इंदौर की दतुनी पहाड़ी पर रोपे गए 25 हजार पौधे, मंत्री विजयवर्गीय ने ‘ऋषि पर्वत’ नाम देने की घोषणा की
दैनिक स्वराज वाणी | इंदौर। देवगुराड़िया क्षेत्र की दतुनी पहाड़ी पर गुरुवार, 24 सितंबर को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 25 हजार पौधे रोपे गए। सूखी और पथरीली पहाड़ी को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और दादा गुरु महाराज शामिल हुए। इस अवसर पर विजयवर्गीय ने घोषणा की कि दतुनी पहाड़ी को अब ‘ऋषि पर्वत’ के नाम से जाना जाएगा। यह नामकरण कार्यक्रम में की गई घोषणा है; औपचारिक प्रशासनिक आदेश का विवरण सामने नहीं आया है।
25 हजार पौधों से अभियान की शुरुआत
दतुनी पहाड़ी पर बड़े स्तर पर पौधारोपण किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक दिन पौधे लगाना नहीं, बल्कि आने वाले समय में पहाड़ी पर हरियाली विकसित करना है। आयोजन में जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की भागीदारी रही। कार्यक्रम के दौरान पौधारोपण को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ा गया और लोगों से पौधों की देखभाल करने का आग्रह किया गया।
पथरीले क्षेत्र में पौधे लगाना हरियाली की दिशा में पहला कदम है। यहां लगाए गए पौधे कितने विकसित होंगे, यह आगे उनकी देखभाल, पानी की व्यवस्था और सुरक्षा पर निर्भर करेगा। पौधारोपण का असर आने वाले महीनों और वर्षों में तभी दिखाई देगा, जब पौधे बढ़कर पेड़ बनेंगे। यही बात मंत्री विजयवर्गीय ने भी अपने संबोधन में कही।
‘मां की तरह पौधों को पालना होगा’
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जैसे मां अपने बच्चों को पालती है, वैसे ही पौधों को पालकर पेड़ बनाना होगा। उन्होंने लोगों से पौधारोपण के बाद भी उनकी देखरेख करने का आग्रह किया। उनके मुताबिक, विकसित पेड़ लंबे समय तक लोगों और पर्यावरण के लिए उपयोगी रहेंगे।
कार्यक्रम में पौधों की संख्या के साथ उनके संरक्षण पर दिया गया यह जोर महत्वपूर्ण है। गर्मी, कम पानी या अन्य कारणों से छोटे पौधों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में पहाड़ी पर बनी नई हरियाली को बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी जरूरी होगी। पौधों के बढ़ने की स्थिति और देखरेख की व्यवस्था आने वाले समय में अभियान की सफलता का वास्तविक आधार बनेगी।
दतुनी पहाड़ी को ‘ऋषि पर्वत’ कहने की घोषणा
मंत्री विजयवर्गीय ने कार्यक्रम में कहा कि मान्यता के अनुसार इस स्थान पर पहला पौधा एक ऋषि ने रोपा था। इसी संदर्भ में उन्होंने दतुनी पहाड़ी को ‘ऋषि पर्वत’ नाम देने की घोषणा की। दादा गुरु महाराज ने भी कहा कि इंदौर आने पर वह इस स्थान को अपने पड़ावों में शामिल करेंगे।
पहाड़ी का नया नाम कार्यक्रम के दौरान सामने आया है। सार्वजनिक उपयोग में किसी स्थान का नाम प्रचलित होने और सरकारी अभिलेखों में उसका औपचारिक नाम बदलने की प्रक्रियाएं अलग हो सकती हैं। इसलिए फिलहाल इसे मंत्री की नाम देने की घोषणा के रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है।
दादा गुरु महाराज ने पौधारोपण का दिया संदेश
दादा गुरु महाराज ने आयोजन को प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन से जोड़ते हुए लोगों को इसमें भाग लेने का संदेश दिया। उन्होंने अपने संबोधन में पेड़-पौधों के प्रति आदर और उनकी देखभाल की बात कही। उनके अनुसार, ऐसे प्रयासों में सामूहिक भागीदारी जरूरी है।
पहाड़ी पर हुए इस आयोजन में धार्मिक भावना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश साथ दिखाई दिया। आयोजकों और उपस्थित लोगों के सामने अब चुनौती यह होगी कि अभियान में लगी ऊर्जा पौधों की आगे की देखभाल में भी बनी रहे। एक बार रोपण पूरा होने के बाद नियमित संरक्षण ही हरियाली को स्थायी रूप दे सकता है।
इंदौर के अन्य क्षेत्रों में भी हुआ पौधारोपण
यह पहल शहर और आसपास के क्षेत्रों में चल रहे पौधारोपण कार्यों की कड़ी है। प्रकाशित जानकारी के अनुसार, इससे पहले बुढ़ानिया पहाड़ी, कृषि महाविद्यालय, रेवती रेंज, वन विभाग की रमना भूमि, सुपर कॉरिडोर और नरवल औद्योगिक क्षेत्र में भी पौधे लगाए गए हैं। विधायक मधु वर्मा ने कहा कि रेवती रेंज के काम से प्रेरणा लेकर दतुनी पहाड़ी को हरा-भरा बनाने की योजना बनाई गई।
दतुनी पहाड़ी पर रोपे गए 25 हजार पौधों का महत्व अब उनके संरक्षण से तय होगा। यदि लगाए गए पौधे सुरक्षित रहकर बढ़ते हैं, तो आने वाले वर्षों में पहाड़ी की तस्वीर बदल सकती है। फिलहाल पौधारोपण और ‘ऋषि पर्वत’ नाम की घोषणा ने इस स्थान को शहर के हरियाली अभियान में नई पहचान दी है।
