Bhopal Master Plan: नए ड्राफ्ट से रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों को लेकर स्थिति होगी साफ
Bhopal । राजधानी भोपाल में रेसिडेंशियल और कमर्शियल उपयोग को लेकर चल रहे विवाद के बीच व्यापारियों और संपत्ति मालिकों के लिए नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश सरकार अगले कुछ दिनों में भोपाल के नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इसे जल्द सार्वजनिक किए जाने की संभावना है।
नए मास्टर प्लान में सड़क की चौड़ाई के आधार पर रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर अलग-अलग प्रावधान किए जाने की बात सामने आ रही है। इसका उद्देश्य आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के बीच स्पष्ट नियम तय करना बताया जा रहा है।
हालांकि, अंतिम नियम क्या होंगे और किन क्षेत्रों में किस तरह की गतिविधियों की अनुमति मिलेगी, यह आधिकारिक रूप से ड्राफ्ट के प्रकाशन के बाद ही स्पष्ट होगा।
सड़क की चौड़ाई के आधार पर तय हो सकती हैं गतिविधियां
प्रस्तावित व्यवस्था में सड़क की चौड़ाई को कमर्शियल गतिविधियों की अनुमति से जोड़ने की बात कही जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 12 से 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर सीमित व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति का प्रावधान हो सकता है। ऐसे क्षेत्रों में आवासीय उपयोग के साथ कुछ सीमित कारोबारी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति मिल सकती है।
वहीं 24 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों पर व्यापक कमर्शियल गतिविधियों की अनुमति दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके तहत कुछ स्थानों पर आवासीय बंगले और शोरूम जैसे अलग-अलग उपयोग एक ही क्षेत्र में संभव हो सकते हैं।
हालांकि, इन प्रावधानों की अंतिम स्थिति मास्टर प्लान के आधिकारिक ड्राफ्ट में सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
कॉलोनी के अंदर की सड़कों के लिए अलग नियम
मास्टर प्लान में मुख्य सड़कों और कॉलोनियों के अंदर की सड़कों के बीच भी अंतर किए जाने की बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार कॉलोनी या पूरी तरह आवासीय क्षेत्र के अंदर व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिबंध जारी रह सकता है।
इसका मतलब यह होगा कि केवल किसी सड़क की चौड़ाई के आधार पर हर रिहायशी क्षेत्र में कमर्शियल गतिविधियों की अनुमति नहीं मिलेगी। मुख्य सड़क से जुड़े हिस्सों और अंदरूनी आवासीय क्षेत्रों के लिए अलग-अलग नियम लागू किए जा सकते हैं।
ऐसे प्रावधान का उद्देश्य रिहायशी क्षेत्रों में अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों, ट्रैफिक और अन्य शहरी समस्याओं को नियंत्रित करना हो सकता है।
24 मीटर से ज्यादा चौड़ी सड़कों पर FAR का प्रावधान
प्रस्तावित नियमों में 24 मीटर या इससे अधिक चौड़ी सड़कों को लेकर अतिरिक्त निर्माण अधिकारों की व्यवस्था की चर्चा भी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में अतिरिक्त FAR खरीदकर अधिक निर्माण या हाईराइज निर्माण की अनुमति दिए जाने का प्रावधान हो सकता है।
FAR यानी Floor Area Ratio के माध्यम से किसी प्लॉट पर कुल कितने क्षेत्रफल में निर्माण किया जा सकता है, यह निर्धारित किया जाता है। यदि नए मास्टर प्लान में अतिरिक्त FAR की अनुमति दी जाती है, तो संबंधित सड़क और क्षेत्र की पात्रता के अनुसार संपत्ति मालिक अधिक निर्माण कर सकेंगे।
हालांकि, निर्माण की ऊंचाई, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा, सड़क की क्षमता और अन्य तकनीकी शर्तें भी लागू रह सकती हैं। इन सभी पहलुओं की विस्तृत जानकारी आधिकारिक ड्राफ्ट और संबंधित बिल्डिंग बायलॉज में सामने आएगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ड्राफ्ट प्रकाशन पर नजर
भोपाल में रिहायशी और व्यावसायिक उपयोग को लेकर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट की हालिया सुनवाई भी महत्वपूर्ण रही है। 22 सितंबर को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट के आदेश में मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को प्रकाशित करने की अनुमति दिए जाने का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि नया मास्टर प्लान लागू होते ही पुराने निर्माण या वर्तमान में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां स्वतः वैध हो जाएंगी।
अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि किसी निर्माण या उपयोग की वैधता की जांच मौजूदा मास्टर प्लान और लागू बिल्डिंग बायलॉज के आधार पर की जाएगी। इसलिए नया ड्राफ्ट प्रकाशित होने तक मौजूदा नियमों के उल्लंघन को केवल प्रस्तावित भविष्य के प्रावधानों के आधार पर वैध नहीं माना जा सकता।
आवासीय क्षेत्रों में कारोबार पर कार्रवाई जारी रह सकती है
मौजूदा व्यवस्था के तहत जिन क्षेत्रों को विशेष रूप से आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित किया गया है, वहां व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर प्रशासन की कार्रवाई जारी रह सकती है।
कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक यदि निर्धारित आवासीय क्षेत्र में नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित पाई जाती हैं तो प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसे परिसरों को पहले सील किए जाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
इससे व्यापारियों और संपत्ति मालिकों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि नए मास्टर प्लान में किन क्षेत्रों को किस श्रेणी में रखा जाएगा और पहले से संचालित गतिविधियों को लेकर क्या व्यवस्था होगी।
सीलिंग कार्रवाई में भेदभाव पर भी उठे थे सवाल
भोपाल में कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ हुई सीलिंग कार्रवाई को लेकर भी पहले सवाल उठ चुके हैं। सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी की ओर से अदालत के सामने यह मुद्दा रखा गया था कि कुछ परिसरों को सील करने के कुछ समय बाद दोबारा खोल दिया गया, जबकि संबंधित मामलों में औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने की स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
इस पर कोर्ट ने कार्रवाई में समानता और पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया। यानी नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई चयनात्मक तरीके से नहीं, बल्कि समान मानदंडों के आधार पर किए जाने की अपेक्षा जताई गई।
व्यापारियों को नए ड्राफ्ट से उम्मीद
नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को लेकर व्यापारियों और संपत्ति मालिकों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर है। यदि प्रस्तावित व्यवस्था सड़क की चौड़ाई और क्षेत्र के उपयोग के आधार पर स्पष्ट नियम निर्धारित करती है तो रिहायशी-कमर्शियल उपयोग को लेकर लंबे समय से चल रही कई व्यावहारिक समस्याओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
हालांकि, अंतिम तस्वीर ड्राफ्ट के सार्वजनिक होने और उस पर आपत्तियों-सुझावों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगी। फिलहाल व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के लिए जरूरी है कि वे मौजूदा मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार ही अपने निर्माण और व्यावसायिक उपयोग की स्थिति की जांच करें।
नए मास्टर प्लान का आधिकारिक ड्राफ्ट जारी होने के बाद यह भी स्पष्ट होगा कि 12 से 24 मीटर और 24 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों के लिए प्रस्तावित नियम किस तरह लागू होंगे और पुराने निर्माणों तथा मौजूदा व्यावसायिक गतिविधियों के लिए क्या प्रावधान किए जाएंगे।
