थार की माटी का बढ़ा मान, भीनमाल के डॉ. घनश्याम व्यास को राष्ट्रीय नवाचार शोध अवार्ड-2026
भीनमाल (मुकेश सोलंकी)। मारवाड़ की धरती पर शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय शिक्षक डॉ. घनश्याम कुमार व्यास का चयन राष्ट्रीय नवाचार शोध अवार्ड-2026 के लिए हुआ है। महाकवि माघ की जन्मभूमि भीनमाल निवासी डॉ. व्यास को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित होने वाले दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में यह सम्मान प्रदान किया जाएगा।
26 और 27 सितंबर को कुरुक्षेत्र में आयोजित सम्मेलन में देश के 26 राज्यों से चयनित 200 नवाचारियों के बीच डॉ. व्यास को सम्मानित किए जाने की जानकारी दी गई है। डॉ. व्यास वर्तमान में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, वडली नाडी, नवापुरा चौपावतन में प्रबोधक शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
निजी विद्यालयों से शुरू किया शिक्षा सेवा का सफर
डॉ. घनश्याम व्यास ने वर्ष 1997 से 2008 तक करीब 11 वर्षों तक निजी विद्यालयों में शिक्षा सेवा दी। वर्ष 2010 में राजकीय सेवा में आने के बाद उन्होंने बैतराना, भादरड़ा और वडली नाडी जैसी दूरस्थ ढाणियों में स्थित सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए काम किया।
जनसहभागिता और भामाशाहों के सहयोग से विद्यालयों में विभिन्न सुविधाएं विकसित की गईं। वडली नाडी के विद्यालय परिसर में सीसीटीवी कैमरे, आरओ आधारित पेयजल सुविधा, पक्षियों के लिए परिंडे और जीव-दया से जुड़ी गतिविधियों जैसी व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों पर जोर
डॉ. व्यास का कहना है कि उनका उद्देश्य शिक्षा को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने के साथ विद्यार्थियों में संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। वे “एक सबके लिए, सब एक के लिए” और “36 कौम का सर्वांगीण विकास” को अपने कार्य का मूलमंत्र बताते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जालोर जिले में उनके कार्यों को लेकर जिला प्रशासन की ओर से उन्हें दो बार सम्मानित अथवा अनुशंसित किया गया है। सामग्री के अनुसार, भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से भी उनके नाम की पद्म पुरस्कार के लिए अनुशंसा किए जाने का दावा किया गया है।
महाकवि माघ की विरासत को लेकर भी सक्रिय
डॉ. व्यास अखिल भारतीय महाकवि माघ विकास संस्थान के संयोजक के रूप में भी सक्रिय हैं। संस्थान के माध्यम से भीनमाल की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और महाकवि माघ से जुड़े इतिहास को सामने लाने के प्रयास किए गए हैं।
राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर के सहयोग से भीनमाल में राष्ट्रीय संगोष्ठियों के आयोजन का भी उल्लेख किया गया है। इन गतिविधियों का उद्देश्य भीनमाल की सांस्कृतिक और साहित्यिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाना रहा है।
‘विधिक साक्षरता तीर्थ’ के रूप में विकसित करने का प्रयास
राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड के स्थानीय संघ भीनमाल में सचिव के रूप में डॉ. व्यास ने क्षेमकरी माताजी की पहाड़ी की तलहटी में विधिक जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया। यहां न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों की सहभागिता से बच्चों को जीवन-कौशल और नागरिक जागरूकता से संबंधित जानकारी देने के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ पुस्तक लेखन और जनजागरण गतिविधियों में भी सहभागिता की है। इसके अलावा विप्र फाउंडेशन, श्रीमाली समाज और भारत विकास परिषद से जुड़कर सामाजिक एवं राष्ट्रसेवा गतिविधियों में सक्रिय रहने की जानकारी दी गई है।
पहले भी मिल चुके हैं विभिन्न सम्मान
डॉ. घनश्याम कुमार व्यास को शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में कार्य के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मान मिलने का भी उल्लेख है। इनमें केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से विज्ञान भवन, नई दिल्ली में मिला राष्ट्रीय पुरस्कार, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के आदर्श शिक्षक सम्मान तथा भारत स्काउट एवं गाइड का ‘फेलोशिप राष्ट्रीय गोल्ड मेडल’ शामिल बताया गया है।
राष्ट्रीय नवाचार शोध अवार्ड-2026 के लिए चयन पर डॉ. व्यास ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका या किसी एक शिक्षक का नहीं है, बल्कि भीनमाल की 36 कौम, महाकवि माघ की पावन धरा और उन सभी विद्यार्थियों का सम्मान है, जिन्होंने शिक्षा और संस्कारों को अपनाया है।
