इंदौर के मोती तबेला में शिवाजी महाराज की प्रतिमा के लिए बना ढांचा हटाने पर विवाद, थाने पहुंचे रहवासी
नगर निगम की कार्रवाई से नाराज लोगों ने अधिकारियों पर कार्रवाई और प्रतिमा स्थापना की अनुमति देने की मांग की
इंदौर, 25 सितंबर 2026। शहर के मोती तबेला इलाके में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने के लिए तैयार किया जा रहा ढांचा नगर निगम द्वारा हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। कार्रवाई से नाराज स्थानीय रहवासी, क्षेत्रीय पार्षद और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता गुरुवार रात पंढरीनाथ थाने पहुंचे। वहां उन्होंने विरोध जताते हुए कार्रवाई से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की।
प्रकाशित जानकारी के अनुसार, जिस स्थान पर प्रतिमा स्थापना की तैयारी चल रही थी, वह शासकीय भूमि है। वहां प्रतिमा के लिए एक चबूतरा बनाया जा रहा था। गुरुवार को नगर निगम की टीम ने निर्माणाधीन ढांचे को हटा दिया। इसके बाद इलाके में विरोध शुरू हुआ। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कार्रवाई से पहले उनसे संवाद नहीं किया गया। हालांकि, नगर निगम ने किस आधार पर ढांचा हटाया और इस संबंध में पहले कोई नोटिस जारी हुआ था या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
प्रतिमा स्थापना के लिए तैयार किया जा रहा था चबूतरा
मोती तबेला में स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगाने की तैयारी कर रहे थे। इसी उद्देश्य से शासकीय भूमि पर चबूतरे का निर्माण शुरू किया गया था। निगम की टीम ने जिस ढांचे को हटाया, वह निर्माणाधीन चबूतरा था; उपलब्ध जानकारी में वहां प्रतिमा स्थापित हो जाने का उल्लेख नहीं है।
इलाके में प्रतिमा लगाने की योजना से जुड़े लोगों ने निगम की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उनके अनुसार, यदि स्थान या अनुमति को लेकर कोई आपत्ति थी, तो पहले बातचीत की जानी चाहिए थी। दूसरी ओर, सार्वजनिक जमीन पर स्थायी ढांचा बनाने के लिए अनुमति की स्थिति भी स्पष्ट होना जरूरी है। इस संबंध में स्वीकृति का कोई दस्तावेज अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
पार्षद के साथ पंढरीनाथ थाने पहुंचे लोग
कार्रवाई की सूचना मिलने के बाद क्षेत्रीय पार्षद रूपाली पंडित के साथ रहवासी और संगठनों के कार्यकर्ता एकत्रित हुए। वे जुलूस के रूप में पंढरीनाथ थाने पहुंचे और नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने चबूतरा हटाने की कार्रवाई की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। पार्षद की ओर से पुलिस को लिखित शिकायत दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
थाने पर पहुंचे लोगों को पुलिस ने समझाया, जिसके बाद स्थिति शांत हुई। फिलहाल शिकायत मिलने और किसी अधिकारी के खिलाफ कानूनी मामला दर्ज होने के बीच अंतर है। उपलब्ध जानकारी में एफआईआर दर्ज होने या किसी अधिकारी पर दंडात्मक कार्रवाई की पुष्टि नहीं है।
प्रदर्शनकारियों की क्या मांग है?
पार्षद और प्रदर्शनकारियों ने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, मोती तबेला में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने के लिए विधिवत अनुमति दी जाए। दूसरी, निर्माणाधीन ढांचा हटाने के तरीके और कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच हो। उनका आरोप है कि कार्रवाई से पहले उनसे कोई संवाद नहीं किया गया।
अब यह देखना होगा कि प्रतिमा स्थापना के लिए औपचारिक आवेदन किया गया था या नहीं और संबंधित भूमि के उपयोग के बारे में प्रशासन का क्या निर्णय है। यदि आवेदन लंबित है, तो उस पर निर्णय की स्थिति स्पष्ट करना भी विवाद सुलझाने में मदद कर सकता है। निगम की ओर से कार्रवाई का लिखित कारण सामने आने पर दोनों पक्षों की बात अधिक साफ हो सकेगी।
नगर निगम का पक्ष अभी स्पष्ट नहीं
इस मामले में नगर निगम की कार्रवाई तो सामने आई है, लेकिन ढांचा हटाने के कारण पर निगम का विस्तृत आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि कार्रवाई किसी विशेष नियम के उल्लंघन, अनुमति न होने या किसी अन्य प्रशासनिक कारण से की गई। इसी तरह प्रदर्शनकारियों के ‘बिना पूर्व सूचना’ वाले आरोप की पुष्टि भी संबंधित नोटिस और रिकॉर्ड देखने के बाद ही हो सकेगी।
विवाद का केंद्र प्रतिमा स्थापना की इच्छा के साथ शासकीय भूमि पर निर्माण की अनुमति है। दोनों मुद्दों पर लिखित दस्तावेज और प्रशासनिक निर्णय सामने आने से आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी। फिलहाल मोती तबेला के रहवासी अनुमति और निगम की कार्रवाई पर जवाब चाहते हैं, जबकि पुलिस को दी गई शिकायत पर आगे क्या कदम उठेगा, इसकी जानकारी आनी बाकी है।
