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केंद्र ने 2026-27 के बाजार उधारी अनुमान में ₹1.20 लाख करोड़ की कटौती की, दूसरी छमाही में ₹7.86 लाख करोड़ जुटाएगी सरकार

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Published On: 26 September 2026
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केंद्र ने 2026-27 के बाजार उधारी अनुमान में ₹1.20 लाख करोड़ की कटौती की, दूसरी छमाही में ₹7.86 लाख करोड़ जुटाएगी सरकार

दैनिक स्वराज वाणी | नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बाजार से उधारी का अनुमान घटा दिया है। केंद्रीय बजट में सरकारी बॉन्ड के जरिये ₹17,20,000 करोड़ जुटाने का अनुमान था। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी संशोधित योजना के अनुसार, अब पूरे वित्त वर्ष में ₹15,99,506 करोड़ की बाजार उधारी अपेक्षित है। दोनों आंकड़ों में ₹1,20,494 करोड़, यानी करीब ₹1.20 लाख करोड़ का अंतर है। यह बदलाव सरकार की सकल बाजार उधारी योजना से जुड़ा है। इसे देश का कुल सरकारी कर्ज उतनी राशि घट जाने के रूप में नहीं समझना चाहिए।

अक्टूबर से मार्च तक ₹7.86 लाख करोड़ की योजना

वित्त मंत्रालय ने भारतीय रिजर्व बैंक से परामर्श के बाद तय किया है कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही, यानी अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच सरकार ₹7,86,000 करोड़ उधार लेगी। इसमें ₹15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड भी शामिल हैं। पूरी राशि जुटाने के लिए 23 साप्ताहिक नीलामियों की योजना बनाई गई है। नीलामी में अलग-अलग अवधि की सरकारी प्रतिभूतियां जारी होंगी।

सरकार जब बाजार से उधार लेती है, तो वह निर्धारित अवधि के बॉन्ड या प्रतिभूतियां जारी करती है। निवेशक इन्हें खरीदते हैं और सरकार तय शर्तों के अनुसार ब्याज तथा परिपक्वता पर मूल रकम का भुगतान करती है। इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 वर्ष की अवधि वाली प्रतिभूतियां जारी करने का कार्यक्रम है। इससे उधारी को अलग-अलग समयावधि में बांटने में मदद मिलती है।

ग्रीन बॉन्ड पर भी सरकार का जोर

दूसरी छमाही की ₹7.86 लाख करोड़ की योजना में ₹15,000 करोड़ सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड से जुटाए जाएंगे। ग्रीन बॉन्ड भी सरकारी प्रतिभूति का एक प्रकार हैं। वित्त मंत्रालय ने इन्हें कुल उधारी कार्यक्रम के हिस्से के रूप में शामिल किया है। इसलिए ₹15,000 करोड़ को घोषित ₹7.86 लाख करोड़ के अतिरिक्त नहीं जोड़ना चाहिए।

नीलामी कार्यक्रम में 10 वर्ष की अवधि वाली प्रतिभूतियों की हिस्सेदारी 26.3 प्रतिशत और 15 वर्ष वाली प्रतिभूतियों की हिस्सेदारी 17.6 प्रतिशत रखी गई है। अन्य अवधि के बॉन्ड भी कार्यक्रम में शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा है कि सरकार पहले जारी बॉन्ड की अदायगी का कार्यक्रम संतुलित रखने के लिए प्रतिभूतियों की अदला-बदली या पुनर्खरीद जारी रख सकती है।

ट्रेजरी बिल का कार्यक्रम अलग

वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के लिए सरकार ने ट्रेजरी बिल जारी करने की योजना भी बताई है। अक्टूबर से दिसंबर के बीच 13 नीलामी सप्ताहों में प्रति सप्ताह ₹23,000 करोड़ के ट्रेजरी बिल जारी किए जाने की संभावना है। इनमें 91 दिन और 182 दिन की अवधि के बिल ₹8,000-₹8,000 करोड़ तथा 364 दिन की अवधि के बिल ₹7,000 करोड़ प्रति सप्ताह होंगे। ट्रेजरी बिल अल्पकालिक उधारी के साधन हैं; इन्हें पूरे वर्ष की डेटेड सिक्योरिटीज वाली ₹15,99,506 करोड़ की राशि के साथ एक ही मद समझकर नहीं जोड़ना चाहिए।

आम लोगों और बाजार के लिए इसका क्या अर्थ है?

बाजार उधारी का कैलेंडर निवेशकों को बताता है कि सरकार कितनी राशि और किन अवधियों के बॉन्ड जारी करने की योजना बना रही है। इससे बैंक, बीमा कंपनियां और दूसरे निवेशक अपनी खरीद की योजना बना सकते हैं। बजट अनुमान से कम उधारी की घोषणा बॉन्ड बाजार के लिए महत्वपूर्ण सूचना है, लेकिन केवल इस घोषणा से ब्याज दरों या आम लोगों के कर्ज की किस्तों में बदलाव तय नहीं हो जाता। वे कई अन्य आर्थिक और मौद्रिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करते हैं।

वित्त मंत्रालय की सूचना के अनुसार, दूसरी छमाही में सरकारी खातों में अस्थायी नकदी की कमी से निपटने के लिए रिजर्व बैंक ने वेज एंड मीन्स एडवांस की सीमा ₹50,000 करोड़ तय की है। कुल मिलाकर सरकार ने 2026-27 के बाजार उधारी अनुमान को बजट से नीचे रखा है; वास्तविक उधारी की स्थिति आगामी नीलामियों और वित्त वर्ष के अंत के आंकड़ों से स्पष्ट होगी।

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