SIR के विरोध में आज कांग्रेस का प्रदर्शन, दिल्ली में चुनाव आयोग कार्यालय के आसपास सुरक्षा बढ़ी
देशभर में निर्वाचन कार्यालयों तक विरोध मार्च का ऐलान; मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर राजनीतिक विवाद तेज
नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026। चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया, यानी SIR, के विरोध में कांग्रेस ने शुक्रवार को देशभर में प्रदर्शन और निर्वाचन कार्यालयों तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। दिल्ली में चुनाव आयोग कार्यालय के आसपास प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं।
यह खबर प्रदर्शन की घोषणा और दोपहर तक उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। किसी शहर में मार्च पूरा हुआ, कितने लोग शामिल हुए या प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने क्या कार्रवाई की—इन बातों की पुष्टि स्थानीय प्रशासन और आयोजकों की बाद की जानकारी से होगी।
क्या है विशेष गहन पुनरीक्षण?
विशेष गहन पुनरीक्षण या SIR मतदाता सूची की जांच और उसे अद्यतन करने की प्रक्रिया है। इसमें सूची में दर्ज लोगों की जानकारी का सत्यापन किया जाता है। जिन प्रविष्टियों पर सवाल उठते हैं, उनके संबंध में निर्वाचन अधिकारियों की ओर से नोटिस या दस्तावेजों की मांग की जा सकती है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को सही रखना बताया जाता है, लेकिन प्रक्रिया के असर और तरीके को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है।
कांग्रेस की चिंता है कि सत्यापन के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो सकते हैं। पार्टी इस विषय को मताधिकार से जोड़कर उठा रही है। दूसरी ओर, मतदाता सूची के पुनरीक्षण में किसी व्यक्ति को नोटिस मिलना अपने आप उसके नाम के अंतिम रूप से हट जाने की पुष्टि नहीं करता। संबंधित व्यक्ति को अपनी जानकारी सत्यापित करने का अवसर मिलता है।
कांग्रेस क्यों कर रही है विरोध?
कांग्रेस के नेताओं ने SIR प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उनका आरोप है कि पुनरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटने की आशंका है और इससे वास्तविक मतदाताओं को परेशानी हो सकती है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी हाल में इस प्रक्रिया की आलोचना कर चुके हैं। ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं; किसी विशेष मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है या नहीं, इसका निर्णय संबंधित रिकॉर्ड और निर्वाचन प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।
विपक्ष की मांगों के केंद्र में मतदाता सूची की शुद्धता के साथ पात्र लोगों का नाम बना रहने का सवाल है। जिन लोगों को विवरण में अंतर या सत्यापन संबंधी नोटिस मिलता है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत जवाब देना होता है। विपक्ष का कहना है कि प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे मतदाताओं को अपना अधिकार साबित करने में अनावश्यक कठिनाई न हो।
दिल्ली में सुरक्षा क्यों बढ़ाई गई?
कांग्रेस ने 25 सितंबर को निर्वाचन कार्यालयों तक विरोध मार्च का आह्वान किया है। राजधानी में चुनाव आयोग के कार्यालय के आसपास प्रदर्शन की संभावना को देखते हुए सुरक्षा बढ़ाई गई है। ऐसे आयोजनों के दौरान पुलिस की व्यवस्था का उद्देश्य भीड़ को संभालना और कार्यालय के आसपास आवागमन बनाए रखना होता है।
फिलहाल दिल्ली के किसी खास मार्ग पर यातायात प्रतिबंध या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का पुष्ट विवरण इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है। कार्यालय के आसपास जाने वाले लोगों को निकलने से पहले दिल्ली पुलिस की ताजा यातायात सूचना देखनी चाहिए।
‘राज्य निर्वाचन आयोग’ और ‘मुख्य निर्वाचन अधिकारी’ में क्या अंतर है?
इस मुद्दे पर एक नाम संबंधी भ्रम दूर करना जरूरी है। SIR लोकसभा और विधानसभा की मतदाता सूचियों से जुड़ी भारत निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया है। राज्यों में इसके कामकाज से जुड़े कार्यालय मुख्य निर्वाचन अधिकारी और अन्य संबंधित निर्वाचन अधिकारी होते हैं। ‘राज्य निर्वाचन आयोग’ अलग संस्था है, जो स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों से जुड़ी होती है।
इसलिए कांग्रेस के प्रस्तावित राज्यस्तरीय मार्च का उल्लेख करते समय संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय या निर्वाचन कार्यालय का नाम इस्तेमाल करना अधिक सटीक है। किसी राज्य में प्रदर्शन किस कार्यालय तक जाएगा, इसकी जानकारी स्थानीय कांग्रेस इकाई के कार्यक्रम से स्पष्ट होगी।
मतदाताओं को क्या करना चाहिए?
राजनीतिक विरोध के बीच आम मतदाता के लिए सबसे उपयोगी कदम अपनी प्रविष्टि की स्थिति देखना है। यदि किसी व्यक्ति को निर्वाचन अधिकारी का नोटिस मिला है, तो उसमें लिखी समय सीमा और अपेक्षित जानकारी पर ध्यान देना चाहिए। नाम, पता या अन्य विवरण में अंतर हो तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुधार या सत्यापन कराया जा सकता है।
SIR पर राजनीतिक बहस जारी है और शुक्रवार के प्रदर्शनों के बाद कांग्रेस तथा चुनाव आयोग की ओर से नए बयान आ सकते हैं। फिलहाल स्पष्ट तथ्य यह है कि कांग्रेस ने 25 सितंबर को विरोध मार्च का ऐलान किया है और दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा बढ़ाई गई है।
