीराम साहू, राजेंद्र सोनी, दिलीप दियावार, नामदेव सिमैया और बंटू ठाकुर सहित अन्य किसानों ने मक्के की फसल को नुकसान पहुंचने की बात कही है। उनका दावा है कि क्षेत्र के सैकड़ों किसान इस समस्या से प्रभावित हैं।
किसानों के अनुसार, फसल खराब होने पर वे हर वर्ष संबंधित विभाग में आवेदन देते हैं, लेकिन उन्हें समस्या रोकने के लिए ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही। उनका कहना है कि नुकसान की शिकायत दर्ज कराने के बाद भी अगले मौसम में फिर वही स्थिति बन जाती है। किसानों ने मांग की है कि विभाग प्रभावित खेतों का निरीक्षण करे और प्राप्त आवेदनों पर की गई कार्रवाई की जानकारी दे।
सड़क पर भी खतरे की शिकायत
ग्रामीणों ने खेतों के अलावा सड़कों पर जंगली सूअरों के अचानक आने को भी चिंता का कारण बताया। उनके अनुसार, कुछ दिन पहले आस्टा के पास मुख्य मार्ग पर रात के समय सूअरों का झुंड सामने आ गया था। इसी दौरान वाहन चालक आशीष बर्डे दुर्घटनाग्रस्त होकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
ग्रामीणों का कहना है कि रात में वाहन चालकों को सड़क पर अचानक जानवर दिखाई देने से संभलने का समय कम मिल सकता है। उन्होंने प्रशासन से आस्टा के आसपास के मार्ग और प्रभावित गांवों में स्थिति का जायजा लेने की मांग की है, ताकि खेतों के साथ आम लोगों की आवाजाही की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा सके।
वन विभाग से सुरक्षित उपाय अपनाने की मांग
किसानों ने वन विभाग और प्रशासन से आग्रह किया है कि प्रभावित गांवों का सर्वे कर फसल नुकसान की स्थिति देखी जाए। उनका कहना है कि बंदरों और जंगली सूअरों को खेतों से दूर रखने के लिए प्रभावी और सुरक्षित उपाय किए जाने चाहिए। ग्रामीणों ने समस्या पैदा कर रहे वन्यजीवों को पकड़कर उचित वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने की मांग भी रखी है।
किसानों के अनुसार, तत्काल कार्रवाई से उन्हें फसल की रखवाली में राहत मिल सकती है और सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं का खतरा भी कम किया जा सकता है। फिलहाल प्रभावित ग्रामीण विभागीय कदमों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
